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लॉकडाउन: हरियाणा की अर्थव्यवस्था लड़खड़ाई, सरकार को 7841 करोड़ का राजस्व नुकसान
Mon, 18 May 2020 05:22 PM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 18 May 2020 05:22 PM IST
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल
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लॉकडाउन के तीन चरणों ने हरियाणा सरकार की अर्थव्यवस्था पर इस कदर प्रतिकूल असर डाला है कि मार्च और अप्रैल में सरकार को 7841 करोड़ का नुकसान हो गया। अर्थव्यवस्था ऐसी लड़खड़ाई है कि मई में भी राजस्व प्राप्ति नुकसान के मद्देनजर 5218 करोड़ का नुकसान तय माना जा रहा है। मौजूदा परिस्थितियों में सरकार को मई में भी राजस्व प्राप्ति से होने वाली अपेक्षाकृत आय की उम्मीद नहीं है।
लिहाजा सरकार को मई का भी राजस्व प्राप्ति एस्टीमेट रिवाइज्ड करना पड़ा है। दरसअल, अर्थव्यवस्था और राजस्व प्राप्तियां विभिन्न विभागों के जरिये सरकार को होने वाली टैक्स रेवेन्यू व नॉन-टैक्स रेवेन्यू आय पर आधारित है। इन राजस्व प्राप्तियों में शेयर आफ सेंट्रल टैक्सेस, जीएसटी, स्टांप ड्यूटी, एक्साइज सेल टैक्स, टैक्सेस ऑन व्हीकल, ईडीसी, माइनिंग व रोड ट्रांसपोर्ट से होने वाली आय शामिल हैं।
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लिहाजा सरकार को मई का भी राजस्व प्राप्ति एस्टीमेट रिवाइज्ड करना पड़ा है। दरसअल, अर्थव्यवस्था और राजस्व प्राप्तियां विभिन्न विभागों के जरिये सरकार को होने वाली टैक्स रेवेन्यू व नॉन-टैक्स रेवेन्यू आय पर आधारित है। इन राजस्व प्राप्तियों में शेयर आफ सेंट्रल टैक्सेस, जीएसटी, स्टांप ड्यूटी, एक्साइज सेल टैक्स, टैक्सेस ऑन व्हीकल, ईडीसी, माइनिंग व रोड ट्रांसपोर्ट से होने वाली आय शामिल हैं।
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मार्च और अप्रैल में नुकसान का गणित
अप्रैल और मई में सरकार को 7841 करोड़ का राजस्व नुकसान हुआ। टैक्स रेवेन्यू के अंतर्गत अप्रैल में शेयर ऑफ सेंट्रल टैक्स का शॉर्टफॉल (कमी) 92 करोड़, मार्च में जीएसटी का शॉर्टफॉल 1183 करोड़ व अप्रैल में 1810 करोड़, स्टांप ड्यूटी का शॉर्टफाल मार्च में 252 करोड़ व अप्रैल में 564 करोड़, एक्साइज ड्यूटी का शॉर्टफाल मार्च में 252 करोड़ व अप्रैल में 564 करोड़, सेल टैक्स का शॉर्टफाल मार्च में 75 करोड़ व अप्रैल में 194 करोड़, टैक्सेस ऑन व्हीकल का शॉर्टफाल मार्च में 104 करोड़ व अप्रैल 275 करोड़ और अन्य टैक्स शॉर्टफाल मार्च में 4 करोड़ व अप्रैल में 2 करोड़ रहा।
इसी तरह नॉन-टैक्स रेवेन्यू के तहत ईडीसी का शॉर्टफाल मार्च में 83 करोड़ और अप्रैल में 199 करोड़, माइनिंग विभाग का शार्टफाल मार्च में 5 करोड़ और अप्रैल में 70 करोड़, रोड ट्रांसपोर्ट से होने वाली आय का शार्टफाल मार्च में 36 करोड़ और अप्रैल में 96 करोड़ रहा। जबकि अन्य नॉन-टैक्स रेवेन्यू का मार्च में शॉर्टफाल 24 करोड़ और अप्रैल में 98 करोड़ रहा। मार्च में हरियाणा को जीएसटी शॉर्टफाल का पिछला बैलेंस 1337 करोड़ भी वहन करना पड़ा। कुल मिलाकर सरकार को रेवेन्यू में मार्च में 3699 करोड़ का शॉर्टफाल और अप्रैल में 4142 करोड़ का शॉर्टफाल झेलना पड़ा।
इसी तरह नॉन-टैक्स रेवेन्यू के तहत ईडीसी का शॉर्टफाल मार्च में 83 करोड़ और अप्रैल में 199 करोड़, माइनिंग विभाग का शार्टफाल मार्च में 5 करोड़ और अप्रैल में 70 करोड़, रोड ट्रांसपोर्ट से होने वाली आय का शार्टफाल मार्च में 36 करोड़ और अप्रैल में 96 करोड़ रहा। जबकि अन्य नॉन-टैक्स रेवेन्यू का मार्च में शॉर्टफाल 24 करोड़ और अप्रैल में 98 करोड़ रहा। मार्च में हरियाणा को जीएसटी शॉर्टफाल का पिछला बैलेंस 1337 करोड़ भी वहन करना पड़ा। कुल मिलाकर सरकार को रेवेन्यू में मार्च में 3699 करोड़ का शॉर्टफाल और अप्रैल में 4142 करोड़ का शॉर्टफाल झेलना पड़ा।
और अब मई से भी टूट गई सरकार की उम्मीदें
प्रदेश सरकार को मई से राजस्व प्राप्ति का अपना एस्टीमेट 72.75 प्रतिशत कम करना पड़ा। पिछले साल मई 2019 में 6575 करोड़ का वास्तविक राजस्व प्राप्त हुआ था। इस साल मई 2020 से सरकार को बड़ी उम्मीद थी। लिहाजा इस साल सरकार ने लक्ष्य 7200 करोड़ रखा था। अब सरकार को 7200 करोड़ से घटाकर 1982 करोड़ रुपये करना पड़ा। अभी तक 675 करोड़ ही राजस्व प्राप्त हुआ है।
फिर भी मदद को सरकार ने खर्च किए सैकड़ों करोड़
गरीबों, प्रवासी मजदूरों व अन्य जरूरतमंदों की मदद में लगभग 500 करोड़ से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इसके तहत सरकार जहां गरीबों को मुफ्त राशन वितरित कर रही है। वहीं गरीब पेंशनधारियों को हर महीने उनकी पेंशन के अतिरिक्त 4 हज़ार और श्रमिकों को 4500 रुपये दिए गए हैं।
प्रवासी मजदूरों को भी उनके घरों तक पहुंचाने का खर्च भी सरकार ने वहन किया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के अनुसार कम राजस्व आय के बावजूद सरकार लोगों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है और अपने दायित्वों से पीछे नहीं हट रही है।
फिर भी मदद को सरकार ने खर्च किए सैकड़ों करोड़
गरीबों, प्रवासी मजदूरों व अन्य जरूरतमंदों की मदद में लगभग 500 करोड़ से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इसके तहत सरकार जहां गरीबों को मुफ्त राशन वितरित कर रही है। वहीं गरीब पेंशनधारियों को हर महीने उनकी पेंशन के अतिरिक्त 4 हज़ार और श्रमिकों को 4500 रुपये दिए गए हैं।
प्रवासी मजदूरों को भी उनके घरों तक पहुंचाने का खर्च भी सरकार ने वहन किया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के अनुसार कम राजस्व आय के बावजूद सरकार लोगों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है और अपने दायित्वों से पीछे नहीं हट रही है।