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राजनीति: रिश्तों में दरार डाल रही 'कुर्सी', सियासी अखाड़े में अपनों के बीच ही दंगल; परिवार एक...पार्टी अलग-अलग

Wed, 10 Apr 2024 10:09 AM IST
शाहरुख खान सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 10 Apr 2024 10:09 AM IST
सार

'कुर्सी' की दौड़ रिश्तों में दरार डाल रही है। सियासी अखाड़े में अपनों के बीच ही दंगल देखने को मिल रहा है। पंजाब में एक ही परिवार के लोग अलग-अलग पार्टियों के झंडे थाम रहे हैं।

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Lok Sabha Election 2024 Punjab politics Chair created a rift in relations Many leaders are united in family
Punjab politics - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कहते हैं राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता। सब कुर्सी का खेल है, लेकिन अमूमन कुछ ऐसे रिश्ते देखने को भी मिल जाते हैं, जिसमें आत्मिक और खून के रिश्ते की बयानगी नजर आती है। पंजाब में लोकसभा चुनाव को लेकर गर्माहट बढ़ती जा रही है। इन सबके बीच रिश्ते में कड़वाहट भी पैदा हो रही है। इनमें पिता पुत्र तो कहीं भाई-भाई में राजनीतिक प्रतिद्द्वंद्विता शुरू हो गई है।
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आप विधायक कंबोज के पिता को बसपा की टिकट
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) द्वारा फिरोजपुर लोकसभा सीट से अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी गई है। पार्टी ने जलालाबाद से आप के विधायक जगदीप सिंह गोल्डी कंबोज के पिता सुरिंदर कंबोज (68) को उम्मीदवार बनाया है।सुरिंदर कंबोज पर धोखाधड़ी और जबरन वसूली के कई मामले दर्ज है। उन पर वर्ष 2007 में चंडीगढ़ पुलिस ने कथित देह व्यापार रैकेट और 'वाहनचोरी' का मामला दर्ज किया था। 
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इसके साथ ही गत वर्ष उन्हें एक मामले में गिरफ्तार किया गया था जिसके बाद वह जमानत पर बाहर आए थे। आप विधायक गोल्डी कंबोज का कहना है कि उनका अपने पिता से कोई संबंध नहीं है इस लिए वह कोई टिप्पणी नहीं कर सकते हैं। गोल्डी को अब अपने पिता के खिलाफ प्रचार की कमान संभालनी होगी। इससे राजनीतिक समीकरण भी काफी दिलचस्प हो गए हैं। नजर डालते हैं ऐसे ही कुछ समीकरणों पर।
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प्रताप बाजवा कांग्रेस विधायक दल के नेता, भाई भाजपा के अग्रणी नेता
पंजाब के कादियां में दो सगे भाई एक ही घर में रहकर एक-दूसरे को चुनौती दे रहे हैं। यहां पंजाब कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा और उनके भाई निवर्तमान विधायक फतेहजंग बाजवा के बीच सियासी जंग में जो कुछ देखने को मिल रहा है, वह अपने आप में अनोखा है। दोनों भाई अपने हवेलीनुमा पुश्तैनी एक ही घर में रहते हैं। लोगों की समस्याएं सुनने के लिए बने वेटिंग हाल को प्रताप और फतेहजंग बाजवा, दोनों इस्तेमाल करते हैं।

एक ही दीवार पर दोनों की कांग्रेस पार्टी के आला नेताओं के साथ फोटो भी टंगी हुई है। घर के ऊपर कांग्रेस और भाजपा, दोनों के झंडे लगे हुए हैं। कादियां के इस हवेलीनुमा घर को उनके पिता स्व. सतनाम सिंह बाजवा ने बनाया था। उस दौरान वे कांग्रेस के सक्रिय सदस्यों में से एक थे। इस घर में कांग्रेस के कई आला नेता प्रणब मुखर्जी, गुलाम नबी आजाद, दरबारा सिंह, बीबी भट्ठल, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह तक खाना खाने आ चुके हैं।

सुखबीर अकाली दल के सुप्रीमो, चचेरे भाई भाजपा में
सुखबीर बादल अकाली दल के सुप्रीमो हैं, जबकि उनके चचेरे भाई मनप्रीत बादल भाजपा के नेता हैं। मनप्रीत बादल अपनी भाभी बीबी हरसिमरत कौर के खिलाफ भी चुनाव लड़ चुके हैं। दोनों पहले अकाली का हिस्सा थे और प्रकाश सिंह बादल की आंख के तारे थे, लेकिन 2011 में मनप्रीत ने अकाली दल को अलविदा कह दिया और पीपीपी पार्टी बना ली। बाद में वह कांग्रेस में शामिल होकर पंजाब के वित्तमंत्री बने। पंजाब में आप की सरकार सत्ता में आते ही मनप्रीत भाजपा में चले गए।

सेखड़ी भाई: एक भाजपा में तो दूसरा अकाली दल में
इंद्र सेखड़ी बटाला से पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री अश्वनी सेखड़ी के सगे भाई हैं और साल 2017 के चुनाव के दौरान अपने भाई अश्वनी सेखड़ी के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, जबकि बाद में इंद्र सेखड़ी अकाली दल में शामिल हो गए थे और साल 2022 के विधानसभा चुनाव से कुछ ही दिन पहले भाजपा में शामिल हुए थे। 2022 में भी दोनों भाई एक दूसरे खिलाफ स्टेजों पर थे।

कैप्टन व सिमरनजीत मान दोनों आपस में साढ़ू
कैप्टन अमरिंदर सिंह भाजपा नेता हैं, जबकि उनके साढ़ू अकाली दल अमृतसर के सुप्रीमो सिमरनजीत सिंह मान संगरूर से सांसद हैं। दोनों विचारधारा में अलग-अलग हैं। कैप्टन जहां राष्ट्रवादी विचारधारा के समर्थक हैं, जबकि सिमरनजीत सिंह मान खुलेआम खालिस्तान का समर्थन करते हैं। इस बार भी पटियाला से सिमरनजीत सिंह मान अपनी साली परनीत कौर के खिलाफ प्रचार करेंगे।
 

कैप्टन के भाई मालविंदर भी कर चुके हैं विरोध
पंजाब कांग्रेस के प्रधान रह चुके कैप्टन अमरिंदर सिंह के छोटे भाई मालविंदर सिंह कांग्रेस छोड़ कर शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए थे और अपने भाई के खिलाफ प्रचार किया था। मालविंदर सिंह ने कांग्रेस से टिकट न मिलने का जिम्मा अपनी भाभी व कैप्टन की पत्नी परनीत कौर के सिर फोड़ते हुए शिअद का दामन थाम लिया था।
 

एक भाई भाजपा में तो दूसरा आप का दिग्गज
जालंधर से दो बार विधायक रहे अविनाश चंद्र कलेर भाजपा नेता हैं और इस समय भाजपा में दलित राजनीति के चाणक्य का काम कर रहे हैं, जबकि उनका भाई स्टीवन कलेर आप के दिग्गज नेता हैं और जालंधर के प्रधान हैं। निश्चित तौर पर जालंधर में लोकसभा चुनाव में स्टीवन व अविनाश आमने-सामने होंगे।
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