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शहीद की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़: अधूरा रह गया शादी का वादा, सेहरा सजा मां ने किया विदा तो हर कोई रोने लगा
Mon, 29 May 2023 09:05 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 29 May 2023 09:05 PM IST
सार
15 मार्च 1996 को जन्मे सहजपाल सिंह भारतीय सेना 22 दिसंबर 2015 को ज्वाइन की थी। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्होंने 20 पंजाब रेजीमेंट ज्वाइन की। इस समय उनकी पोस्टिंग अरुणाचल प्रदेश में किबिथू गांव के नजदीक चीन सरहद पर थी।
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सेहरा सजा शहीद को दी अंतिम विदाई।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
फौजी बेटे ने छुट्टी पर आकर जल्द ही शादी करने का वादा अपनी मां से किया था लेकिन यह वादा अधूरा ही रह गया। अरुणाचल प्रदेश में बेटे की शहादत के बाद जब पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचा तो मां परमजीत कौर टूट गईं। रोते-बिलखते मां ने अपने कांपते हाथों से बेटे के सिर पर सेहरा सजाया और उसे अंतिम विदाई दी।
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शहीद जवान सहजपाल सिंह का अंतिम संस्कार सोमवार को उनके पैतृक गांव रंधावा में किया गया। अंतिम यात्रा में बड़ा हुजूम उमड़ा। हर किसी की आंखें नम थीं। लोगों ने शहीद सहजपाल सिंह अमर रहे के नारे लगाए। माहौल देशभक्ति के रंग में रंग गया। बता दें कि अरुणाचल प्रदेश में चीन की सरहद पर देश की एकता व अखंडता की रक्षा करते वक्त सहजपाल सिंह ने अपना बलिदान दिया था।
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शहीद के पिता अमरजीत सिंह व मां परमजीत कौर व भाई फौजी जवान अमृतपाल सिंह ने शहीद सहजपाल सिंह को सलामी दी। रविवार देर शाम अरुणाचल प्रदेश से वापस लाने के बाद शहीद जवान के पार्थिव शरीर को एक बड़े काफिले के साथ सोमवार को उनके गांव रंधावा लाया गया। परिवार ने नम आंखों के साथ शहीद के सिर पर सेहरा सजाया और इसके बाद पूरे फौजी सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। मंत्री चेतन सिंह जौड़ामाजरा और सांसद परनीत कौर जवान को अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
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इस दौरान मातमी धुन बजाई गई। जवानों ने गार्ड ऑफ आनर दिया। पटियाला मिलिट्री स्टेशन के कैप्टन संजीव नाग व 20 पंजाब रेजीमेंट से आए नायब सूबेदार रणजीत सिंह ने शहीद के शरीर पर लिपटा तिरंगा झंडा अभिभावकों को सौंप कर सलामी दी।
गौरतलब है कि 15 मार्च 1996 को जन्मे सहजपाल सिंह भारतीय फौज में 22 दिसंबर 2015 को भर्ती हुए थे। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्होंने 20 पंजाब रेजीमेंट ज्वाइन की। इस समय उनकी पोस्टिंग अरुणाचल प्रदेश में किबिथू गांव के नजदीक चीन सरहद पर थी और वह बीते दिनों चीन सीमा पर अपने साथियों के साथ गश्त पर थे। जहां वह शहीद हो गए थे। जबकि शहीद का छोटा भाई अमृतपाल सिंह 17 पंजाब रेजीमेंट में सेवा निभा रहे हैं।