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लोकसभा चुनाव 2019: कर्णनगरी करनाल की पुकार धरतीपुत्र हो इस बार, बाहरी को तो झेलना होगा विरोध
Tue, 02 Apr 2019 03:24 PM IST
खुशबू गोयल
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 02 Apr 2019 03:24 PM IST
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Karnal city
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हरियाणा की हॉट लोकसभा सीट करनाल के लोग इस बार धरती पुत्र को ही सांसद चाहते हैं, क्योंकि पिछले काफी समय से बाहरी समय से इस जिले से एमपी बनते आ रहे हैं। करनाल के सेक्टर-8 पार्ट-टू का बुड्ढा चौक। यहां सुबह से लेकर शाम तक वटवृक्ष के नीचे अधेड़ और बुजुर्गों का जमावड़ा रहता है। इसी कारण चौक का नाम बुड्ढा चौक पड़ गया। माहौल चुनाव का हो और वरिष्ठ नागरिक उसकी चर्चा से दूर रहें, ऐसा कैसे हो सकता है।
राजा कर्ण की नगरी करनाल की पुकार इस बार धरतीपुत्र को टिकट देने की है। चौक पर पेड़ की छांव तले चर्चा में मशगूल सेवानिवृत्त डीएसपी अशोक पाठक का कहना है कि शहर का दुर्भाग्य है यहां के अधिकतर सांसद बाहरी ही बने। जैसे राजा कर्ण ने बाहर से आकर यहां अपना राजपाठ चलाया, वैसे ही बाहर से नेता आकर यहां सांसद बनकर अपनी राजनीति चमकाते रहे।
रमेश चौधरी कहते हैं कि करनाल में तो एक कहावत बहुत चर्चा में है, रात में किराए पर मकान लो और सुबह सांसद बनकर चले जाओ। इस संसदीय क्षेत्र में अधिकतर नेता किराए के मकान से ही सियासत चलाते रहे हैं। स्थानीय उम्मीदवार को टिकट देना वक्त की मांग है। एडवोकेट गुरमीत सिंह का कहना है कि बाहरी नेता सांसद बनने के बाद यहां आते ही नहीं।
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इसलिए संसदीय क्षेत्र के ही कद्दावर नेता को टिकट मिलना चाहिए, ताकि सांसद बनकर वह अपने ही लोगों के बीच रहे। सतपाल रोहिला भी करनाल या पानीपत के ही नेता को टिकट देने के हिमायती हैं, वे कहते हैं कि इस बार बाहरी नेता को जो भी दल टिकट देगा, उसे विरोध झेलना पड़ेगा।
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राजा कर्ण की नगरी करनाल की पुकार इस बार धरतीपुत्र को टिकट देने की है। चौक पर पेड़ की छांव तले चर्चा में मशगूल सेवानिवृत्त डीएसपी अशोक पाठक का कहना है कि शहर का दुर्भाग्य है यहां के अधिकतर सांसद बाहरी ही बने। जैसे राजा कर्ण ने बाहर से आकर यहां अपना राजपाठ चलाया, वैसे ही बाहर से नेता आकर यहां सांसद बनकर अपनी राजनीति चमकाते रहे।
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रमेश चौधरी कहते हैं कि करनाल में तो एक कहावत बहुत चर्चा में है, रात में किराए पर मकान लो और सुबह सांसद बनकर चले जाओ। इस संसदीय क्षेत्र में अधिकतर नेता किराए के मकान से ही सियासत चलाते रहे हैं। स्थानीय उम्मीदवार को टिकट देना वक्त की मांग है। एडवोकेट गुरमीत सिंह का कहना है कि बाहरी नेता सांसद बनने के बाद यहां आते ही नहीं।
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इसलिए संसदीय क्षेत्र के ही कद्दावर नेता को टिकट मिलना चाहिए, ताकि सांसद बनकर वह अपने ही लोगों के बीच रहे। सतपाल रोहिला भी करनाल या पानीपत के ही नेता को टिकट देने के हिमायती हैं, वे कहते हैं कि इस बार बाहरी नेता को जो भी दल टिकट देगा, उसे विरोध झेलना पड़ेगा।
भाजपा और कांग्रेस से अनेक दावेदार
भाजपा से पूर्व सांसद अरविंद शर्मा, संजय भाटिया, एडवोकेट वेदपाल, पूर्व उद्योग मंत्री शशिपाल मेहता प्रमुख दावेदार हैं। कांग्रेस से विधायक व पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा, उनके बेटे चाणक्य शर्मा प्रबल दावेदारों में शामिल हैं।
1996 के बाद धरतीपुत्र नहीं बना सांसद
1996 के लोकसभा चुनाव से यहां बाहरी ही आकर सांसद बनते आ रहे हैं। करनाल लोकसभा सीट का स्थायी निवासी यहां से सांसद बना ही नहीं। पैराशूट उम्मीदवारों को चुनाव में उतारने के आरोप भी लगते आ रहे हैं। भाजपा हो या कांग्रेस का उम्मीदवार, जनता चाहती है कि इस बार दोनों दल धरतीपुत्र को मैदान में उतारें, चाहे प्रत्याशी करनाल जिले से हो या पानीपत जिले से। चूंकि, ये दोनों ही जिले करनाल लोकसभा क्षेत्र में आते हैं। यहां से आईडी स्वामी दो बार सांसद बने।
स्वामी अफसरशाह थे, उन्होंने सांसद बनने के बाद करनाल में मकान लिया। जनता उन्हें यहां का स्थानीय निवासी नहीं मानती। अरविंद शर्मा कांग्रेस से दो बार सांसद रहे, वे भी सोनीपत से हैं। इसलिए उन्हें भी धरतीपुत्र का नाम नहीं मिला। 1998 में भजन लाल भी यहां से सांसद चुने गए, वे भी मूल रूप से हिसार के रहने वाले हैं। 2014 में अश्विनी चोपड़ा करनाल से सांसद चुने गए। धरातल पर उनका भी यहां कुछ नहीं। इसलिए करनाल में धरतीपुत्र को ही टिकट देने की मांग तेज हो रही है।
करनाल के बाहर से ये रहे सांसद
. 1996-आईडी स्वामी-भाजपा
. 1998-भजन लाल-कांग्रेस
. 1999-आईडी स्वामी-भाजपा
. 2004-अरविंद शर्मा-कांग्रेस
. 2009-अरविंद शर्मा-कांग्रेस
. 2014-अश्विनी चोपड़ा-भाजपा
1996 के बाद धरतीपुत्र नहीं बना सांसद
1996 के लोकसभा चुनाव से यहां बाहरी ही आकर सांसद बनते आ रहे हैं। करनाल लोकसभा सीट का स्थायी निवासी यहां से सांसद बना ही नहीं। पैराशूट उम्मीदवारों को चुनाव में उतारने के आरोप भी लगते आ रहे हैं। भाजपा हो या कांग्रेस का उम्मीदवार, जनता चाहती है कि इस बार दोनों दल धरतीपुत्र को मैदान में उतारें, चाहे प्रत्याशी करनाल जिले से हो या पानीपत जिले से। चूंकि, ये दोनों ही जिले करनाल लोकसभा क्षेत्र में आते हैं। यहां से आईडी स्वामी दो बार सांसद बने।
स्वामी अफसरशाह थे, उन्होंने सांसद बनने के बाद करनाल में मकान लिया। जनता उन्हें यहां का स्थानीय निवासी नहीं मानती। अरविंद शर्मा कांग्रेस से दो बार सांसद रहे, वे भी सोनीपत से हैं। इसलिए उन्हें भी धरतीपुत्र का नाम नहीं मिला। 1998 में भजन लाल भी यहां से सांसद चुने गए, वे भी मूल रूप से हिसार के रहने वाले हैं। 2014 में अश्विनी चोपड़ा करनाल से सांसद चुने गए। धरातल पर उनका भी यहां कुछ नहीं। इसलिए करनाल में धरतीपुत्र को ही टिकट देने की मांग तेज हो रही है।
करनाल के बाहर से ये रहे सांसद
. 1996-आईडी स्वामी-भाजपा
. 1998-भजन लाल-कांग्रेस
. 1999-आईडी स्वामी-भाजपा
. 2004-अरविंद शर्मा-कांग्रेस
. 2009-अरविंद शर्मा-कांग्रेस
. 2014-अश्विनी चोपड़ा-भाजपा