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लोकसभा चुनाव 2019: चंडीगढ़ में बीजेपी, कांग्रेस और 'आप' में कांटे की टक्कर, ये रहे टिकट के दावेदार
Mon, 11 Mar 2019 01:28 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 11 Mar 2019 01:28 PM IST
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लोकसभा चुनाव 2019 में चंडीगढ़ की एक सीट के लिए बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी। टिकट के लिए नामांकन भरे जा चुके हैं, दावेदारों पर डालिए एक नजर।
भाजपा से टिकट के दावेदार
किरण खेर, मौजूदा सांसद हैं। इन्होंने साल 2014 में कांग्रेस के कद्दावर नेता पवन बंसल को हराकर भाजपा से चुनाव जीता। पीएम मोदी के करीबी और फिल्म अभिनेता अनुपम खेर की पत्नी हैं। 1983 में पंजाबी फीचर फिल्म से अपने फिल्मी करिअर की शुरुआत की थी। संसद में इनकी मौजूदगी काफी बेहतर रही है। इस बार भी वह भाजपा से टिकट की मजबूत दावेदार हैं।
संजय टंडन वर्तमान में चंडीगढ़ भाजपा के अध्यक्ष हैं। वह बीते 9 साल से लगातार प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान हैं। इनके पिता बलराम दास टंडन छत्तीसगढ़ के राज्यपाल होने के अलावा पंजाब के एक सम्मानित बड़े नेता रहे हैं। संजय टंडन अपनी पत्नी के साथ मिलकर कई पुस्तकें लिख चुके हैं। टिकट के लिए इनकी भी दावेदारी बताई जा रही है।
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भाजपा से टिकट के दावेदार
किरण खेर, मौजूदा सांसद हैं। इन्होंने साल 2014 में कांग्रेस के कद्दावर नेता पवन बंसल को हराकर भाजपा से चुनाव जीता। पीएम मोदी के करीबी और फिल्म अभिनेता अनुपम खेर की पत्नी हैं। 1983 में पंजाबी फीचर फिल्म से अपने फिल्मी करिअर की शुरुआत की थी। संसद में इनकी मौजूदगी काफी बेहतर रही है। इस बार भी वह भाजपा से टिकट की मजबूत दावेदार हैं।
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संजय टंडन वर्तमान में चंडीगढ़ भाजपा के अध्यक्ष हैं। वह बीते 9 साल से लगातार प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान हैं। इनके पिता बलराम दास टंडन छत्तीसगढ़ के राज्यपाल होने के अलावा पंजाब के एक सम्मानित बड़े नेता रहे हैं। संजय टंडन अपनी पत्नी के साथ मिलकर कई पुस्तकें लिख चुके हैं। टिकट के लिए इनकी भी दावेदारी बताई जा रही है।
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कांग्रेस से टिकट के दावेदार
मनीष तिवारी, साल 2009 में लोकसभा सीट से संसद पहुंचे थे। वह यूपीए 2 में सूचना एवं प्रसारण मंत्री रहे हैं। मनीष तिवारी की मां पीजीआई की डीन रही हैं और नगर निगम की मनोनीत पार्षद। उनके पिता पंजाब यूनिवर्सिटी में पंजाबी विभाग के एचओडी थे। आतंकवादियों ने उनके पिता की हत्या कर दी थी। राहुल और सोनिया गांधी के करीबी हैं। इसलिए चंडीगढ़ से कांग्रेस की टिकट के दावेदार हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल पिछले 40 सालों से राजनीति में सक्रिय हैं। वे सात बार चुनाव लड़ चुके हैं। चार बार जीते और तीन बार हार का सामना करना पड़ा। वे यूपीए 2 में रेल मंत्री रहे थे। मई 2013 में घोटाले का आरोप लगने पर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। वे राजीव गांधी और सोनिया गांधी के काफी नजदीकी रहे हैं। ऐसे में वे भी टिकट के प्रबल दावेदार हैं।
नवजोत कौर, पंजाब के निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी हैं। वे अमृतसर में ही सक्रिय रही हैं। साल 2012 में अमृतसर पूर्व से उन्हें भाजपा से टिकट मिला और विधायक चुनी गईं। बाद में उन्हें पंजाब सरकार में मुख्य संसदीय सचिव चुना गया। वे पेशे से चिकित्सक हैं। एक अप्रैल 2016 में उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। अब वे चंडीगढ़ से चुनाव लड़ना चाहती हैं। नवजोत सिद्धू की राहुल गांधी से नजदीकियां जगजाहिर हैं। इस वजह से उनका भी पलड़ा भारी है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल पिछले 40 सालों से राजनीति में सक्रिय हैं। वे सात बार चुनाव लड़ चुके हैं। चार बार जीते और तीन बार हार का सामना करना पड़ा। वे यूपीए 2 में रेल मंत्री रहे थे। मई 2013 में घोटाले का आरोप लगने पर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। वे राजीव गांधी और सोनिया गांधी के काफी नजदीकी रहे हैं। ऐसे में वे भी टिकट के प्रबल दावेदार हैं।
नवजोत कौर, पंजाब के निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी हैं। वे अमृतसर में ही सक्रिय रही हैं। साल 2012 में अमृतसर पूर्व से उन्हें भाजपा से टिकट मिला और विधायक चुनी गईं। बाद में उन्हें पंजाब सरकार में मुख्य संसदीय सचिव चुना गया। वे पेशे से चिकित्सक हैं। एक अप्रैल 2016 में उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। अब वे चंडीगढ़ से चुनाव लड़ना चाहती हैं। नवजोत सिद्धू की राहुल गांधी से नजदीकियां जगजाहिर हैं। इस वजह से उनका भी पलड़ा भारी है।
'आप' के उम्मीदवार हरमोहन धवन
हरमोहन धवन आम आदमी पार्टी की ओर से चंडीगढ़ लोकसभा सीट के उम्मीदवार हैं। पहली बार वे 1989 में जनता दल के टिकट पर चुनाव जीते। उसी दौरान चंद्रशेखर के प्रधानमंत्री बनने पर वे नागरिक उड्डयन मंत्री बनाए गए थे। चार महीने तक वे केंद्रीय मंत्री रहे। इस दौरान शहर के विकास की कई योजनाओं को सिरे चढ़ाया। इसके बाद से अब तक केवल दो बार चुनाव नहीं लड़े और बाकी सभी वर्षों में चुनाव लड़े, लेकिन जीत नहीं सके। वे कांग्रेस, बसपा और भाजपा में भी रहे। अब आम आदमी पार्टी में हैं और लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीवार हैं।
अविनाश सिंह शर्मा कैप के उम्मीदवार
अविनाश बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले हैं। चंडीगढ़ में पिछले 16 वर्ष से रह रहे हैं। 32 वर्षों से सामाजिक सेवा में जुड़े हैं। पीआईएल एक्टिविस्ट हैं। किसी अन्य पार्टी से नहीं जुड़े। इन्होंने चंडीगढ़ की आवाज नामक पार्टी बनाई और वे उसी पार्टी के उम्मीदवार हैं।
अविनाश सिंह शर्मा कैप के उम्मीदवार
अविनाश बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले हैं। चंडीगढ़ में पिछले 16 वर्ष से रह रहे हैं। 32 वर्षों से सामाजिक सेवा में जुड़े हैं। पीआईएल एक्टिविस्ट हैं। किसी अन्य पार्टी से नहीं जुड़े। इन्होंने चंडीगढ़ की आवाज नामक पार्टी बनाई और वे उसी पार्टी के उम्मीदवार हैं।