गेहूं खरीद सिस्टम में खामियां : कहीं मैसेज नहीं पहुंच रहा तो कहीं बारदाने की कमी बनी खरीद में बाधा
- मंडी में गेहूं खरीद शुरू हुए बीत चुके हैं चार दिन
- गेहूं खरीद को लेकर तैयारियों में कई खामियां उजागर
- अब किसानों को दोबारा मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर एंट्री करनी होगी
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हरियाणा गेहूं खरीद शुरू होने के मात्र चार दिन के भीतर ही सिस्टम की खामियां उजागर होने लगी हैं। किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या खरीद के लिए आने वाला मैसेज है। किसी को मैसेज नहीं मिल रहा है तो कहीं उन किसानों के पास पहुंच रहा है, जिनकी फसल अभी पकी नहीं है। हालांकि, खामी पकड़े जाने पर सरकार ने बगैर शेड्यूल के खरीद की बात कही है। प्रदेश की कई मंडियों में बारदाना नहीं पहुंचने की भी शिकायतें आ रही हैं। ऐसी खामियों के मद्देनजर 48 घंटे में मंडियों में उठान के दावे पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
भिवानी, यमुनानगर, कैथल, करनाल और अंबाला में किसानों को मैसेज नहीं आने से परेशानी हो रही है। पानीपत और झज्जर में ऐसे किसानों को मैसेज पहुंचे हैं जिनकी फसल अभी पकी ही नहीं है। ऐसे में किसान दुविधा में हैं कि आखिर गेहूं की बिक्री कैसे और कब होगी।
प्रदेश सरकार ने अब किसानों के अनुसार, शेड्यूल बनाने का आश्वासन दिया है। अब किसानों को दोबारा मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर एंट्री करनी होगी। हरियाणा आढ़ती एसोसिएशन पदाधिकारियों का कहना है कि मंडियों में बारदाने की समस्या आ रही है। भिवानी, फतेहाबाद और अंबाला में बारदाने की शिकायतें आई हैं। अन्य जिलों में भी किसानों को गेट पास, नमी चेक कराने समेत कई परेशानियां हो रही हैं। इन समस्याओं को जल्द दूर किया जाए।
मंडियों से बाहर सरसों के अधिक दाम
बंद हो मैसेज सिस्टम : मान
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान का कहना है कि मैसेज सिस्टम गलत है, इसे तुरंत प्रभाव से बंद किया जाना चाहिए। जिन लोगों ने योजना लागू की है, उन्हें न तो खेती का ज्ञान है और न ही मंडी का। अगर किसान के पास इतनी मैनेजमेंट और इतने साधन होते कि वह फसल कटवाने के बाद फसल को कई दिन अपने घर रख ले तो वह आज किसान नहीं, बल्कि व्यापारी होता। कंबाइन मिलना, मौसम और फिर ट्रैक्टर-ट्रॉली से फसल मंडी में पहुंचाना एसएमएस के हिसाब से नहीं हो सकता। जो किसान मंडियों में फसल लेकर आ रहा है, उसकी खरीद की जाए।
अभी खरीद की शुरुआत ही हुई है और गेहूं की आमद कम है। बारदाने की अगर दिक्कत है तो उसे दूर कर लिया जाएगा। एसएमएस की जहां तक बात है किसान अब पोर्टल पर जाकर खुद अपनी फसल के लिए शेड्यूल तय कर सकेंगे। - अनुराग रस्तोगी, एसीएस, फूड एंड सप्लाई विभाग के एसीएस