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किरण खेर को लोकसभा चुनाव 2019 जिताने को पूरी ताकत लगा रहे संजय टंडन, गिले शिकवे भूले

Tue, 14 May 2019 01:44 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 14 May 2019 01:44 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019, Sanjay Tandon Efforting for Kirron Kher to Win Her Elections
चंडीगढ़ बीजेपी, संजय टंडन
टिकट कटने के बाद उपजे गिले शिकवे भुलाकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन अब किरण खेर को जिताने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। प्रदेश के मुखिया एवं पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के नाते टंडन के कंधों पर चंडीगढ़ की सीट जिताने का दबाव भी है। वह कार्यकर्ताओं से सीधे संपर्क बनाने के साथ जनता संग भी तार जोड़ने में लगे हुए हैं। शहर में चुनाव प्रबंधन के खाके का तानाबाना एक साल से बुना जा रहा है। इस दौरान विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए संगठन का मजबूत ढांचा तैयार किया गया है।
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चंडीगढ़ लोक सभा सीट से संजय टंडन टिकट के प्रबल दावेदार थे। लेकिन आखिरी समय में बाजी किरण के हाथ लगी। संजय टंडन ने एक कार्यक्रम में अपना यह दर्द बयां करते हुए कहा कि परिवार में रूठना मनाना चलता रहता है। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि इसके बाद से संजय टंडन जीजान से खेर के प्रचार के साथ ही बूथ मैनेजमेंट को भी मजबूत करने में जुटे हैं। शहर में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली से माहौल को और गरम करने की कोशिश है। इस बीच टंडन का पूरा जोर मतों का ‘मार्जिन’ बढ़ाने पर है।
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चुनाव अभियान का संचालन कर रहे टंडन ने इस बार हर घर में कार्यकर्ता बनाने की मुहिम चलाई है। चाय पर चर्चा, बस में चर्चा, टॉक विद टंडन आदि कार्यक्रमों के जरिए युवाओं की फौज तैयार की गई है और संगठन को धारदार बनाया गया है। इस चुनाव में भाजयुमो और महिला मोर्चा के सदस्यों को खासतौर पर बड़ी भूमिका दी गई है। उन्हें संचार सुविधा मसलन-मोबाइल फोन आदि से लैस किया गया है। अल्पसंख्यक मोर्चा, एससी मोर्चा, किसान मोर्चा और ओबीसी मोर्चा के नेताओं संग लगातार बैठक की जा रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि किरण की जीत में मुख्य भूमिका निभाकर टंडन ऐसे लोगों को मुंह बंद करना चाहते हैं, जो पार्टी में गुटबाजी की बातों को हवा देते हैं।
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लगातार 9 साल तक प्रदेश अध्यक्ष रहने वाले देश के पहले भाजपा नेता

संजय टंडन जनवरी 2010 में प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए थे, जिसके बाद से अभी तक वह इस पद पर काबिज हैं। टंडन का दूसरा कार्यकाल भी जनवरी 2016 में खत्म हो गया था, बावजूद इसके पार्टी ने टंडन पर विश्वास जताया और पद पर बनाए रखा। टंडन के नेतृत्व में 2011 नगर निगम चुनाव लड़ा गया, जिसमें भाजपा ने 6 सीटों की वृद्धि की। साल 2012 में पंचायत समिति, 2013 में सरपंच चुनाव जीते।

साल 2014 लोकसभा चुनाव में 15 साल बाद भाजपा की चंडीगढ़ में सरकार आई। साल 2015 में मार्केट कमेटी के चुनाव जीते। नोटबंदी के तुरंत बाद हुए 2016 नगर निगम चुनाव में 22 सीटों में से 20 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। साल 2017 में जिला परिषद की 10 में से 8 और पंचायत समिति की 15 में 12 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। बहरहाल, टंडन के कंधों पर 2019 लोकसभा चुनाव में सांसद खेर को जीत दिलाने की बड़ी जिम्मेदारी है।
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