नए साल के पहले दिन इतना भागा, बन गया इतिहास
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गुरुवार की सुबह जब लोग नव वर्ष की बधाइयां बांटने में मशगूल थे, तब हरियाणा के भिवानी के भीम स्टेडियम पर एक नया इतिहास लिखा जा रहा था। 22 साल के मनोज वत्स स्टेडियम के एथलेटिक्स ट्रैक पर बिना रुके साढ़े 4 घंटे तक लगातार दौड़ते रहे।
मनोज ने 500 मीटर लंबे ट्रैक के 122 चक्कर लगाए। कुल 61 किमी की दूरी तय कर रिकार्ड बनाया है। इससे पहले वर्ष 2013 में उन्हीं के साथी सुनील ने 114 (57 किमी) चक्कर लगाकर बिना रुके सबसे लंबी दौड़ लगाने का रिकार्ड अपने नाम किया था, जिसे मनोज ने ध्वस्त कर नया इतिहास रचा।
मनोज की उपलब्धि का गवाह बनने के लिए बड़ी संख्या में लोग स्टेडियम में जुटे रहे। तालियों की गड़गड़ाहट से उन्होंने मनोज का हौसला बढ़ाया।
शांतिनगर के निवासी मनोज स्वामी विवेकानद से प्रेरित हैं। गुरुवार को तड़के 6 ही बजे वह स्टेडियम पहुंचे और 6 बजकर 38 मिनट पर दौड़ आरंभ की। भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश गौड़ ने हरी झंडी दिखाई और भगवान परशुराम सेना के अरुण गौड़ ने तिलक लगाकर मनोज को रवाना किया।
इसके बाद मनोज ने दौड़ लगानी शुरू की तो फिर लक्ष्य पूरा होने के बाद ही रूके। ट्रैक पर मनोज के पांव ऐसे दौड़ रहे थे, जैसे कोई मशीन चल रहा हो। हर चक्कर के साथ जोश बढ़ता ही जा रहा था। ट्रैक के किनारे खड़े लोग भी पूरे उत्साह से मनोज का हौसला बढ़ाने में जुटे रहे।
देखने वालों की निगाहें थक गई, लेकिन मनोज का हौसला नहीं टूटा। ठीक 11 बजकर 05 मिनट पर जैसे ही मनोज ने 122वां चक्कर पूरा किया साथियों ने उसे कंधे पर उठा लिया। फूल-मालाएं लादकर उपलब्धि की बधाई दी।
सेना में भर्ती के लिए ट्रेनिंग देते हैं मनोज
ऐसे पूरा किया रिकार्ड:
* 06.38 बजे सुबह मनोज ने शुरू की दौड़।
* 08.00 बजे पूरा किया 50वां चक्कर।
* 10.25 बजे पूरा हुआ 100वां चक्कर।
* 11.05 बजे 122वां चक्कर पूरा कर बनाया रिकार्ड।
शहर के शांतिनगर निवासी मनोज वत्स एथलीट हैं और सर्वोदय एकेडमी में सेना की तैयारी कर रहे बच्चों को बतौर कोच सेवाएं दे रहे हैं। मनोज ने इससे पहले दिल्ली में 21 किमी के मैराथन में हिस्सा लेकर मेडल जीता था।
जयपुर सहित कई अन्य स्थानों पर भी उन्होंने अपनी प्रतिभा दिखाई है। उनका अगला लक्ष्य ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड जीतना है। मनोज के पिता विष्णु दत्त गवर्नमेंट पीजी कॉलेज की लाइब्रेरी में कार्यरत हैं। मां सुनीता देवी गृहिणी हैं।
मनोज वत्स, धावक ने कहा कि दौड़ का मकसद सिर्फ रिकार्ड बनाना नहीं है। कोशिश युवाओं को संदेश देने की है कि कुछ भी असंभव नहीं है। नशा, हिंसा व अन्य सामाजिक बुराइयों में जकड़े युवा अपनी ताकत को सही दिशा में लगाएं तो हर रिकार्ड उनके नाम होगा। अगला लक्ष्य ओलंपिक में गोल्ड जीतना है।
मनोज के पिता ने बताया कि विष्णुदत्त बेटे की उपलब्धि पर फख्र है। जो उसने ठाना था, वह पूरा कर दिखाया है। उम्मीद है कि आगे भी उसे इसी तरह सफलता मिलेगी। देश के लिए वह मेडल जीतकर भिवानी का नाम रोशन करेगा।