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लोकसभा चुनाव: ब्रह्मपुरा को घर में घेरने को सुखबीर बादल का पंथक दांव, कांग्रेस को भी चाहिए जीत
Wed, 13 Mar 2019 03:59 PM IST
खुशबू गोयल
अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 13 Mar 2019 03:59 PM IST
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रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा
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शिरोमणि अकाली दल (टकसाली) के अध्यक्ष रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा को उनके गढ़ में घेरने के लिए सुखबीर बादल ने खडूर साहिब से बीबी जागीर कौर को चुनाव मैदान में उतार कर पंथक दांव खेल दिया है। ब्रह्मपुरा के बागी हो जाने के बाद से सुखबीर बादल पर पार्टी के पंथक गढ़ को बचाने की बड़ी जिम्मेदारी थी। पिछले विधानसभा चुनाव में यह सीट अकाली दल के हाथों से निकल कर कांग्रेस के हाथ में चली गई थी।
इस सीट को दोबारा अकाली दल के पाले में लाने के लिए बीबी जागीर कौर का पंथक चेहरा कितना कारगर होगा यह तो वक्त बताएगा, लेकिन प्रदेश की राजनीति में खडूर साहिब का चुनाव नई राजनीतिक दिशा तय करेगा। खडूर साहिब संसदीय हलके से कांग्रेस पार्टी को पिछले तीस साल से जीत नसीब नहीं हुई थी। विधानसभा चुनाव में पहली बार कांग्रेस यहां से जीती। फिर अकाली दल में बीबी जागीर कौर उतनी ही वरिष्ठ हैं, जितने ब्रह्मपुरा थे।
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इस सीट को दोबारा अकाली दल के पाले में लाने के लिए बीबी जागीर कौर का पंथक चेहरा कितना कारगर होगा यह तो वक्त बताएगा, लेकिन प्रदेश की राजनीति में खडूर साहिब का चुनाव नई राजनीतिक दिशा तय करेगा। खडूर साहिब संसदीय हलके से कांग्रेस पार्टी को पिछले तीस साल से जीत नसीब नहीं हुई थी। विधानसभा चुनाव में पहली बार कांग्रेस यहां से जीती। फिर अकाली दल में बीबी जागीर कौर उतनी ही वरिष्ठ हैं, जितने ब्रह्मपुरा थे।
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बीबी का अपना राजनीतिक और धार्मिक प्रभाव
दो बार एसजीपीसी के अध्यक्ष के रूप में काम कर चुकी बीबी का अपना राजनीतिक और धार्मिक प्रभाव भी है। इसलिए सुखबीर बादल ने शिअद (ट) के उम्मीदवार पूर्व थल सेना अध्यक्ष जेजे सिंह का मुकाबला करने के लिए उन्हें मैदान में उतारा है। कभी ब्रह्मपुरा इस पंथक हलके में अकाली दल के निर्विवाद नेता थे। इसी हलके से उन्हें माझे का जरनैल की उपाधि मिली थी।
1980 के बाद अकाली दल विधानसभा और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस व अन्य बादल विरोधी अकाली दल के उम्मीदवारों को भारी मतों से पराजित करता आया है। 2012 के विधानसभा चुनाव में जब प्रकाश सिंह बादल की अगुवाई में अकाली दल की सरकार का दोबारा गठन हुआ था, उस चुनाव में ब्रह्मपुरा को अपने 50 साल के राजनीतिक जीवन की पहली पराजय झेलनी पड़ी थी।
विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद बादल ने खडूर साहिब हलके से दो बार सांसद निर्वाचित होने वाले डॉ. रतन सिंह अजनाला का टिकट काट कर ब्रह्मपुरा को टिकट से नवाजा था और ब्रह्मपुरा ने कांग्रेस के उम्मीदवार हरमिंदर सिंह गिल को पराजित किया था।
1980 के बाद अकाली दल विधानसभा और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस व अन्य बादल विरोधी अकाली दल के उम्मीदवारों को भारी मतों से पराजित करता आया है। 2012 के विधानसभा चुनाव में जब प्रकाश सिंह बादल की अगुवाई में अकाली दल की सरकार का दोबारा गठन हुआ था, उस चुनाव में ब्रह्मपुरा को अपने 50 साल के राजनीतिक जीवन की पहली पराजय झेलनी पड़ी थी।
विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद बादल ने खडूर साहिब हलके से दो बार सांसद निर्वाचित होने वाले डॉ. रतन सिंह अजनाला का टिकट काट कर ब्रह्मपुरा को टिकट से नवाजा था और ब्रह्मपुरा ने कांग्रेस के उम्मीदवार हरमिंदर सिंह गिल को पराजित किया था।