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चुनाव परिणाम 2019: ‘शौक’ पूरा और वोट खराब कर चल देंगे कई प्रत्याशी, होगा कई का नुकसान
Thu, 23 May 2019 01:01 PM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 23 May 2019 01:01 PM IST
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फाइल फोटो
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भारत देश में किसी भी नागरिक को चुनाव में हिस्सा लेने की आजादी है। इसके चलते कई लोग शौक पूरा करने को चुनावी रण में उतरते हैं, जिसका नुकसान बड़े दलों व दिग्गज प्रत्याशियों को उठाना पड़ता है। इनमें से कुछेक प्रत्याशी कभी कभार चुनावी रण में अच्छा मुकाबला भी दे जाते हैं, लेकिन अधिकतर प्रत्याशी मुकाबले से बाहर और जीत से कोसों दूर ही रह जाते हैं।
मगर उनका यह शौक न केवल वोट खराब करता है, बल्कि ऐसे बहुत से प्रत्याशियों में काफी संख्या में वोट बंट जाने की वजह से कई बार मुकाबले में बने प्रत्याशी का खेल भी बिगड़ जाता है, क्योंकि इनके अलावा काफी संख्या में वोट आजाद प्रत्याशी भी खराब कर जाते हैं। वर्ष 2019 के इस लोकसभा चुनाव में हरियाणा के इतिहास में अब तक के सबसे ज्यादा ऐसे प्रत्याशी मैदान में हैं, जो रजिस्ट्रीकृत राजनीतिक दलों से संबंद्ध हैं। ये रजिस्ट्रकृत राजनीतिक दल मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों और आजाद प्रत्याशी से अलग होते हैं।
ऐसे दलों से संबंद्ध इस बार 99 प्रत्याशियों ने हरियाणा की सभी संसदीय सीट से चुनाव लड़ा है। हर संसदीय सीट पर इस तरह की रजिस्ट्रीकृत पार्टियों ने अपने ऐसे प्रत्याशियों को मैदान में उतारा, जिनकी पहचान अपने ही संसदीय क्षेत्र के छोटे एरिया तक ही सीमित हैं। इस बार भी इनमें से अधिकतर प्रत्याशी मुकाबले से बाहर ही दिखे और उनका जीतना भी नामुमकिन ही दिख रहा है। लिहाजा ऐसे प्रत्याशियों को जितने भी वोट मिलेंगे, उनके खराब होने की संभावनाएं प्रबल हैं।
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मगर उनका यह शौक न केवल वोट खराब करता है, बल्कि ऐसे बहुत से प्रत्याशियों में काफी संख्या में वोट बंट जाने की वजह से कई बार मुकाबले में बने प्रत्याशी का खेल भी बिगड़ जाता है, क्योंकि इनके अलावा काफी संख्या में वोट आजाद प्रत्याशी भी खराब कर जाते हैं। वर्ष 2019 के इस लोकसभा चुनाव में हरियाणा के इतिहास में अब तक के सबसे ज्यादा ऐसे प्रत्याशी मैदान में हैं, जो रजिस्ट्रीकृत राजनीतिक दलों से संबंद्ध हैं। ये रजिस्ट्रकृत राजनीतिक दल मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों और आजाद प्रत्याशी से अलग होते हैं।
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ऐसे दलों से संबंद्ध इस बार 99 प्रत्याशियों ने हरियाणा की सभी संसदीय सीट से चुनाव लड़ा है। हर संसदीय सीट पर इस तरह की रजिस्ट्रीकृत पार्टियों ने अपने ऐसे प्रत्याशियों को मैदान में उतारा, जिनकी पहचान अपने ही संसदीय क्षेत्र के छोटे एरिया तक ही सीमित हैं। इस बार भी इनमें से अधिकतर प्रत्याशी मुकाबले से बाहर ही दिखे और उनका जीतना भी नामुमकिन ही दिख रहा है। लिहाजा ऐसे प्रत्याशियों को जितने भी वोट मिलेंगे, उनके खराब होने की संभावनाएं प्रबल हैं।
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गरीब दल, टोला पार्टी के प्रत्याशी भी है मैदान में
हरियाणा में इस बार लोकसभा चुनाव में रजिस्ट्रीकृत दलों के अंतर्गत आरपीआई (ए), आरएलएसपी, भारतीय शक्ति चेतना पार्टी, पीपीआई (डी), आपकी अपनी पार्टी (पीपुल्स), बहुजन मुक्ति पार्टी, प्रतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया), नवनिर्माण पार्टी, भारत प्रभात पार्टी, भारतीय जन सम्मान पार्टी, रिवोल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, राष्ट्रीय भागीदारी समाज पार्टी, सपाक्स पार्टी, जय जवान जय किसान पार्टी, आदर्श जनता सेवा पार्टी, राष्ट्रीय गरीब दल, सामाजिक न्याय पार्टी, महिला एंड युवा शक्ति पार्टी, सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट), राष्ट्रीय मजदूर एकता पार्टी, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी, राष्ट्रीय जातिगत आरक्षण विरोधी पार्टी, दलित शोषित पिछड़ा वर्ग अधिकार दल, भारतीय जनराज पार्टी, वोटर्स पार्टी, दक्ष पार्टी, अखिल भारतीय जनसंघ, राष्ट्रीय निर्माण पार्टी, आरक्षण विरोधी पार्टी, टोला पार्टी, लोकप्रिस समाज पार्टी, ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लाक पार्टी, हिंद कांग्रेस पार्टी, आदिम भारतीय पार्टी इत्यादि दलों ने भी अपने प्रत्याशी इस बार मैदान में उतारे हैं।
1967 के चुनाव में नहीं थी ऐसी पार्टियां
हरियाणा बनने के बाद सन 1967 में पहले लोकसभा चुनाव हुए थे, उस वक्त न तो ऐसे दल थे और न ही इस तरह के प्रत्याशी। मगर सन 1971 में इसकी शुरूआत हुई और 8 प्रत्याशी मैदान में उतरे। उसके बाद सन 1977 में 2 प्रत्याशी, सन 1980 में 7 प्रत्याशी, सन 1984 में 0 प्रत्याशी, सन 1989 में 22 प्रत्याशी, सन 1991 में 22 प्रत्याशी, सन 1996 में 14 प्रत्याशी, सन 1998 में 22 प्रत्याशी, सन 1998 में 3, सन 2004 में 32 प्रत्याशी, सन 2009 में 27 प्रत्याशी, वर्ष 2014 में 50 से अधिक प्रत्याशी व वर्ष 2019 में 99 प्रत्याशियों ने ताल ठोकी।