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लोकसभा चुनाव: बदलता रहता है पटियाला के वोटरों का मूड, मोदी लहर के बावजूद जीती थी कांगेस

Tue, 14 May 2019 11:49 AM IST
खुशबू गोयल हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 14 May 2019 11:49 AM IST
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Lok Sabha Elections 2019, Patiala Constituency Ground Report based on voters
parneet kaur
पंजाब का ऐतिहासिक शहर पटियाला अपनी संस्कृति और शैली के लिए पर्यटकों को लुभाता रहा है। वहीं सियासी मामले में यह लोकसभा क्षेत्र आजादी के बाद से कांग्रेस का गढ़ रहा है। इसके बावजूद एक विशेष बात यह भी है कि यहां के मतदाता समय-समय पर अपना मूड भी बदलते रहे हैं।
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नतीजतन देश और प्रदेश में चाहे कोई सियासी लहर हो, पटियाला लोकसभा क्षेत्र में चुनाव परिणाम अलग ही दिखाई देते हैं। इसका ताजातरीन उदाहरण 2014 के लोकसभा चुनाव हैं, जब पूरे देश में नरेंद्र मोदी की लहर थी और पंजाब में अकाली दल के खिलाफ माहौल था। लेकिन पटियाला के मतदाताओं ने इससे अलग, आम आदमी पार्टी के डॉ. धर्मवीर गांधी को अपना सांसद चुन लिया। तब डॉ. गांधी ने कांग्रेस प्रत्याशी परनीत कौर को शिकस्त दी थी।
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इस सीट के संसदीय इतिहास पर नजर डालें तो 1952 के पहले आजाद भारत के चुनाव में कांग्रेस के राम प्रताप गर्ग इस सीट पर जीते। उसके बाद कांग्रेस ने चार बार यहां से जीत दर्ज की। खास बात यह थी कि कांग्रेस हर बार अपना प्रत्याशी भी बदल देती थी लेकिन वोटरों ने कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर ही मुहर लगाई।

1957 के चुनाव में कांग्रेस के अचिंत राम, 1962 में हुकुम सिंह, 1967 में मोहिंदर कौर, 1971 में सतपाल  तो 1977 में यहां के वोटरों ने मूड बदला और शिरोमणि अकाली दल के गुरचरण सिंह टोहड़ा को लोकसभा भेजा। 1980 में कांग्रेस के टिकट पर कैप्टन अमरिंदर सिंह चुनाव जीते। 1985 के चुनाव में वोटरों का कांग्रेस से मोहभंग हुआ और शिअद के चरणजीत सिंह विजयी रहे।

लेकिन शिअद को वोटरों ने अगले ही संसदीय चुनाव 1989 में बाहर करते हुए एक निर्दलीय प्रत्याशी अतिंदरपाल सिंह को सांसद चुनकर सबको हैरान कर दिया। प्रदेश के वोटरों के मूड में बदलाव का उक्त सिलसिला आगे भी चलता रहा और 1992 में कांग्रेस के संत राम सिंगला विजयी रहे।

1996 और 1998 में अकाली दल को मजबूती मिली और वोटरों ने अकाली दल के प्रेम सिंह चंदूमाजरा को जीत दिलाकर संसद भेजा। इसके बाद कांग्रेस की एक बार फिर वापसी हुई और 1999 व 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर परनीत कौर सांसद चुनी गईं। 2014 में इस सीट पर मुकाबला बहुत दिलचस्प रहा, जब देशभर में मोदी लहर के चलते वोट भाजपा को जा रहे थे।

लेकिन पटियाला संसदीय सीट के वोटरों ने इस मामले में भाजपा की सहयोगी पार्टी अकाली दल को तरजीह नहीं दी बल्कि कांग्रेस को भी साइड करते हुए आम आदमी पार्टी को जीत दिला दी। आप के डॉ. धर्मवीर गांधी को 3,65,671 वोट मिले जबकि कांग्रेस की परणीत कौर को 3,44,729 वोट ही हासिल कर सकीं।

इस चुनाव में शिअद के दीपेंद्र सिंह ढिल्लों 3,40,109 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। बाद में ढिल्लों अकाली दल छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं और इस समय परणीत कौर के लिए प्रचार कर रहे हैं।
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