'मनमोहन सिंह लड़े चुनाव, भाजपा दे अरुण जेटली को टिकट'
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पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को कांग्रेस अमृतसर संसदीय सीट से चुनाव लड़ाना चाहिए और भारतीय जनता पार्टी को मंच से ललकारते हुए चुनौती देना चाहिए कि वो एक बार फिर से देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली को अमृतसर से सांसद बनने का मौका दे।
दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। यह देश की विडंबना है कि संसदीय चुनाव हारने वाला देश का वित्त मंत्री बन जाता है और पार्षद का चुनाव हारने वाला राज्यसभा मेंबर। यह सियासी बाण नहीं बल्कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पौत्र रणदीप सिंह कोहली (22) के मन की बात है।
उन्होंने वीरवार को फोन पर दादा (मनमोहन सिंह) से कही। रणदीप बिजनेस करते हैं और साथ में सोशल वर्कर हैं। सियासत से उनका कोई लेना-देना नहीं पर समझते खूब हैं। वह कहते हैं कि भाजपा के पास संसदीय चुनाव के लिए कोई लोकल चेहरा है ही नहीं।
कांग्रेस के पास तो मनमोहन सिंह है। गुरुनगरी के वह बसे हैं। मैं चाहता हूं कि दादा जी को संसद जाने के लिए टिकट गुरुनगरी से मिले। जिला भाजपा प्रधान राजेश हनी ने कहा कि हंसराज हंस और मिस पूजा के अमृतसर से संसदीय चुनाव लड़ने की बात सिर्फ मीडिया की देन है।
'गुरू नगरी के मन में बसे हैं मोहन'
जो प्रत्याशी होगा वो नाम दिल्ली में तय होगा। जिला कांग्रेस प्रधान जुगल किशोर शर्मा ने कहा कि अब तक संसदीय चुनाव के लिए कोई नाम सामने नही आया। अगर डॉ. मनमोहन सिंह अमृतसर से चुनाव लड़ें तो इससे ज्यादा खुशी और क्या होगी।
कुल मिलाकर विधानसभा चुनावों का बिगुल बजते ही गुरुनगरी में सियासत गर्मा गई है। अमृतसर के पूर्व सांसद कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद अभी तक कांग्रेस पार्टी यह तय नही कर पाई है कि सांसद किसे बनाना है।
उधर, भारतीय जनता पार्टी भी मौन है। भाजपा का दामन छोड़ कर कांग्रेस की टिकट पर ईस्ट से नवजोत सिंह सिद्धू चुनाव लड़ेंगे। यह बात पूर्व विधायक डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने घोषणा कर दी है। इससे तय हो गया है कि सिद्धू पंजाब की ही राजनीति करेंगे। संसद में जाने का उनका इरादा अब नही है।
छह बार सांसद व एक बार विदेश मंत्री रहे रघुनंदन लाल भाटिया कहते हैं कि कांग्रेस इस बार पंजाब में सरकार बनाएगी। सांसद के लिए कांग्रेस को मजबूत प्रत्याशी ढूंढना होगा। गुुरुनगरी को एक सांसद चाहिए और वो भी यहां का बाशिंदा।
गौरतलब है कि पिछले लोकसभा चुनावों में देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली करीब सवा लाख वोटों से कैप्टन अमरिंदर सिंह के हारे थे। सिद्धू भाजपा से अलग हो चुके हैं अब दोनों पार्टियों के पास लोकसभा चुनावों को लेकर किसी ऐसे चेहरे की तलाश है जो उन्हें यह सीट जीतकर दे सके।