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लोकसभा चुनावः निलंबन पर बोले सुखपाल खैरा- बेनकाब हुआ 'आप' का तानाशाही चेहरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 04 Nov 2018 12:01 PM IST
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सुखपाल खैरा
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पंजाब 'आप' के विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने पार्टी से निलंबित किए जाने के फैसले पर कहा है कि इन्हें (पार्टी हाईकमान) जो कुछ करना था, वह कर चुके हैं। उन्होंने निलंबन के फैसले को तानाशाही करार देते हुए कहा है कि उन्हें इसकी परवाह नहीं है और न ही कोई घबराहट है, बल्कि इससे पार्टी का तानाशाही चेहरा बेनकाब हो गया है। खैरा ने कहा कि जब उन्हें नेता विपक्ष के पद से हटाया गया और उन्होंने विचारधारा की लड़ाई शुरू की, तभी से पार्टी का तानाशाही सामने आने लगी थी।
पार्टी का यह कदम केवल उनके खिलाफ नहीं बल्कि इससे पहले धर्मवीर गांधी, हरिंदर खालसा, सुच्चा सिंह छोटेपुर, प्रशांत भूषण के मामलों में भी रहा है। पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों पर चलने को तैयार नहीं है, हालांकि समझौते का प्रयास किया, लेकिन लोकसभा के लिए पांच उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर पार्टी ने मनमानी के तरीके के संकेत दे दिए। यह सब एक साजिश के तहत किया गया है। पंजाब में पार्टी तो हमारी ही है। चुनाव के समय पार्टी ने यहां जो पैसा जुटाया, उसमें से एक भी पैसे की मदद उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए नहीं की गई।
आखिर वह पैसा कहां गया। अपने अगले कदम के बारे में पूछे जाने पर खैरा ने कहा कि वे अपनी पार्टी के सदस्यों से बात करेंगे और कोई रास्ता जरूर खुलेगा। खैरा ने कहा कि वे इस मामले को लोगों की अदालत में लेकर जाएंगे और लोग जो कहेंगे, उसी आधार पर फैसला लिया जाएगा। नई पार्टी बनाए जाने के सवाल पर खैरा ने कहा कि उनकी इतनी ताकत नहीं है कि वे अकेले पार्टी बना सकें। फिर भी वे अच्छे लोगों के साथ सलाह मशविरा कर रहे हैं। उनके साथ जो विधायक थे, वे अब भी उनके साथ हैं।
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कोर कमेटी ने कहा, पार्टी विरोधी गतिविधियां बर्दाश्त नहीं
आम आदमी पार्टी ने शनिवार को हलका भुलत्थ से विधायक सुखपाल सिंह खैरा और हलका खरड़ के विधायक कंवर संधू को पार्टी से सस्पेंड कर दिया। पार्टी के मुख्य दफ्तर से जारी प्रेस बयान में कहा गया कि सुखपाल सिंह खैरा और कंवर संधू लगातार पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होकर केंद्रीय और प्रदेश लीडरशिप पर शाब्दिक हमले करते रहे हैं। पंजाब की कोर समिति ने बयान में कहा कि पार्टी ने अपने स्तर पर हरसंभव प्रयत्न कर दोनों नेताओं को समझाने की कोशिश की, जिसमें असफल रहने के बाद उन्हें सस्पेंड करने का फैसला लिया गया। पार्टी ने कहा कि किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। नेताओं और वालंटियरों को पार्टी के निर्धारित नियमों का पालन करना पड़ेगा।
केजरीवाल दे गए थे खैरा पर एक्शन के संकेत
अरविंद केजरीवाल ने इसी हफ्ते चंडीगढ़ दौरे के दौरान सुखपाल खैरा के खिलाफ एक्शन के संकेत दे दिए थे। पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि खैरा का कहना है कि वे केजरीवाल का नाम भी नहीं लेना चाहते, केजरीवाल ने कहा कि वे भी नहीं चाहते कि खैरा उनका नाम लें। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति खैरा नहीं, बल्कि राजनीति देश का विकास है। हालांकि उन्होंने कहा था कि नाराज नेताओं को जल्द मना लिया जाएगा।
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पार्टी का यह कदम केवल उनके खिलाफ नहीं बल्कि इससे पहले धर्मवीर गांधी, हरिंदर खालसा, सुच्चा सिंह छोटेपुर, प्रशांत भूषण के मामलों में भी रहा है। पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों पर चलने को तैयार नहीं है, हालांकि समझौते का प्रयास किया, लेकिन लोकसभा के लिए पांच उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर पार्टी ने मनमानी के तरीके के संकेत दे दिए। यह सब एक साजिश के तहत किया गया है। पंजाब में पार्टी तो हमारी ही है। चुनाव के समय पार्टी ने यहां जो पैसा जुटाया, उसमें से एक भी पैसे की मदद उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए नहीं की गई।
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आखिर वह पैसा कहां गया। अपने अगले कदम के बारे में पूछे जाने पर खैरा ने कहा कि वे अपनी पार्टी के सदस्यों से बात करेंगे और कोई रास्ता जरूर खुलेगा। खैरा ने कहा कि वे इस मामले को लोगों की अदालत में लेकर जाएंगे और लोग जो कहेंगे, उसी आधार पर फैसला लिया जाएगा। नई पार्टी बनाए जाने के सवाल पर खैरा ने कहा कि उनकी इतनी ताकत नहीं है कि वे अकेले पार्टी बना सकें। फिर भी वे अच्छे लोगों के साथ सलाह मशविरा कर रहे हैं। उनके साथ जो विधायक थे, वे अब भी उनके साथ हैं।
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कोर कमेटी ने कहा, पार्टी विरोधी गतिविधियां बर्दाश्त नहीं
आम आदमी पार्टी ने शनिवार को हलका भुलत्थ से विधायक सुखपाल सिंह खैरा और हलका खरड़ के विधायक कंवर संधू को पार्टी से सस्पेंड कर दिया। पार्टी के मुख्य दफ्तर से जारी प्रेस बयान में कहा गया कि सुखपाल सिंह खैरा और कंवर संधू लगातार पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होकर केंद्रीय और प्रदेश लीडरशिप पर शाब्दिक हमले करते रहे हैं। पंजाब की कोर समिति ने बयान में कहा कि पार्टी ने अपने स्तर पर हरसंभव प्रयत्न कर दोनों नेताओं को समझाने की कोशिश की, जिसमें असफल रहने के बाद उन्हें सस्पेंड करने का फैसला लिया गया। पार्टी ने कहा कि किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। नेताओं और वालंटियरों को पार्टी के निर्धारित नियमों का पालन करना पड़ेगा।
केजरीवाल दे गए थे खैरा पर एक्शन के संकेत
अरविंद केजरीवाल ने इसी हफ्ते चंडीगढ़ दौरे के दौरान सुखपाल खैरा के खिलाफ एक्शन के संकेत दे दिए थे। पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि खैरा का कहना है कि वे केजरीवाल का नाम भी नहीं लेना चाहते, केजरीवाल ने कहा कि वे भी नहीं चाहते कि खैरा उनका नाम लें। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति खैरा नहीं, बल्कि राजनीति देश का विकास है। हालांकि उन्होंने कहा था कि नाराज नेताओं को जल्द मना लिया जाएगा।