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मिलिट्री लिटफेस्टः रक्षा विशेषज्ञों ने कहा- चीन को हद में रखने के लिए जरूरी है समुद्री गठजोड़

Sun, 20 Dec 2020 05:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 20 Dec 2020 05:28 AM IST
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Maritime alliances are necessary to keep China in limits
सन 1967 में नाथूला-चौला दर्रे पर चीन के साथ भारतीय सेना के टकराव की तस्वीर... - फोटो : amar ujala

आज थल से लेकर जल तक जिस तरह चीन अपना दायरा और ताकत बढ़ा रहा है, उसके मद्देनजर ‘ड्रेगन’ यानी चीन को अपनी हद में रखने के लिए समुद्री गठजोड़ करना होगा। इसलिए जरूरी है कि इंडो पैसेफिक नेवल अलायंस में भारत, अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया को एक होना होगा। इसी की वकालत शनिवार को मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट के दूसरे दिन रक्षा विशेषज्ञों ने की।

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चर्चा का संचालन करते हुए नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के चार देशों के एक क्लब के रूप में गठन संबंधी बात कही। लंबे समय से यह प्रयास चल रहे हैं। मगर बीच में आस्ट्रेलिया द्वारा चीन से दुश्मनी मोल न लेने की सोच के साथ यह मामला अधर में लटक गया। अब चीन के आक्रामक और अड़ियल रवैये के कारण 2017 से यह प्रयास फिर से तेज किए गए हैं। 
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पूर्व राजदूत श्याम सरन ने खुलासा करते हए कहा कि दरअसल अमेरिका इस गठजोड़ को नीचा दिखाना चाहता था, क्योंकि वह ईरान परमाणु सौदे को आगे बढ़ाने के लिए चीन और रूस के समर्थन को छोड़ना नहीं चाहता था। इसलिए आज पुरानी बातों को छोड़ भारत, जापान, आस्ट्रेलिया समेत दूसरे देशों को अड़ियल चीन की तरफ  से पेश आ रही चुनौती के मद्देनजर एकजुट होने की जरूरत है। 
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वाइस एडमिरल प्रदीप चौहान का मानना है कि चीन, भारत को अपने विरोधियों में से एक मानता है और हम अभी इस चुनौती से निपटने के लिए तैयार नहीं हैं। हम इस चुनौती को कम आंक रहे हैं। लिहाजा हमें एक तत्काल मजबूत रणनीति बनाने की जरूरत है।

‘राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को राजनीतिक सोच से ऊपर रखना होगा’

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को राजनीतिक सोच से ऊपर रखना होगा। रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ठीक है, मगर यह भी देखना होगा कि क्या वर्तमान परिदृश्य में हम इतने सामर्थ्यवान हैं कि स्वदेशी के दम पर रक्षा इको सिस्टम को और मजबूती दे सकें। इसको लेकर मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट में रक्षा मामलों के जानकार राहुल बेदी, एमवी कोटवाल, विष्णु सोम, ब्रिगेडियर सुरेश गंगाधरन, सांसद राजीव चंद्रशेखर व हरपाल सिंह शामिल रहे।

राहुल बेदी ने कहा कि रक्षा निर्माण में नीतियों और एजेंसियों की बहुलता से खिचड़ी बनती है और स्वदेशीकरण प्रक्रिया में बहुत भ्रम पैदा होता है। एक सिद्धांत के रूप में आत्मनिर्भरता प्रयास उत्कृष्ट है। एमवी कोटवाल ने कहा कि रक्षा मामले में हर एक तकनीक स्वदेश में ही बनाने में कोई बुद्धिमानी नहीं है लेकिन देश को विकसित होने के लिए जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, उसे प्राथमिकता देनी चाहिए और अपने विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। 

राजनीतिक सोच से ऊपर उठकर प्रमुख क्षेत्रों में निवेश करने की दीर्घकालिक रणनीति बनानी चाहिए। ब्रिगेडियर सुरेश गंगाधरन ने रक्षा उपकरणों के मानकीकरण और मापनीयता की वकालत की। उन्होंने सेना, आरएंडडी, शिक्षा और उद्योग के सहज एकीकरण की बात भी की। हरपाल सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा के नागरिक पहलू को सामने रखा। उन्होंने चिंता जताई कि क्या हमारा रक्षा इको-सिस्टम देश को बचाने के लिए स्वतंत्र रूप से हथियार विकसित करने में समर्थ है या हम अब भी अपनी रक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर हैं। 

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