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पंजाब कैबिनेट: कैप्टन ने जारी किए 19 हजार पदों को तुरंत भरने के आदेश, पढ़ें अन्य प्रमुख फैसले
Tue, 17 Sep 2019 10:39 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Tue, 17 Sep 2019 10:39 AM IST
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पंजाब कैबिनेट मीटिंग
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सरकार के विभिन्न विभागों में 19 हजार पद भरने के लिए तुरंत जरूरी कदम उठाने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने के लिए भर्ती नियमों को आसान बनाने का फैसला भी किया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि इनमें पुलिस विभाग में 5000 पद, बिजली विभाग (पावरकॉम) में 5300, अध्यापकों की 2500, स्वास्थ्य विभाग में डाक्टरों और स्पेशलिस्ट समेत पैरा मेडिकल और अन्य संबंधित स्टाफ के 5000 और राजस्व विभाग में 1300 पद को पहल के आधार पर भरा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बाकी विभागों को भी बिना किसी देरी से खाली पड़े पदों की सूची सौंपने को कहा है ताकि इन्हें जल्द से जल्द भरने की प्रक्रिया शुरू की जा सके। सोमवार को मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिमंडल की मीटिंग के बाद प्रवक्ता ने बताया कि सरकार ने विभिन्न कानूनों में संशोधन करके राज्य में योग्य सिविल सेवाओं उम्मीदवारों के लिए भर्ती नियमों को आसान बनाने का फैसला भी किया है। इससे खाली पड़े पदों को भरने के लिए रास्ता साफ हो सकेगा।
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मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि इनमें पुलिस विभाग में 5000 पद, बिजली विभाग (पावरकॉम) में 5300, अध्यापकों की 2500, स्वास्थ्य विभाग में डाक्टरों और स्पेशलिस्ट समेत पैरा मेडिकल और अन्य संबंधित स्टाफ के 5000 और राजस्व विभाग में 1300 पद को पहल के आधार पर भरा जाएगा।
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मुख्यमंत्री ने बाकी विभागों को भी बिना किसी देरी से खाली पड़े पदों की सूची सौंपने को कहा है ताकि इन्हें जल्द से जल्द भरने की प्रक्रिया शुरू की जा सके। सोमवार को मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिमंडल की मीटिंग के बाद प्रवक्ता ने बताया कि सरकार ने विभिन्न कानूनों में संशोधन करके राज्य में योग्य सिविल सेवाओं उम्मीदवारों के लिए भर्ती नियमों को आसान बनाने का फैसला भी किया है। इससे खाली पड़े पदों को भरने के लिए रास्ता साफ हो सकेगा।
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सर्विस नियमों में बदलाव का प्रस्ताव मंजूर
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मंत्रिमंडल ने पर्सोनल विभाग के उस प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है जिसके अंतर्गत पंजाब रिक्रूटमेंट ऑफ एक्स-सर्विसमैन के रूल 4(2), पंजाब रिक्रूटमेंट ऑफ स्पोर्ट्समैन रूल्स -1998, पंजाब स्टेट सिवल सर्विस (अपॉइंटमेंट बाय कंबाइंड एग्जामिनेशन) रूल्स, 2009 के मसौदे और नोटिफिकेशन में अपेक्षित संशोधन के अलावा पंजाब स्टेट सिविल सर्विस (अपॉइंटमेंट बाय कंबाइंड एग्जामिनेशन) रूल्स, 2009 में रूल 10 (ए) जोड़ना शामिल है।
मंत्रिमंडल ने इन नियमों के अंतिम मसौदों की मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है। उल्लेखनीय है कि मौजूदा नियमों के तहत अलग-अलग श्रेणियों के पद खाली हैं। इनमें आरक्षित अनुसूचित जातियों, वाल्मीकि व मजहबी सिख और सामान्य श्रेणी व एक्स-सर्विसमैन की श्रेणियां शामिल हैं।
इन पर अलग-अलग तौर पर विचार किया जाता है। इस कारण यह अस्पष्टता बनी रही है कि वाल्मीकि और मजहबी सिख श्रेणी से एक्स-सर्विसमैन पद और खेल कोटे के खाली पड़े पद को वाल्मीकि और मजहबी सिख के पूल या सभी अनुसूचित जातियों के पूल से भरा जा सकता है या नहीं।
ऐसी स्थिति में इन पदों को भरने से मुकदमेबाजी चलती थी। इनके मद्देनजर पर्सोनल विभाग ने प्रस्तावित किया कि नियमों और निर्देशों में संशोधन करके सभी श्रेणियों के पदों के लिए स्पष्ट स्थिति बनाई जाए। इसमें अनुसूचित जातियों और पिछड़ी श्रेणियों के हितों की सुरक्षा को भी यकीनी बनाया जाए।
मंत्रिमंडल ने इन नियमों के अंतिम मसौदों की मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है। उल्लेखनीय है कि मौजूदा नियमों के तहत अलग-अलग श्रेणियों के पद खाली हैं। इनमें आरक्षित अनुसूचित जातियों, वाल्मीकि व मजहबी सिख और सामान्य श्रेणी व एक्स-सर्विसमैन की श्रेणियां शामिल हैं।
इन पर अलग-अलग तौर पर विचार किया जाता है। इस कारण यह अस्पष्टता बनी रही है कि वाल्मीकि और मजहबी सिख श्रेणी से एक्स-सर्विसमैन पद और खेल कोटे के खाली पड़े पद को वाल्मीकि और मजहबी सिख के पूल या सभी अनुसूचित जातियों के पूल से भरा जा सकता है या नहीं।
ऐसी स्थिति में इन पदों को भरने से मुकदमेबाजी चलती थी। इनके मद्देनजर पर्सोनल विभाग ने प्रस्तावित किया कि नियमों और निर्देशों में संशोधन करके सभी श्रेणियों के पदों के लिए स्पष्ट स्थिति बनाई जाए। इसमें अनुसूचित जातियों और पिछड़ी श्रेणियों के हितों की सुरक्षा को भी यकीनी बनाया जाए।
बाकी कार्यकाल के लिए मंत्रियों को कार्ययोजना बनाने के निर्देश
अपनी सरकार का आधा कार्यकाल पूरा होने के मद्देनजर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सोमवार को कैबिनेट मंत्रियों को उनके विभागों के लिए व्यापक कार्य योजना बनाने और विधायकों के साथ नजदीकी तालमेल के जरिए विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री और कैबिनेट ने 30 महीनों के दौरान सरकार द्वारा प्रगति और राज्य की विकास योजनाओं को आगे ले जाने संबंधी विचार-चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने अकाली-भाजपा सरकार की खराब नीतियों के नतीजे के तौर पर राज्य में पैदा हुए वित्तीय संकट के बावजूद अपनी सरकार द्वारा अब तक किये कामों पर तसल्ली व्यक्त की। अपनी सरकार का आधा कार्यकाल पूरा होने को ‘पिछले समय के कामों का जायजा लेने और बाकी रहते कार्यकाल के लिए विस्तृत रणनीति तैयार करने’ का समय बताते हुए मुख्यमंत्री ने ठोस कार्य योजना के साथ आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने मंत्रियों को नियमित आधार पर जानकारी और फीडबैक हासिल करने के लिए अपने संबंधित क्षेत्रों के विधायकों के साथ नजदीकी तालमेल के जरिए काम करने को कहा।
मंत्रियों को अपने कामों की समीक्षा करने की भी हिदायत दी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनैतिक और प्रशासकीय दृष्टिकोण से भविष्य की रणनीति को देखना बेहद ज़रूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा ‘‘राजनैतिक तौर पर हमें यह पता लगाने की जरूरत है कि हमें लोगों के साथ बढ़िया तालमेल कैसे करना है, हमारी प्राप्तियों को उन तक कैसे ले जाना है और तुरंत ध्यान देने की जरूरत वाले उनके मुद्दों को कैसे प्राथमिकता देनी है। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से अपील की कि वह चुनावी वादों और मैनीफिस्टों के ऐलानों को लागू करने के संबंध में हुई प्रगति के लिहाज से 30 महीनों के अपने कामों की समीक्षा करें।
इस संदर्भ में उन्होंने मंत्रियों को भारत सरकार के प्रमुख प्रोग्रामों और सरकार के नये कानूनों / नीति की कारगुजारी की तरफ विशेष ध्यान देने के लिए भी कहा। मुख्यमंत्री का विचार था कि हर विभाग को अपनी प्राप्तियों को संपूर्ण तौर पर जांचना चाहिए और उन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिनका अभी तक प्रभावशाली ढंग के साथ हल नहीं किया गया या अभी सरकार द्वारा कदम उठाये जाने हैं। उन्होंने सरकार की नीतियों में भरोसा रखने वाले लोगों की उम्मीदों को जल्द पूरा किये जाने को यकीनी बनाने पर ज़ोर दिया।
मुख्यमंत्री ने अकाली-भाजपा सरकार की खराब नीतियों के नतीजे के तौर पर राज्य में पैदा हुए वित्तीय संकट के बावजूद अपनी सरकार द्वारा अब तक किये कामों पर तसल्ली व्यक्त की। अपनी सरकार का आधा कार्यकाल पूरा होने को ‘पिछले समय के कामों का जायजा लेने और बाकी रहते कार्यकाल के लिए विस्तृत रणनीति तैयार करने’ का समय बताते हुए मुख्यमंत्री ने ठोस कार्य योजना के साथ आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने मंत्रियों को नियमित आधार पर जानकारी और फीडबैक हासिल करने के लिए अपने संबंधित क्षेत्रों के विधायकों के साथ नजदीकी तालमेल के जरिए काम करने को कहा।
मंत्रियों को अपने कामों की समीक्षा करने की भी हिदायत दी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनैतिक और प्रशासकीय दृष्टिकोण से भविष्य की रणनीति को देखना बेहद ज़रूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा ‘‘राजनैतिक तौर पर हमें यह पता लगाने की जरूरत है कि हमें लोगों के साथ बढ़िया तालमेल कैसे करना है, हमारी प्राप्तियों को उन तक कैसे ले जाना है और तुरंत ध्यान देने की जरूरत वाले उनके मुद्दों को कैसे प्राथमिकता देनी है। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से अपील की कि वह चुनावी वादों और मैनीफिस्टों के ऐलानों को लागू करने के संबंध में हुई प्रगति के लिहाज से 30 महीनों के अपने कामों की समीक्षा करें।
इस संदर्भ में उन्होंने मंत्रियों को भारत सरकार के प्रमुख प्रोग्रामों और सरकार के नये कानूनों / नीति की कारगुजारी की तरफ विशेष ध्यान देने के लिए भी कहा। मुख्यमंत्री का विचार था कि हर विभाग को अपनी प्राप्तियों को संपूर्ण तौर पर जांचना चाहिए और उन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिनका अभी तक प्रभावशाली ढंग के साथ हल नहीं किया गया या अभी सरकार द्वारा कदम उठाये जाने हैं। उन्होंने सरकार की नीतियों में भरोसा रखने वाले लोगों की उम्मीदों को जल्द पूरा किये जाने को यकीनी बनाने पर ज़ोर दिया।
पंजाब में मनरेगा की कहानियों को दर्शाती पुस्तिका रिलीज
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सोमवार को राज्य में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम (मनरेगा) से जुड़ी कहानियों को दर्शाती पुस्तिका ‘चेंजिंग फेस ऑफ रुरल पंजाब’ (ग्रामीण पंजाब का बदलता चेहरा) रिलीज की। यह पुस्तिका ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा तैयार की गई है। कैबिनेट साथियों के साथ इस पुस्तिका को जारी करते हुए मुख्यमंत्री ने मनरेगा की सफल कहानियां और राज्य में इस योजना को मुख्य तौर पर लागू करने के नतीजे के तौर पर ग्रामीण गरीबों के जीवन में किये गए सुधारों की सराहना की।
ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री तृप्त राजिन्दर सिंह बाजवा ने कहा कि विभाग ग्रामीण पंजाब की नुहार बदलने के लिए वचनबद्ध है और लोगों के विकास को यकीनी बनाने के लिए सभी गाँवों में टिकाऊ सार्वजनिक संपत्तियों का निर्माण करने पर ज़ोर दिया जा रहा है। इसे दर्शाने के लिए विभाग द्वारा पुस्तिका तैयार की गयी है, जिसमें मार्च, 2017 से राज्य में पार्क, व्यक्तिगत जायदादों जैसे पशुओं के शैड, आंगनवाड़ी, खेल के मैदानों, पौधे लगाने आदि जैसे सर्वोत्तम कामों को दर्शाया गया है।
बीते ढाई सालों के दौरान मनरेगा के अधीन विभिन्न जनतक जायदादों का निर्माण किया गया, जिनमें 1004 खेल मैदान, 804 पार्क, 161 नर्सरियाँ, 87 आंगणवाड़ी केंद्र, 644 राजीव गांधी सेवा केंद्र, पशुओं के लिए 7000 शैड शामिल हैं। इसके अलावा 526.71 करोड़ रुपए की लागत के साथ इंटरलौकिंग टाईलों वाली गलियों का निर्माण भी किया गया। राज्य में 1687 करोड़ रुपए की लागत के साथ लगभग 547 लाख मानवी पैदा की गई।
ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री तृप्त राजिन्दर सिंह बाजवा ने कहा कि विभाग ग्रामीण पंजाब की नुहार बदलने के लिए वचनबद्ध है और लोगों के विकास को यकीनी बनाने के लिए सभी गाँवों में टिकाऊ सार्वजनिक संपत्तियों का निर्माण करने पर ज़ोर दिया जा रहा है। इसे दर्शाने के लिए विभाग द्वारा पुस्तिका तैयार की गयी है, जिसमें मार्च, 2017 से राज्य में पार्क, व्यक्तिगत जायदादों जैसे पशुओं के शैड, आंगनवाड़ी, खेल के मैदानों, पौधे लगाने आदि जैसे सर्वोत्तम कामों को दर्शाया गया है।
बीते ढाई सालों के दौरान मनरेगा के अधीन विभिन्न जनतक जायदादों का निर्माण किया गया, जिनमें 1004 खेल मैदान, 804 पार्क, 161 नर्सरियाँ, 87 आंगणवाड़ी केंद्र, 644 राजीव गांधी सेवा केंद्र, पशुओं के लिए 7000 शैड शामिल हैं। इसके अलावा 526.71 करोड़ रुपए की लागत के साथ इंटरलौकिंग टाईलों वाली गलियों का निर्माण भी किया गया। राज्य में 1687 करोड़ रुपए की लागत के साथ लगभग 547 लाख मानवी पैदा की गई।
कैबिनेट ने पीएसीएल में 90,90,000 शेयर के विनिवेश को दी मंजूरी
50 करोड़ रुपए का राजस्व पैदा होने की उम्मीद के साथ पंजाब सरकार ने सोमवार को पंजाब अलकलीज और कैमीकल्ज लिमटिड (पीएसीएल) में पंजाब राज्य औद्योगिक विकास निगम (पीएसआईडीसी) के 90,90,000 शेयरों का विनिवेश का फ़ैसला किया। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में हुई मीटिंग में विनिवेश का फ़ैसला लिया गया। इस मीटिंग के बाद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इस कदम के साथ पैदा होने वाली राशि औद्योगिक विकास निगम के कर्जों के भुगतान के लिए प्रयोग में लाई जायेगी।
इस नीति से उद्योग निवेश में रुकी हुई रकम को उगाहने और कर्ज चुकाने में मदद मिलेगी। पीएसआईडीसी ने 3045.95 लाख की रकम पीएसीएल के बराबर पूँजी में निवेश की थी, जो शुरुआती सार्वजनिक मसले और अधिकार मुद्दे (प्रीमियम पर आधारित) रूप में थी। यह इकाई पब्लिक सैक्टर में स्थापित की गई थी और सार्वजनिक मसले के बाद पीएसआईडीसी के बराबर शेयर, जोकि 42 प्रतिशत के करीब थे, अब कर्ज की देनदारियों का पुनर्निर्माण, वित्तीय संस्थाओं और पब्लिक सैक्टर बैंक के साथ घटकर करीब 33.49 प्रतिशत रह गए हैं। पीएसआईडीसी का मुख्य उद्देश्य पंजाब में औद्योगीकरण की रफ्तार को तेज़ करना और विनि?वेश पर ध्यान देना है ताकि फंडों के जरिए अन्य इकाईयाँ स्थापित हो सकें।
बीमार घोषित की जा चुकी है पीएसीएल
कंपनी को साल 2009-10 से बड़े घाटे का सामना करना पड़ा रहा था और पीएसीएल की कुल कीमत नकारात्मक होने के कारण यह बीमार इकाई बन गई थी। बोर्ड फॉर इंडस्ट्रियल एंड फाइनेंशियल री-कंस्ट्रक्शन ने पीएसीएल को बीमार औद्योगिक कंपनीज (स्पैशल उपबंध) एक्ट -1985 (एसआईसीए) के सेक्शन 15 (1) के अधीन केस नंबर 152 /2015 द्वारा बीमार औद्योगिक कंपनी रजिस्टर्ड कर दिया था।
विनिवेश निदेशालय शुरु करेगा प्रक्रिया
डायरेक्टोरेट ऑफ डिसइनवेस्टमैंट द्वारा पीएसीएल के विनिवेश की प्रक्त्रिस्या शुरू की जाएगी। पीएसीएल एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी है, जो जनवरी 1984 में नया नंगल और रूप नगर में स्थित दो मैनुफ़ेक्चरिंग इकाइयों के साथ चालू हुई। डायरेक्टोरेट ऑफ डिसइनवेस्टमैंट ने पीएसीएल में पीएसआईडीसी के बराबर के हिस्सों को विनिवेश करने के लिए चार बार (2002-03, 2004-06, 2009-11 और 2012-15 में) कोशिशें की गई लेकिन कोई भी कोशिश सफल नहीं हुई।
इस नीति से उद्योग निवेश में रुकी हुई रकम को उगाहने और कर्ज चुकाने में मदद मिलेगी। पीएसआईडीसी ने 3045.95 लाख की रकम पीएसीएल के बराबर पूँजी में निवेश की थी, जो शुरुआती सार्वजनिक मसले और अधिकार मुद्दे (प्रीमियम पर आधारित) रूप में थी। यह इकाई पब्लिक सैक्टर में स्थापित की गई थी और सार्वजनिक मसले के बाद पीएसआईडीसी के बराबर शेयर, जोकि 42 प्रतिशत के करीब थे, अब कर्ज की देनदारियों का पुनर्निर्माण, वित्तीय संस्थाओं और पब्लिक सैक्टर बैंक के साथ घटकर करीब 33.49 प्रतिशत रह गए हैं। पीएसआईडीसी का मुख्य उद्देश्य पंजाब में औद्योगीकरण की रफ्तार को तेज़ करना और विनि?वेश पर ध्यान देना है ताकि फंडों के जरिए अन्य इकाईयाँ स्थापित हो सकें।
बीमार घोषित की जा चुकी है पीएसीएल
कंपनी को साल 2009-10 से बड़े घाटे का सामना करना पड़ा रहा था और पीएसीएल की कुल कीमत नकारात्मक होने के कारण यह बीमार इकाई बन गई थी। बोर्ड फॉर इंडस्ट्रियल एंड फाइनेंशियल री-कंस्ट्रक्शन ने पीएसीएल को बीमार औद्योगिक कंपनीज (स्पैशल उपबंध) एक्ट -1985 (एसआईसीए) के सेक्शन 15 (1) के अधीन केस नंबर 152 /2015 द्वारा बीमार औद्योगिक कंपनी रजिस्टर्ड कर दिया था।
विनिवेश निदेशालय शुरु करेगा प्रक्रिया
डायरेक्टोरेट ऑफ डिसइनवेस्टमैंट द्वारा पीएसीएल के विनिवेश की प्रक्त्रिस्या शुरू की जाएगी। पीएसीएल एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी है, जो जनवरी 1984 में नया नंगल और रूप नगर में स्थित दो मैनुफ़ेक्चरिंग इकाइयों के साथ चालू हुई। डायरेक्टोरेट ऑफ डिसइनवेस्टमैंट ने पीएसीएल में पीएसआईडीसी के बराबर के हिस्सों को विनिवेश करने के लिए चार बार (2002-03, 2004-06, 2009-11 और 2012-15 में) कोशिशें की गई लेकिन कोई भी कोशिश सफल नहीं हुई।
एससी कमीशन की चेयरपर्सन की उम्र सीमा 72 साल हुई
पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार 1973 बैच की पूर्व आईएएस अधिकारी तेजिंदर कौर पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान दिखाई दे रही है। सरकार ने उन्हें 69 साल की उम्र में एससी आयोग की चेयरपर्सन नियुक्त किया। उस समय इस पद के? लिए अधिकतम आयु सीमा 70 साल थी, जिसे सोमवार को पंजाब कैबिनेट ने 72 साल किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस तरह तेजिंदर कौर अब अगले तीन साल तक इस पद पर काबिज रह सकती हैं।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रीमंडल की बैठक के बाद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब स्टेट कमीशन फॉर शेड्यूल कास्टस एक्ट 2004 की धारा 4 (1) में संशोधन के लिए एक ऑर्डिनेंस लाया जाएगा। इस समय चेयरपर्सन के सेवाकाल की सीमा छह साल या 70 साल उम्र है, जिनमें से जो भी पहले आए। प्रवक्ता के अनुसार, मंत्रिमंडल द्वारा लिया गया यह फैसला इस पद पर और ज्यादा तजुुर्बेकार तज़ुर्बेकार व्यक्ति लगाने में सहायता करेगा और राज्य में एससी समुदाय के हितों की रक्षा और सुरक्षा के लिए बने कानूनों को असरदार तरीके से लागू करने में अहम योगदान देगा।
अनुसूचित जातियों के लिए पंजाब राज्य आयोग का गठन ‘द पंजाब स्टेट कमिश्नर शेड्यूल कास्टस कमीशन एक्ट, 2004’ के अंतर्गत किया गया था। आयोग के चेयरपर्सन की नियुक्ति के संबंध में 2004 के कानून की धारा 3(2) (ए) के अनुसार सरकार द्वारा चेयरपर्सन की नियुक्ति, अनुसूचित जातियों से संबंधित प्रसिद्ध शख्सियत या फिर अनुसूचित जातियों से संबंधित राज्य सरकार का सेवामुक्त अधिकारी जो कम-से-कम प्रमुख सचिव के पद पर रहा हो, में से की जाती है। तेजिंदर कौर 2009 को सेवामुक्त हुईं और उस समय बादल सरकार ने उन्हें पंजाब इंफ्रास्ट्रक्चर रेगुलेटरी अथारिटी का चेयरपर्सन लगा दिया था। इस पद पर वे 2014 तक रहीं और कैप्टन सरकार आते ही उन्हें 2018 में एससी कमीशन का चेयरपर्सन लगा दिया गया।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रीमंडल की बैठक के बाद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब स्टेट कमीशन फॉर शेड्यूल कास्टस एक्ट 2004 की धारा 4 (1) में संशोधन के लिए एक ऑर्डिनेंस लाया जाएगा। इस समय चेयरपर्सन के सेवाकाल की सीमा छह साल या 70 साल उम्र है, जिनमें से जो भी पहले आए। प्रवक्ता के अनुसार, मंत्रिमंडल द्वारा लिया गया यह फैसला इस पद पर और ज्यादा तजुुर्बेकार तज़ुर्बेकार व्यक्ति लगाने में सहायता करेगा और राज्य में एससी समुदाय के हितों की रक्षा और सुरक्षा के लिए बने कानूनों को असरदार तरीके से लागू करने में अहम योगदान देगा।
अनुसूचित जातियों के लिए पंजाब राज्य आयोग का गठन ‘द पंजाब स्टेट कमिश्नर शेड्यूल कास्टस कमीशन एक्ट, 2004’ के अंतर्गत किया गया था। आयोग के चेयरपर्सन की नियुक्ति के संबंध में 2004 के कानून की धारा 3(2) (ए) के अनुसार सरकार द्वारा चेयरपर्सन की नियुक्ति, अनुसूचित जातियों से संबंधित प्रसिद्ध शख्सियत या फिर अनुसूचित जातियों से संबंधित राज्य सरकार का सेवामुक्त अधिकारी जो कम-से-कम प्रमुख सचिव के पद पर रहा हो, में से की जाती है। तेजिंदर कौर 2009 को सेवामुक्त हुईं और उस समय बादल सरकार ने उन्हें पंजाब इंफ्रास्ट्रक्चर रेगुलेटरी अथारिटी का चेयरपर्सन लगा दिया था। इस पद पर वे 2014 तक रहीं और कैप्टन सरकार आते ही उन्हें 2018 में एससी कमीशन का चेयरपर्सन लगा दिया गया।
ई-गवर्नेंस प्रोग्राम के लिए विशेष आईटी कैडर का होगा गठन
पंजाब सरकार की ओर से ‘डिजिटल पंजाब’ मिशन के अंतर्गत अपने अहम प्रोजैक्ट ई-गवर्नेंस को प्रभावशाली ढंग से लागू करने के लिए जल्द ही विशेष आईटी कैडर बनाया जायेगा। इस विशेष कैडर को बनाने का फ़ैसला सोमवार को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रीमंडल की मीटिंग में लिया गया। विभिन्न श्रेणियों के पदों के लिए कैडर के प्रबंधन और चयन प्रक्त्रिस्या की विधि आदि तय करने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा कमेटी का गठन किया जायेगा।
इस कैडर के चुने जाने वाले स्टाफ को विभिन्न विभागों में तैनात किया जाएगा ताकि वह संबंधित विभागों को तकनीकी नेतृत्व और सरकार के ई-गवर्नेंस प्रोग्राम को लागू करने में सहयोग दे सकें। मंत्रीमंडल की मीटिंग के बाद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि यह कैडर विभागों को तकनीकी सहयोग देगा, जो विभिन्न ई-गवर्नेंस /एम. गवर्नेंस प्रोजैक्टों को लागू करने के साथ जुड़े हैं और यह यकीनी बनाएगा कि यह समय पर लागू हो सकें।
इसके साथ ही काम को आसान करते हुए कारोबार री-इंजीनियरिंग में सहायता मुहैया करवाएगा। यह कदम राज्य की आईटी सामर्थ्य को बढ़ावा देने में भी सहायता देगा और एक अच्छी ढांचागत प्रक्त्रिस्या के द्वारा चुने जाने वाले आईटी पेशेवारों का समर्थ कैडर बनेगा। उल्लेख नीय है कि पंजाब सरकार द्वारा लोगों को बेहतर प्रशासकीय सेवाएं देने के लिए ‘डिजिटल पंजाब’ प्रोजैक्ट शुरू किया है, जो राज्य को डिजिटल रूप से शक्तिशाली समाज में बदल देगा और व्यापार करने और सरकारी सेवाएं देने के पुराने चल रहे व्यवहारिक तरीकों से निजात दिलाएगा।
डिजिटल पंजाब प्रोग्राम को आगे बढ़ाने के लिए ‘पंजाब ट्रांसपेरेंसी एंड अकाऊंटीबिलटी ऑफ डिलीवरी ऑफ पब्लिक सर्विसज़ एक्ट, 2018’ बनाया गया है जिससे नये सुधारों और उभर रही तकनीकों का लाभ उठाते हुए लोगों को तय समय के अंदर बेहतर सरकारी सेवाएं ऑनलाइन मुहैया करवाई जा सकें।
इस कैडर के चुने जाने वाले स्टाफ को विभिन्न विभागों में तैनात किया जाएगा ताकि वह संबंधित विभागों को तकनीकी नेतृत्व और सरकार के ई-गवर्नेंस प्रोग्राम को लागू करने में सहयोग दे सकें। मंत्रीमंडल की मीटिंग के बाद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि यह कैडर विभागों को तकनीकी सहयोग देगा, जो विभिन्न ई-गवर्नेंस /एम. गवर्नेंस प्रोजैक्टों को लागू करने के साथ जुड़े हैं और यह यकीनी बनाएगा कि यह समय पर लागू हो सकें।
इसके साथ ही काम को आसान करते हुए कारोबार री-इंजीनियरिंग में सहायता मुहैया करवाएगा। यह कदम राज्य की आईटी सामर्थ्य को बढ़ावा देने में भी सहायता देगा और एक अच्छी ढांचागत प्रक्त्रिस्या के द्वारा चुने जाने वाले आईटी पेशेवारों का समर्थ कैडर बनेगा। उल्लेख नीय है कि पंजाब सरकार द्वारा लोगों को बेहतर प्रशासकीय सेवाएं देने के लिए ‘डिजिटल पंजाब’ प्रोजैक्ट शुरू किया है, जो राज्य को डिजिटल रूप से शक्तिशाली समाज में बदल देगा और व्यापार करने और सरकारी सेवाएं देने के पुराने चल रहे व्यवहारिक तरीकों से निजात दिलाएगा।
डिजिटल पंजाब प्रोग्राम को आगे बढ़ाने के लिए ‘पंजाब ट्रांसपेरेंसी एंड अकाऊंटीबिलटी ऑफ डिलीवरी ऑफ पब्लिक सर्विसज़ एक्ट, 2018’ बनाया गया है जिससे नये सुधारों और उभर रही तकनीकों का लाभ उठाते हुए लोगों को तय समय के अंदर बेहतर सरकारी सेवाएं ऑनलाइन मुहैया करवाई जा सकें।
चावल के अन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल पर होगी सजा
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में मंत्रीमंडल ने सोमवार को कस्टम मिलिंग पॉलिसी फॉर पैडी (खऱीफ़ 2019-20) को मंज़ूरी दे दी और चावल को अन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की सूरत में आपराधिक दंड समेत अन्य सुरक्षा उपबंध किये गए हैं। इस स्कीम का उद्देश्य, पंजाब की खरीद एजेंसियों (पनग्रेन, मार्कफैड, पनसप, पंजाब राज्य गोदाम निगम, पंजाब एग्रो फूडग्रेनज़ निगम और भारतीय खाद्य निगम) द्वारा भारत सरकार के निर्धारित मापदण्डों के अनुसार खऱीदे जाने वाले धान की मिलिंग को राज्य में चल रही 4000 से अधिक मिलों से चावल समय पर केंद्रीय पुल में देना है।
राज्य का खाद्य, सिविल सप्लाईज़ और उपभोक्ता मामलों संबंधी विभाग नोडल विभाग के तौर पर काम करेगा। मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि सावन की फ़सल, मिलिंग सीजन 2019 -20 के दौरान मिलों को अलॉट की जाने वाली फ्री पैडी की अलॉटमैंट का एकमात्र मापदंड मिलर की साल 2018 -19 की कारगुज़ारी पर आधारित होगा। अतिरिक्त रियायतें प्रतिशत के अनुसार, मिलों द्वारा धान का भुगतान की तारीख़ के मुताबिक और पिछले साल धान के आरओ के आधार पर दी जाएंगी।
जिन मिलों ने 31 जनवरी, 2019 तक अपनी मिलिंग का काम मुकम्मल कर लिया, उन मिलों को फ्री पैडी 15 प्रतिशत और जिन मिलों ने चावलों के भुगतान का काम 28 फरवरी, 2019 निपटा लिया, उन्हें 10 प्रतिशत अतिरिक्त पैडी मिलेगी। धान के भंडारण की सुरक्षा को यकीनी बनाने के लिए मिलर्स को 3000 टन से ऊपर अलॉट फ्री पैडी के पाँच प्रतिशत अधिग्रहण कीमत के मूल्य के बराबर बैंक गारंटी देनी होगी। इस कदम से 1250 से अधिक चावल मिलें इस गारंटी क्लॉज के घेरे में आ जाएंगी।
इसके अलावा मिलर्स को भंडार किये धान के प्रत्येक मीट्रिक टन पर 125 रुपए के हिसाब के साथ कस्टम मिलिंग सिक्योरिटी जमा करवानी होगी। राज्य में इस समय पर 29 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल धान के अधीन है, जिससे 170 लाख टन धान की फ़सल खऱीदे जाने की आशा है। पिछले साल 31.03 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल धान अधीन था, जो इस साल घटा है। धान की कस्टम मिलिंग को मुकम्मल करने का लक्ष्य 31 मार्च, 2020 तक है, जिसके अंतर्गत सारा बकाया चावल भारतीय खाद्य निगम को अदा किया जाऐगा।
राज्य का खाद्य, सिविल सप्लाईज़ और उपभोक्ता मामलों संबंधी विभाग नोडल विभाग के तौर पर काम करेगा। मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि सावन की फ़सल, मिलिंग सीजन 2019 -20 के दौरान मिलों को अलॉट की जाने वाली फ्री पैडी की अलॉटमैंट का एकमात्र मापदंड मिलर की साल 2018 -19 की कारगुज़ारी पर आधारित होगा। अतिरिक्त रियायतें प्रतिशत के अनुसार, मिलों द्वारा धान का भुगतान की तारीख़ के मुताबिक और पिछले साल धान के आरओ के आधार पर दी जाएंगी।
जिन मिलों ने 31 जनवरी, 2019 तक अपनी मिलिंग का काम मुकम्मल कर लिया, उन मिलों को फ्री पैडी 15 प्रतिशत और जिन मिलों ने चावलों के भुगतान का काम 28 फरवरी, 2019 निपटा लिया, उन्हें 10 प्रतिशत अतिरिक्त पैडी मिलेगी। धान के भंडारण की सुरक्षा को यकीनी बनाने के लिए मिलर्स को 3000 टन से ऊपर अलॉट फ्री पैडी के पाँच प्रतिशत अधिग्रहण कीमत के मूल्य के बराबर बैंक गारंटी देनी होगी। इस कदम से 1250 से अधिक चावल मिलें इस गारंटी क्लॉज के घेरे में आ जाएंगी।
इसके अलावा मिलर्स को भंडार किये धान के प्रत्येक मीट्रिक टन पर 125 रुपए के हिसाब के साथ कस्टम मिलिंग सिक्योरिटी जमा करवानी होगी। राज्य में इस समय पर 29 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल धान के अधीन है, जिससे 170 लाख टन धान की फ़सल खऱीदे जाने की आशा है। पिछले साल 31.03 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल धान अधीन था, जो इस साल घटा है। धान की कस्टम मिलिंग को मुकम्मल करने का लक्ष्य 31 मार्च, 2020 तक है, जिसके अंतर्गत सारा बकाया चावल भारतीय खाद्य निगम को अदा किया जाऐगा।
बीमार इकाईयों के डिफाल्टर चावल मिलर्स के लिए बकाया वसूली और निपटारा स्कीम को मंजूरी
पंजाब मंत्रीमंडल द्वारा बीमार पड़ी चावल इकाईयों के पुर्नोद्धार करने के लिए डिफालटर मिल्लर्ज़ के लिए बकाया वसूली और निपटारा स्कीम को हरी झंडी पंजाब में बीमार पड़ी चावल इकाइयों के पुर्नोद्धार के लिए मंत्रीमंडल ने सोमवार को राज्य के डिफाल्टर चावल मिलर्स के लिए बकाया वसूली और निपटारा स्कीम 2019-20 को मंजूरी दे दी।
इस स्कीम से इन मिलर्स द्वारा विभिन्न खातों में बकाया पड़ी 2041.51 करोड़ रुपए के महत्वपूर्ण हिस्से की अदायगी की वसूली के लिए रास्ता साफ होगा। मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि 2014-15 के फ़सल वर्ष समेत अब तक के डिफाल्टर मिलर्स इस स्कीम का फ़ायदा उठा सकते हैं। हालांकि न डिफाल्टरों ने सितम्बर 2017 में एकमुश्त स्कीम का फ़ायदा लिया था, वह नयी स्कीम का फ़ायदा लेने के लिए योग्य नहीं होंगे।
डिफालटरों के पास ‘परिमान निर्धारण के लिए निपटारा पत्र’ (कुआंटीफिकेशन फॉर सेटलमेंट लेटर) जारी होने के 30 दिनों के अंदर कुल वसूली योग्य रकम अदा करने का मौका होगा। उन्होंने अन्य मौके के तहत, मिलर्स को विकल्प दिया गया है कि पत्र जारी करने के 7 दिन के अंदर कुल वसूली योग्य रकम का 25 प्रतिशत अदा करें, 25 प्रतिशत की दूसरी किश्त 60 दिनों के अंदर 10 प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करें, तीसरी 25 प्रतिशत की किश्त 90 दिनों के अंदर 12 प्रतिशत ब्याज और बाकी बची 25 प्रतिशत अदायगी 120 दिनों के अंदर 15 प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करें।
इस स्कीम से इन मिलर्स द्वारा विभिन्न खातों में बकाया पड़ी 2041.51 करोड़ रुपए के महत्वपूर्ण हिस्से की अदायगी की वसूली के लिए रास्ता साफ होगा। मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि 2014-15 के फ़सल वर्ष समेत अब तक के डिफाल्टर मिलर्स इस स्कीम का फ़ायदा उठा सकते हैं। हालांकि न डिफाल्टरों ने सितम्बर 2017 में एकमुश्त स्कीम का फ़ायदा लिया था, वह नयी स्कीम का फ़ायदा लेने के लिए योग्य नहीं होंगे।
डिफालटरों के पास ‘परिमान निर्धारण के लिए निपटारा पत्र’ (कुआंटीफिकेशन फॉर सेटलमेंट लेटर) जारी होने के 30 दिनों के अंदर कुल वसूली योग्य रकम अदा करने का मौका होगा। उन्होंने अन्य मौके के तहत, मिलर्स को विकल्प दिया गया है कि पत्र जारी करने के 7 दिन के अंदर कुल वसूली योग्य रकम का 25 प्रतिशत अदा करें, 25 प्रतिशत की दूसरी किश्त 60 दिनों के अंदर 10 प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करें, तीसरी 25 प्रतिशत की किश्त 90 दिनों के अंदर 12 प्रतिशत ब्याज और बाकी बची 25 प्रतिशत अदायगी 120 दिनों के अंदर 15 प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करें।