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चंडीगढ़: नए सलाहकार के सामने खड़ी हैं कई चुनौतियां, बिजली विभाग के निजीकरण और मोनो रेल प्रोजेक्ट हैं जरूरी

Thu, 24 Jun 2021 02:44 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 24 Jun 2021 02:44 PM IST
सार

पिछले कई साल से शहर में मेट्रो, मोनो रेल आदि की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि जमीनी स्तर पर अब तक इनमें से किसी पर भी काम शुरू नहीं हुआ है। वहीं इस वर्ष दिसंबर के महीने में नगर निगम के चुनाव होने हैं। यह नगर निगम के चुनाव पहले के चुनाव से काफी अलग होंगे, क्योंकि इस बार 26 नहीं बल्कि 35 वार्ड पर चुनाव लड़े जाएंगे।

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Many challenges in front of new advisor of Chandigarh Administrator
प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के साथ सलाहकार धर्मपाल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ प्रशासक के नवनियुक्त सलाहकार धर्मपाल (1988 बैच के आईएएस) के सामने कई चुनौतियां खड़ी हैं। बुधवार को पहले दिन ही उन्हें यह आभास हो गया कि यह चुनौतियां कितनी बड़ी हैं, इसलिए उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि चंडीगढ़ में काम करना उनके लिए काफी अलग रहने वाला है। सबसे बड़ी चुनौती बिजली विभाग के निजीकरण की प्रक्रिया को पूरा करने की है, क्योंकि केंद्र की इस पर पूरी नजर है। इसके अलावा भी कई और चुनौतियां हैं, जिनसे उन्हें निपटना है।

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बिजली विभाग का निजीकरण
बिजली विभाग के निजीकरण की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने का निर्देश केंद्र सरकार दे चुकी है, लेकिन कर्मचारी इसका जोरदार विरोध कर रहे हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। अब प्रशासन इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। ये दूसरी बार होगा। अगर सुप्रीम कोर्ट से प्रशासन को राहत मिलती है तो प्रशासन वित्तीय बोली खोलेगा। 

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यूटी इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम-2008

यूटी इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम-2008 का मामला कई सालों से लटका हुआ है। कई सलाहकार आए लेकिन इस मसले का हल नहीं हुआ। पूर्व सलाहकार मनोज परिदा चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन भी रहे लेकिन फिर भी वह इस समस्या को सुलझा नहीं पाए। कर्मचारी ब्रोशर दाम पर ही फ्लैट लेने की मांग कर रहे हैं लेकिन प्रशासन उन्होंने आज के दाम पर फ्लैट देने को अड़ा है, जिसकी वजह से फ्लैट के दाम कई गुना बढ़ गए हैं।

कर्मचारियों के मना करने पर विभिन्न तरीकों से मामले को सुलझाने का प्रयास किया गया लेकिन अब तक कामयाबी नहीं मिली है। यह स्कीम 2008 में चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा कर्मचारियों के लिए शुरू की गई थी, जिसमें 8000 के करीब कर्मचारियों ने आवेदन किया था। कर्मचारियों ने चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के पास 58 करोड़ रुपये भी एप्लीकेशन मनी के रूप में जमा करा दिए थे। वर्ष 2010 में बोर्ड द्वारा आयोजित ड्रा में 3930 कर्मचारी योग्य रहे थे, जिनको हाउसिंग बोर्ड ने 2012 में रजिस्ट्रेशन लेटर भी जारी कर दिया था लेकिन आज तक कर्मचारियों को अपना घर नहीं मिला है। 

ट्रिब्यून फ्लाईओवर
पूर्व सलाहकार मनोज परिदा ने ट्रिब्यून फ्लाईओवर पर सहमति बनाने के लिए बहुत प्रयास किए लेकिन असफल रहे। मामला अब पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में है। सांसद किरण खेर जल्द से जल्द फ्लाईओवर को बनाना चाहती हैं लेकिन इसके बनने से बहुत से पेड़ों को काटना पड़ेगा, इसलिए शहरवासी इसके खिलाफ हैं। अब देखना होगा कि नए सलाहकार धर्मपाल इसमें क्या रास्ता निकालते हैं। बता दें कि लोगों से फ्लाईओवर प्रोजेक्ट पर चर्चा के बाद जो भी सुझाव और विकल्प प्रशासन को मिले उन सभी पर चर्चा के बाद प्रशासन ने फ्लाईओवर को ही सबसे बेहतर विकल्प माना है। प्रशासन ने इस मामले में अपना रुख साफ करते हुए इसे समय की जरूरत बताया है। प्रशासन के रुख पर प्रशासक वीपी सिंह बदनौर अपनी मंजूरी दे चुके हैं।

मेट्रो प्रोजेक्ट, मोनो रेल

पिछले कई साल से शहर में मेट्रो, मोनो रेल आदि की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि जमीनी स्तर पर अब तक इनमें से किसी पर भी काम शुरू नहीं हुआ है। पूर्व सांसद पवन कुमार बंसल शहर में मेट्रो चलाना चाहते थे, जिसके लिए करोड़ों रुपये खर्च भी किए गए। कई योजनाएं बनीं, लेकिन वह सभी ठंडे बस्ते में चली गईं। किरण खेर के सांसद बनने के बाद उन्होंने मेट्रो प्रोजेक्ट को पूरी तरीके से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि शहर में मेट्रो की नहीं बल्कि मोनो रेल की जरूरत है, हालांकि उनके पहली बार सांसद बनने से लेकर आज तक मोनो रेल के मुद्दे पर कोई काम नहीं हुआ है। शहर में बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए किसी अन्य विकल्प की बेहद आवश्यकता है। ऐसे में अब देखना होगा कि आईएएस धर्मपाल इस मामले में क्या करते हैं। 

आगामी नगर निगम चुनाव
शहर में इस वर्ष दिसंबर के महीने में नगर निगम के चुनाव होने हैं। यह नगर निगम के चुनाव पहले के चुनाव से काफी अलग होंगे, क्योंकि इस बार 26 नहीं बल्कि 35 वार्ड पर चुनाव लड़े जाएंगे। वार्ड के बढ़ने से प्रशासन के अधिकारियों की जिम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं। हालांकि सलाहकार धर्मपाल का कहना है कि वह चंडीगढ़ में रहे हैं, इसलिए उन्हें चंडीगढ़ के बारे में काफी जानकारी है, लेकिन नगर निगम चुनाव कराना उनके लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि इस बार कांग्रेस और भाजपा के साथ अन्य राजनीतिक पार्टियां भी टक्कर में खड़ी हैं। इसलिए चुनाव को शांति तरीके से संपन्न कराना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी।
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