{"_id":"5f7248978ebc3e9b7b6a6539","slug":"little-life-in-the-womb-babita-stood-on-the-path-of-duty-chandigarh-news-pkl3893245154","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना योद्ध नर्सिंग अफसर जज्बे को सलाम, गर्भ में नन्ही जान... फर्ज की राह पर डटी रहीं बबीता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना योद्ध नर्सिंग अफसर जज्बे को सलाम, गर्भ में नन्ही जान... फर्ज की राह पर डटी रहीं बबीता
Tue, 29 Sep 2020 04:49 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2020 04:49 PM IST
विज्ञापन
नर्सिंग अफसर बबीता
- फोटो : अमर उजाला
एक नारी के अंदर जिस समय एक और जीवन पलता है वह क्षण उसके लिए बेहद खास होता है। उस दौरान उसे खुश रहने, अच्छी बातें सोचने और तनाव ना लेने की सलाह दी जाती है। लेकिन बबीता शर्मा के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ। जीएमएसएच- 16 में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर तैनात बबीता ने गर्भावस्था के आठ महीने कोविड के मरीजों के बीच ड्यूटी कर गुजारे हैं।
महामारी के इस दौर में गर्भ से होने बावजूद कोरोना के पॉजिटिव मरीजों के साथ लगातार आठ महीने तक ड्यूटी कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि एक नारी और एक मां चाहे तो कुछ भी संभव हो सकता है। बबीता 16 सितंबर से मातृत्व अवकाश पर हैं। उनकी पांच साल की एक बेटी है और संयुक्त परिवार में रहती हैं।
..तो डर अपने आप हो गया खत्म
बबीता ने बताया कि जब उनकी ड्यूटी अस्पताल के कोविड वार्ड में लगने की सूचना मिली तो वे और उनके परिवार के सदस्य डर गए थे, क्योंकि गर्भावस्था में संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। इसके बावजूद बबीता ने खुद को संभाला और हिम्मत के साथ ड्यूटी पर पहुंचीं। उन्होंने बताया कि मरीजों के बीच पीपीई किट पहनकर ड्यूटी करने की आदत सी हो गई। इसके बाद मन का डर अपने आप खत्म हो गया।
विज्ञापन
सबने समझाया पर सुनी अपने दिल की
बबीता को जनवरी के अंत में पता चला कि वह मां बनने वाली हैं। सबकुछ अच्छा चल रहा था, तभी अचानक कोरोना ने दस्तक दे दिया। देखते ही देखते शहर की स्थिति बदल गई। मार्च आते-आते कोरोना महामारी का खौफ हर तरफ छा गया। बबिता की स्थिति को देखते हुए उनके घर के सदस्यों और अस्पताल के सहयोगियों ने उन्हें छुट्टी लेने के लिए कहा।
लेकिन बबीता ने उनकी बात नहीं मानी और गर्भावस्था के दौरान आठ महीने तक अस्पताल में ड्यूटी की। इस दौरान उन्होंने संक्रमण से बचाव के मानकों का गंभीरता से पालन किया। बबीता का कहना है कि घर हो या बाहर जब एक नारी ठान लेती है उसे सफल होना है तो फिर उसके राह की सारी रुकावटें खुद ही दूर होने लगती हैं।
नारी को कमजोर मानने वालों के लिए सटीक जवाब
बबीता जैसे स्टाफ के बल पर ही स्वास्थ्य विभाग कोरोना से जंग में सफलता हासिल कर रहा है। बबीता पर हम सभी को नाज है। जो लोग नारी को कमजोर और असहाय मानते हैं बबीता उन लोगों के लिए एक सटीक जवाब है।
- डॉ. वीके नागपाल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमएसएच- 16
विज्ञापन
महामारी के इस दौर में गर्भ से होने बावजूद कोरोना के पॉजिटिव मरीजों के साथ लगातार आठ महीने तक ड्यूटी कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि एक नारी और एक मां चाहे तो कुछ भी संभव हो सकता है। बबीता 16 सितंबर से मातृत्व अवकाश पर हैं। उनकी पांच साल की एक बेटी है और संयुक्त परिवार में रहती हैं।
विज्ञापन
..तो डर अपने आप हो गया खत्म
बबीता ने बताया कि जब उनकी ड्यूटी अस्पताल के कोविड वार्ड में लगने की सूचना मिली तो वे और उनके परिवार के सदस्य डर गए थे, क्योंकि गर्भावस्था में संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। इसके बावजूद बबीता ने खुद को संभाला और हिम्मत के साथ ड्यूटी पर पहुंचीं। उन्होंने बताया कि मरीजों के बीच पीपीई किट पहनकर ड्यूटी करने की आदत सी हो गई। इसके बाद मन का डर अपने आप खत्म हो गया।
विज्ञापन
सबने समझाया पर सुनी अपने दिल की
बबीता को जनवरी के अंत में पता चला कि वह मां बनने वाली हैं। सबकुछ अच्छा चल रहा था, तभी अचानक कोरोना ने दस्तक दे दिया। देखते ही देखते शहर की स्थिति बदल गई। मार्च आते-आते कोरोना महामारी का खौफ हर तरफ छा गया। बबिता की स्थिति को देखते हुए उनके घर के सदस्यों और अस्पताल के सहयोगियों ने उन्हें छुट्टी लेने के लिए कहा।
लेकिन बबीता ने उनकी बात नहीं मानी और गर्भावस्था के दौरान आठ महीने तक अस्पताल में ड्यूटी की। इस दौरान उन्होंने संक्रमण से बचाव के मानकों का गंभीरता से पालन किया। बबीता का कहना है कि घर हो या बाहर जब एक नारी ठान लेती है उसे सफल होना है तो फिर उसके राह की सारी रुकावटें खुद ही दूर होने लगती हैं।
नारी को कमजोर मानने वालों के लिए सटीक जवाब
बबीता जैसे स्टाफ के बल पर ही स्वास्थ्य विभाग कोरोना से जंग में सफलता हासिल कर रहा है। बबीता पर हम सभी को नाज है। जो लोग नारी को कमजोर और असहाय मानते हैं बबीता उन लोगों के लिए एक सटीक जवाब है।
- डॉ. वीके नागपाल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमएसएच- 16