शादी युवाओं के लिए पूरी तरह से ‘ब्लाइंड सिग्नेचर’
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स्वास्थ्य और खेल मंत्री अनिल विज इन दिनों अपने बड़बोले और तल्ख बयानों को लेकर सुर्खियों में चल रहे हैं। अब संस्कृत को पढ़ाने की वकालत करने के लिए खेल मंत्री ने फिर से एक अनोखा बयान दिया है। उनके इस बयान से हिंदू रीति-रिवाज के साथ होने वाली शादियों पर ही एक सवाल खड़ा हो गया है।
लेकिन मंत्री विज का कहना है कि उनके बयान को सकारात्मक रूप में लिया जाए, इसे हिंदू संस्कृति का विरोधी न समझा जाए। उन्होंने ट्वीट भी किया है।
क्योंकि जो बात वह कहना चाहते हैं, उस पर मानव संसाधन मंत्रालय इस पर गौर जरूर करे और संस्कृत को सभी पाठ्यक्रमों में अनिवार्य विषय के रूप में शामिल कराए। विज के मीडिया प्रभारी बलकेश वत्स के अनुसार मंत्री का बयान संस्कृत भाषा की वकालत करने वाला है।
संस्कृत को पाठ्यक्रम में शामिल करने की वकालत
अनिल विज ने कहा है कि हिंदू रीति-रिवाज के साथ होने वाली शादियां युवा दंपतियों के लिए पूरी तरह से ‘ब्लाइंड सिग्नेचर’ के तौर पर होती हैं। क्योंकि युवक व युवती शादी के मंडप पर बैठे होते हैं और पंडित जी संस्कृत में मंत्रोच्चारण कर रहे होते हैं।
लेकिन दंपति को पंडित जी के संस्कृत के किसी भी श्लोक व मंत्र का मतलब समझ नहीं आता, बस वे पंडिज जी की हां में हां मिलाते रहते हैं और इन औपचारिकताओं को निपटाने की कोशिश करते हैं। इस लिहाज से उनका शादी का बंधन एक ब्लाइंड सिग्नेचर के रूप में हो जाता है।
विज चाहते हैं कि सभी स्कूलों व कॉलेजों के पाठ्यक्रमों में संस्कृत को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया जाए, ताकि आने वाले पीढ़ी को संस्कृत का ज्ञान हो और शादी के मंडप में बैठे दंपति को मंत्रों का मतलब और मायने समझ में आएं।