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लोकसभा 2019: अधूरी तैयारियों से चुनाव जीतने आई भाजपा, नहीं बना निचले स्तर पर संगठनात्मक ढांचा
Mon, 04 Mar 2019 01:09 PM IST
खुशबू गोयल
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 04 Mar 2019 01:09 PM IST
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पंजाब में भाजपा-अकाली दल गठबंधन
- फोटो : Amar Ujala
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आधी-अधूरी तैयारियों के साथ भाजपा लोकसभा चुनाव जीतने की तैयारी में है। हालत यह है कि पार्टी हाईकमान द्वारा निर्धारित निचले स्तर तक का संगठनात्मक ढांचा ही अब तक पंजाब में नहीं बन सका है। पार्टी नेतृत्व ने लोकसभा चुनाव में जीत के लिए बूथ स्तर पर संगठन खड़ा करने पर फोकस किया है। खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने 28 फरवरी को देश भर में 15 हजार जगहों पर करोड़ों बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं से बात की थी। लेकिन निचले स्तर पर संगठन खड़ा करने का राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का मिशन अब तक पंजाब में पूरा नहीं हो सका है।
पूरे पंजाब में अब तक शक्ति केंद्र प्रमुख ही नहीं बन पाए हैं। करीब पांच बूथों पर पार्टी ने एक शक्ति केंद्र बनाया है। बहुत से जिलों में फर्जी नियुक्ति करके ब्योरा प्रदेश नेतृत्व को भेज दिया गया है। इसके बाद बूथ प्रमुख बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। उसमें भी काफी समय लगेगा। पार्टी ने गुजरात, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में पन्ना प्रमुख और अर्ध पन्ना प्रमुख को सफलतापूर्वक आजमाया है। पन्ना प्रमुख वोटर लिस्ट के एक पन्ने में शामिल घरों तक सीमित होता है। अर्ध पन्ना प्रमुख के पास आधे पेज के लोगों की जिम्मेदारी होती है। मतदान के समय इनकी भूमिका पार्टी केलिए काफी अहम है।
पड़ोसी राज्यों हरियाणा, हिमाचल प्रदेश में इस स्तर तक ढांचा बना हुआ है। लेकिन पंजाब में अब तक इनका कुछ पता नहीं है। इतना ही नहीं, निचले स्तर पर संगठन बनाने में भी पार्टी का फोकस अपने कोटे की तीन सीटों अमृतसर, होशियारपुर, गुरदासपुर पर ही है। मालवा के जिले तो काफी पीछे हैं।
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पूरे पंजाब में अब तक शक्ति केंद्र प्रमुख ही नहीं बन पाए हैं। करीब पांच बूथों पर पार्टी ने एक शक्ति केंद्र बनाया है। बहुत से जिलों में फर्जी नियुक्ति करके ब्योरा प्रदेश नेतृत्व को भेज दिया गया है। इसके बाद बूथ प्रमुख बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। उसमें भी काफी समय लगेगा। पार्टी ने गुजरात, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में पन्ना प्रमुख और अर्ध पन्ना प्रमुख को सफलतापूर्वक आजमाया है। पन्ना प्रमुख वोटर लिस्ट के एक पन्ने में शामिल घरों तक सीमित होता है। अर्ध पन्ना प्रमुख के पास आधे पेज के लोगों की जिम्मेदारी होती है। मतदान के समय इनकी भूमिका पार्टी केलिए काफी अहम है।
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पड़ोसी राज्यों हरियाणा, हिमाचल प्रदेश में इस स्तर तक ढांचा बना हुआ है। लेकिन पंजाब में अब तक इनका कुछ पता नहीं है। इतना ही नहीं, निचले स्तर पर संगठन बनाने में भी पार्टी का फोकस अपने कोटे की तीन सीटों अमृतसर, होशियारपुर, गुरदासपुर पर ही है। मालवा के जिले तो काफी पीछे हैं।
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प्रभावशाली नहीं रहा शक्ति केंद्र सम्मेलन
पार्टी ने हाल ही में अमृतसर में शक्ति केंद्र प्रमुखों का सम्मेलन आयोजित किया था। जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी आए थे। पूरे पंजाब से लोगों को बुलाने के बावजूद ज्यादा भीड़ नहीं जुट सकी। जिससे शाह और प्रभारी कैप्टन अभिमन्यु काफी नाराज हुए थे। शाह ने भाजपा के कोटे के तीन हलकों से आए शक्ति केंद्र प्रमुखों से संवाद भी नहीं किया। सिर्फ भाषण देकर चले गए।
टीम लेट बनने से हुई देरी
भाजपा के प्रदेश महासचिव दयाल सोढी ने दलील दी कि सूबे की टीम लेट बनने की वजह संगठन खड़ा करने में देरी हुई। सूबे के बाद जिलों की कार्यकारिणी गठित की गईं। फिर मंडल से बूथ तक ढांचा बनाया गया। फिर भी अमित शाह के दौरे के समय 80 फीसदी शक्ति केंद्र प्रमुख नियुक्त हो गए थे। बूथ प्रमुख नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कुछ ही दिन में ये पूरी होगी। फिर लोकसभा स्तर पर इनका सम्मेलन कराया जाएगा। पार्टी की कोशिश होगी कि चुनाव से पहले कम से कम अपने तीन हलकों में पन्ना प्रमुख नियुक्त कर लिए जाएं।
टीम लेट बनने से हुई देरी
भाजपा के प्रदेश महासचिव दयाल सोढी ने दलील दी कि सूबे की टीम लेट बनने की वजह संगठन खड़ा करने में देरी हुई। सूबे के बाद जिलों की कार्यकारिणी गठित की गईं। फिर मंडल से बूथ तक ढांचा बनाया गया। फिर भी अमित शाह के दौरे के समय 80 फीसदी शक्ति केंद्र प्रमुख नियुक्त हो गए थे। बूथ प्रमुख नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कुछ ही दिन में ये पूरी होगी। फिर लोकसभा स्तर पर इनका सम्मेलन कराया जाएगा। पार्टी की कोशिश होगी कि चुनाव से पहले कम से कम अपने तीन हलकों में पन्ना प्रमुख नियुक्त कर लिए जाएं।