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एक शख्स, जिसने गांधीजी का भाषण सुन नौकरी छोड़ी, साबरमती आश्रम में 3 महीने उठाया मैला
नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 02 Oct 2018 09:50 AM IST
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देश में आजादी का आंदोलन चल रहा था। पिताजी दिल्ली गए हुए थे। उन्होंने दिल्ली में ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का भाषण सुना। इतने प्रभावित हुए कि पीएनबी की नौकरी छोड़कर गुजरात के साबरमती आश्रम में पहुंच गए। गांधीजी से मिले और कहा कि वे भी यहां पर काम करना चाहते थे। पिताजी ने अर्थशास्त्र में एमए किया था।
जब आश्रम में पहुंचकर गांधीजी से काम मांगा तो गांधी ने कहा कि हमारे यहां बहुत काम करना पड़ेगा। गंदगी उठानी पड़ेगी। मैला भी उठाना पड़ेगा। क्या करोगे। पिताजी ने हां कर दी। गांधी जी ने उन्हें मैला उठाने का काम दिया। साबरमती आश्रम में पिता ने तीन महीने अपने हाथों से मैला उठाया। तीन महीने बाद गांधीजी ने बुलाया और कहा कि तुम पास हो गए हो और अब वापस जाओ।
फिर उन्होंने जालंधर के पास आदमपुर खादी आश्रम में ज्वाइन किया और सेवा में लग गए। यह बातें याद करते हुए केके शारदा अतीत में खो जाते हैं। शारदा ने अपने पिताजी के मुंह से यह कहानियां सुनीं। शारदा अपने पिता के बारे में बताते हैं कि साबरमती आश्रम से आने के बाद घर में जो भी विदेशी चीजें थीं, उन्होंने सबकी होली जला दी।
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साथ ही प्रण किया कि वे जीवन भर खादी पहनेंगे और परिवार के लोग भी ऐसा ही करेंगे। पिताजी के गांधीजी के आंदोलन से जुड़ने के बाद मेरी मां वीभा शारदा भी आंदोलन से जुड़ गईं।
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जब आश्रम में पहुंचकर गांधीजी से काम मांगा तो गांधी ने कहा कि हमारे यहां बहुत काम करना पड़ेगा। गंदगी उठानी पड़ेगी। मैला भी उठाना पड़ेगा। क्या करोगे। पिताजी ने हां कर दी। गांधी जी ने उन्हें मैला उठाने का काम दिया। साबरमती आश्रम में पिता ने तीन महीने अपने हाथों से मैला उठाया। तीन महीने बाद गांधीजी ने बुलाया और कहा कि तुम पास हो गए हो और अब वापस जाओ।
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फिर उन्होंने जालंधर के पास आदमपुर खादी आश्रम में ज्वाइन किया और सेवा में लग गए। यह बातें याद करते हुए केके शारदा अतीत में खो जाते हैं। शारदा ने अपने पिताजी के मुंह से यह कहानियां सुनीं। शारदा अपने पिता के बारे में बताते हैं कि साबरमती आश्रम से आने के बाद घर में जो भी विदेशी चीजें थीं, उन्होंने सबकी होली जला दी।
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साथ ही प्रण किया कि वे जीवन भर खादी पहनेंगे और परिवार के लोग भी ऐसा ही करेंगे। पिताजी के गांधीजी के आंदोलन से जुड़ने के बाद मेरी मां वीभा शारदा भी आंदोलन से जुड़ गईं।
तीन बार जेल गए पिताजी
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शारदा बताते हैं कि उनके पिता एमके शारदा देश की आजादी के लिए गांधीजी के आह्वान पर तीन बार जेल गए। मियांवाली, सरगोधा जेल अब पाकिस्तान में हैं। इसके अलावा जालंधर जेल में भी रहे। शारदा ने कहा कि वे पंजाब के होशियारपुर के पुरहीरा गांव के रहनेवाले हैं। पूर्व मुख्यमंत्री गोपीचंद भार्गव के साथ गांधीजी के आंदोलनों में भाग लिया।
देश आजाद हुआ तो पंजाब खादी बोर्ड में सर्विस की। पंजाब खादी बोर्ड में सचिव पर पहुंचकर रिटायर हुए। केके शारदा ने बताया कि मेरा जन्म 1945 में हुआ। बचपन पिताजी द्वारा सुनाई गईं आजादी की कहानियां सुनते बीता। पंजाब में जब भी गांधी जी आए, पिताजी हमेशा उनके साथ रहे। मेरे माता पिता अब दुनिया में नहीं है लेकिन हमें गर्व है कि हमने उनके यहां जन्म लिया।
2009 में 96 साल की उम्र में परमेश्वर ने उन्हें हमसे छीन लिया। मां की मृत्यु 1981 में हुई, वह 60 साल की थीं। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब के जो भी गवर्नर बनकर चंडीगढ़ आते, उनके पिता के साथ घर आकर जरूर मिलते। केके शारदा, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी एमके शारदा के बेटा और गांधी स्मारक निधि पंजाब, हरियाणा हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के अध्यक्ष हैं।
देश आजाद हुआ तो पंजाब खादी बोर्ड में सर्विस की। पंजाब खादी बोर्ड में सचिव पर पहुंचकर रिटायर हुए। केके शारदा ने बताया कि मेरा जन्म 1945 में हुआ। बचपन पिताजी द्वारा सुनाई गईं आजादी की कहानियां सुनते बीता। पंजाब में जब भी गांधी जी आए, पिताजी हमेशा उनके साथ रहे। मेरे माता पिता अब दुनिया में नहीं है लेकिन हमें गर्व है कि हमने उनके यहां जन्म लिया।
2009 में 96 साल की उम्र में परमेश्वर ने उन्हें हमसे छीन लिया। मां की मृत्यु 1981 में हुई, वह 60 साल की थीं। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब के जो भी गवर्नर बनकर चंडीगढ़ आते, उनके पिता के साथ घर आकर जरूर मिलते। केके शारदा, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी एमके शारदा के बेटा और गांधी स्मारक निधि पंजाब, हरियाणा हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के अध्यक्ष हैं।