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लोकसभा चुनाव: भाजपा की किरण खेर के 'दंगल' में आने से कांटे का हुआ मुकाबला, इसलिए मिली तवज्जो
Wed, 24 Apr 2019 11:34 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 24 Apr 2019 11:34 AM IST
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किरण खेर
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लोकसभा चुनाव 2019 के 'दंगल' किरण खेर के उतरने से चंडीगढ़ में मुकाबला रोमांचक हो गया है। किरण खेर को तवज्जो देने का भी एक खास कारण है। मंगलवार देर शाम पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने तीन प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की, जिसमें चंडीगढ़ से किरण खेर के नाम पर मुहर लगा दी गई।
किरण खेर का टिकट फाइनल होने की सूचना मिलते ही किरण के समर्थक सेक्टर-8 स्थित उनके घर पर जमा हो गए और उनके समर्थन में नारे लगाने लगे। लोकसभा चुनाव में किरण के दोबारा मैदान में आने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। कांग्रेस ने चंडीगढ़ से पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल को टिकट दिया है, जबकि आम आदमी पार्टी से पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन ताल ठोंक रहे हैं। चंडीगढ़ में मतदान आखिरी चरण में 19 मई को होगा।
साल 2014 में इस तरह जीत हासिल की थी
पिछले लोकसभा चुनाव में सांसद किरण खेर ने एंट्री मारी थी। उनका पहला चुनाव था। पहले ही चुनाव में उन्होंने पवन कुमार बंसल को करीब 70 हजार वोट से हरा दिया था। किरण खेर को एक लाख 91 हजार 362 वोट मिले थे, जबकि पवन कुमार बंसल को एक लाख 21 हजार 720 वोट मिले थे। उस समय पूरे देश में मोदी लहर थी और कांग्रेस के उम्मीदवार पवन कुमार बंसल के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी थी। तीसरे नंबर पर आप की उम्मीदवार गुल पनाग थी, जिन्हें करीब एक लाख नौ हजार वोट मिले थे।
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किरण खेर का टिकट फाइनल होने की सूचना मिलते ही किरण के समर्थक सेक्टर-8 स्थित उनके घर पर जमा हो गए और उनके समर्थन में नारे लगाने लगे। लोकसभा चुनाव में किरण के दोबारा मैदान में आने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। कांग्रेस ने चंडीगढ़ से पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल को टिकट दिया है, जबकि आम आदमी पार्टी से पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन ताल ठोंक रहे हैं। चंडीगढ़ में मतदान आखिरी चरण में 19 मई को होगा।
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साल 2014 में इस तरह जीत हासिल की थी
पिछले लोकसभा चुनाव में सांसद किरण खेर ने एंट्री मारी थी। उनका पहला चुनाव था। पहले ही चुनाव में उन्होंने पवन कुमार बंसल को करीब 70 हजार वोट से हरा दिया था। किरण खेर को एक लाख 91 हजार 362 वोट मिले थे, जबकि पवन कुमार बंसल को एक लाख 21 हजार 720 वोट मिले थे। उस समय पूरे देश में मोदी लहर थी और कांग्रेस के उम्मीदवार पवन कुमार बंसल के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी थी। तीसरे नंबर पर आप की उम्मीदवार गुल पनाग थी, जिन्हें करीब एक लाख नौ हजार वोट मिले थे।
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भाजपा ने किरण खेर को इसलिए दी तवज्जो
चंडीगढ़ संसदीय क्षेत्र से भाजपा की टिकट के तीन दावेदार थे। इनमें मौजूदा सांसद किरण खेर, प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन और पूर्व सांसद सत्यपाल जैन शामिल थे। टिकट की मुख्य लड़ाई टंडन और किरण खेर के बीच थी, लेकिन आखिर में बाजी किरण खेर मार ले गईं। बताया जा रहा है कि किरण खेर को टिकट देने के पीछे तीन प्रमुख तर्क दिए जा रहे हैं।
पहला, मौजूदा सांसद होना। साल 2014 में किरण खेर ने कांग्रेस के कद्दावर नेता पवन बंसल को करीब 70 हजार वोटों से हराया था। ऐसा माना जा रहा था कि जब मथुरा से हेमा मालिनी को पार्टी ने टिकट दे दिया तो यहां से किरण को लगभग फाइनल माना जा रहा था।
दूसरा तर्क संसद में किरण की परफॉर्मेंस। संसद में किरण की उपस्थिति 85 फीसदी से ज्यादा थी। उन्होंने 330 से ज्यादा सवाल पूछे। संसद में 38 विषयों पर हुई चर्चा का वे हिस्सा रहीं हैं। सांसद निधि के तहत उन्होंने 22 करोड़ 44 लाख रुपये खर्च किए।
तीसरा सबसे बड़ा कारण, फिल्म अभिनेता व उनके पति अनुपम खेर। बताया जा रहा है कि उनके टिकट की दावेदारी अनुपम खेर काफी मजबूती से की। पांच साल तक वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करते रहे हैं। ऐसे में उनकी बात को अनसुना करना मुश्किल माना जा रहा था।
पहला, मौजूदा सांसद होना। साल 2014 में किरण खेर ने कांग्रेस के कद्दावर नेता पवन बंसल को करीब 70 हजार वोटों से हराया था। ऐसा माना जा रहा था कि जब मथुरा से हेमा मालिनी को पार्टी ने टिकट दे दिया तो यहां से किरण को लगभग फाइनल माना जा रहा था।
दूसरा तर्क संसद में किरण की परफॉर्मेंस। संसद में किरण की उपस्थिति 85 फीसदी से ज्यादा थी। उन्होंने 330 से ज्यादा सवाल पूछे। संसद में 38 विषयों पर हुई चर्चा का वे हिस्सा रहीं हैं। सांसद निधि के तहत उन्होंने 22 करोड़ 44 लाख रुपये खर्च किए।
तीसरा सबसे बड़ा कारण, फिल्म अभिनेता व उनके पति अनुपम खेर। बताया जा रहा है कि उनके टिकट की दावेदारी अनुपम खेर काफी मजबूती से की। पांच साल तक वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करते रहे हैं। ऐसे में उनकी बात को अनसुना करना मुश्किल माना जा रहा था।
पिछले चुनाव में टिकट मिलने पर चले थे अंडे
साल 2014 में भी भाजपा में टिकट को लेकर काफी घमासान था। उस समय किरण खेर, हरमोहन धवन, सत्यपाल जैन और संजय टंडन दौड़ में शामिल थे। आखिरी वक्त तक माना जा रहा था कि टिकट धवन को मिलेगी, लेकिन आखिर में बाजी किरण खेर के हाथ में चली गई। इससे धवन के समर्थक नाराज हो गए और उन्होंने किरण का विरोध जताया।
जब किरण खेर एयरपोर्ट से पार्टी ऑफिस के लिए आ रही थी, तो एयरपोर्ट चौक से लेकर ट्रिब्यून चौक तक उनके विरोध में काले झंडे लेकर खड़े थे। विरोध के डर की वजह से उन्होंने अपना रास्ता बदला और वे थ्री बीआरडी के रास्ते से आईं। किरण खेर जब बीजेपी के दफ्तर पहुंची तो उनके साथ फिल्म अभिनेता अनुपम खेर भी साथ में थे। इस दौरान किसी ने पार्टी ऑफिस के अंदर उन पर अंडे फेंके। हालांकि आलाकमान की ओर से सख्ती होने के बाद बीजेपी के सभी गुट एक साथ आए और किरण खेर को लड़वाया।
सांसद रहते हुए मैंने जो कार्य किए हैं, उस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मुहर लगा दी है। प्रधानमंत्री मोदी की योजनाओं का पूरे देश में असर दिख रहा है। मुझे पूरी उम्मीद है कि मैं इस बार पिछले चुनाव के मुकाबले ज्यादा वोट से जीतूंगी। पार्टी में कोई नाराजगी है। हम सब मोदी के सिपाही हैं। जो रुठे भी होंगे, उन्हें मना लिया जाएगा।
- किरण खेर, भाजपा उम्मीदवार
किरण खेरी मेरी छोटी बहन हैं। टिकट मिलने पर उन्हें बधाई। चुनाव जीतने के लिए उन्होंने जो वादे किए थे, वो पूरे किए या नहीं, इसका फैसला जनता करेगी।
- हरमोहन धवन, आप के उम्मीदवार
जब किरण खेर एयरपोर्ट से पार्टी ऑफिस के लिए आ रही थी, तो एयरपोर्ट चौक से लेकर ट्रिब्यून चौक तक उनके विरोध में काले झंडे लेकर खड़े थे। विरोध के डर की वजह से उन्होंने अपना रास्ता बदला और वे थ्री बीआरडी के रास्ते से आईं। किरण खेर जब बीजेपी के दफ्तर पहुंची तो उनके साथ फिल्म अभिनेता अनुपम खेर भी साथ में थे। इस दौरान किसी ने पार्टी ऑफिस के अंदर उन पर अंडे फेंके। हालांकि आलाकमान की ओर से सख्ती होने के बाद बीजेपी के सभी गुट एक साथ आए और किरण खेर को लड़वाया।
सांसद रहते हुए मैंने जो कार्य किए हैं, उस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मुहर लगा दी है। प्रधानमंत्री मोदी की योजनाओं का पूरे देश में असर दिख रहा है। मुझे पूरी उम्मीद है कि मैं इस बार पिछले चुनाव के मुकाबले ज्यादा वोट से जीतूंगी। पार्टी में कोई नाराजगी है। हम सब मोदी के सिपाही हैं। जो रुठे भी होंगे, उन्हें मना लिया जाएगा।
- किरण खेर, भाजपा उम्मीदवार
किरण खेरी मेरी छोटी बहन हैं। टिकट मिलने पर उन्हें बधाई। चुनाव जीतने के लिए उन्होंने जो वादे किए थे, वो पूरे किए या नहीं, इसका फैसला जनता करेगी।
- हरमोहन धवन, आप के उम्मीदवार