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पीयू सीनेट के मनोनीत सदस्यों की सूची जारी, भाजपा का डंका
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय सीनेट के लिए चांसलर कार्यालय की ओर से जारी की गई सूची में इस बार भाजपा का डंका बज गया। 36 मनोनीत सदस्यों में से 34 भाजपा खेमे से हैं।
अच्छी बात यह रही कि इस सूची में कैंपस के शिक्षकों को जगह दी गई है, जो सीनेट की हर बैठक में हिस्सा ले सकेंगे। इस सूची को इसलिए भी अच्छा बताया जा रहा है क्योंकि चांसलर कार्यालय ने न केवल कांग्रेस के दिग्गजों को हटाया, बल्कि भाजपा के दिग्गज भी इस सूची से बाहर हुए। अब तक सीनेट की 32 सीटों के लिए चुनाव हो चुके हैं। इनमें 28 सीटें कांग्रेस खेमे के हिस्से में बताई जा रही हैं। चार सीटों को भाजपा अपने खेमे में मान रही है जो दूसरे ग्रुप की हैं। अब तक का गणित बताता है कि भाजपा व कांग्रेस के पास सदस्यों की संख्या लगभग बराबर ही है। असली गणित स्नातक चुनाव के परिणाम के बाद तय होगा।
मनोनीत सदस्यों की सूची में शामिल नेताओं में पंजाब से केंद्रीय मंत्री सोमप्रकाश, सांसद किरण खेर, पूर्व सांसद सत्यपाल जैन, पूर्व मेयर देवेश मोदगिल शामिल हैं। यह पहले भी सीनेट में रहे हैं। तीन से चार सदस्य और हैं जो इस बार दोबारा मनोनीत हुए हैं। हरियाणा के पूर्व डीजीपी गुरजोत सिंह मल्ही भी सदस्य बने हैं। हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह लगातार तीसरी बार सीनेट में मनोनीत होकर आए हैं। पीयू के पूर्व वीसी प्रो. एके ग्रोवर भी मनोनीत हुए हैं। इनके अलावा खेल निदेशक प्रो. प्रशांत गौतम, प्रो. देवेंद्र सिंह, निदेशक एचआरडीसी प्रो. एसके तोमर, प्रो. जगत भूषण, प्रो. जयंती दत्ता, प्रो. सुशील कंसल, प्रो. सुखबीर कौर, डॉ. प्रियतोष शर्मा, डॉ. निधि गौतम आदि का नाम भी सूची में शामिल हुआ है। असिस्टेंट व एसोसिएट प्रोफेसरों की संख्या भी इस बार काफी रही है। पुटा के अध्यक्ष व कर्मचारी एसोसिएशन के अध्यक्ष भी इस सूची में शामिल हैं।
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डॉ. सुभाष शर्मा खुद पीछे हटे या हटाया गया
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे संजय टंडन, पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल, भाजपा नेता डॉ. सुभाष शर्मा को मनोनीत सूची में जगह नहीं मिली। डॉ. सुभाष सीनेट में भाजपा खेमे से आते हैं जो कांग्रेस के सदस्यों के साथ स्वस्थ बहस करते रहे हैं, लेकिन इस बार उनका नाम सूची में नहीं आया। जानकारों का कहना है कि भाजपा के ही एक दूसरे गुट ने उन्हें बाहर करवाया है। वहीं दूसरे लोगों का कहना है कि डॉ. सुभाष शर्मा को सरकार नई जिम्मेदारी जल्द देने जा रही है। ऐसे में उनका नाम नहीं आया। अब सवाल यह खड़ा हो गया है कि भाजपा का प्रतिनिधित्व सीनेट में कौन करेगा, क्योंकि कांग्रेस के दिग्गजों की उंगलियों पर पूरा पीयू का संविधान है। साथ ही उनके सवाल भी भारी होते हैं, जिन्हें उठाना आसान नहीं। इसके लिए भाजपा खेमे को एक मजबूत व्यक्ति को आगे बढ़ाना होगा।
कांग्रेस के सदस्यों ने रणनीति बनाना शुरू किया
जैसे ही मनोनीत सदस्यों की सूची सामने आई तो कांग्रेस खेमे के लोगों ने समीक्षा शुरू कर दी। अब जोर स्नातक वर्ग चुनाव पर है। कांग्रेसी चाहते हैं कि सभी 15 सीटों पर उनके सदस्य चुनकर आएं और उसी के मुताबिक वे तैयारी कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि 10 से 11 सीटें भी किसी एक पक्ष के पास आ गई तो समझें कि सीनेट में उनका दबदबा होगा। इस बार मनोनीत सदस्यों की सूची स्नातक चुनाव से पहले जारी हुई है। इससे स्नातक चुनाव पर असर पड़ सकता है।
सीनेट के मनोनीत सूची की खास बातें
सर्वाधिक शिक्षक पीयू व उससे संबद्ध कॉलेजों के चुने गए।
दोबारा मनोनीत होने वाले सदस्यों की संख्या छह से सात ही रही।
एसोसिएट व असिस्टेंट प्रोफेसर भी इस बार सर्वाधिक चुने गए।
सूची में पारदर्शिता रही। कांग्रेस व भाजपा दोनों ही खेमों के दिग्गजों को बाहर किया गया।
इस बार सीनेट चुनाव हारने वाले भाजपाइयों को जगह नहीं मिली।
तीन साल सीनेट का कार्यकाल रहेगा। हालांकि पिछले साल से ही सीनेट कागजों में अस्तित्व में रही। भले ही चुनाव नहीं हों। उस काल का जोड़कर चार साल पूरे होते हैं।
सूची पर कुछ ने उठाए सवाल तो कुछ ने किया स्वागत
चांसलर कार्यालय की ओर से मनोनीत सदस्यों की सूची का शिक्षकों ने स्वागत किया। यूआईईटी के प्रो. मनु शर्मा ने कहा कि शिक्षकों को सर्वाधिक जगह मिली। यह अच्छी खबर है। डॉ. जेएस सहरावत ने कहा कि सूची में पूरी पारदर्शिता बरती गई। डॉ. अरुण सिंह ठाकुर आदि ने भी हर्ष जताया। कुछ शिक्षकों ने सूची पर सवाल भी खड़े किए, लेकिन वे सामने नहीं आए।
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अच्छी बात यह रही कि इस सूची में कैंपस के शिक्षकों को जगह दी गई है, जो सीनेट की हर बैठक में हिस्सा ले सकेंगे। इस सूची को इसलिए भी अच्छा बताया जा रहा है क्योंकि चांसलर कार्यालय ने न केवल कांग्रेस के दिग्गजों को हटाया, बल्कि भाजपा के दिग्गज भी इस सूची से बाहर हुए। अब तक सीनेट की 32 सीटों के लिए चुनाव हो चुके हैं। इनमें 28 सीटें कांग्रेस खेमे के हिस्से में बताई जा रही हैं। चार सीटों को भाजपा अपने खेमे में मान रही है जो दूसरे ग्रुप की हैं। अब तक का गणित बताता है कि भाजपा व कांग्रेस के पास सदस्यों की संख्या लगभग बराबर ही है। असली गणित स्नातक चुनाव के परिणाम के बाद तय होगा।
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मनोनीत सदस्यों की सूची में शामिल नेताओं में पंजाब से केंद्रीय मंत्री सोमप्रकाश, सांसद किरण खेर, पूर्व सांसद सत्यपाल जैन, पूर्व मेयर देवेश मोदगिल शामिल हैं। यह पहले भी सीनेट में रहे हैं। तीन से चार सदस्य और हैं जो इस बार दोबारा मनोनीत हुए हैं। हरियाणा के पूर्व डीजीपी गुरजोत सिंह मल्ही भी सदस्य बने हैं। हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह लगातार तीसरी बार सीनेट में मनोनीत होकर आए हैं। पीयू के पूर्व वीसी प्रो. एके ग्रोवर भी मनोनीत हुए हैं। इनके अलावा खेल निदेशक प्रो. प्रशांत गौतम, प्रो. देवेंद्र सिंह, निदेशक एचआरडीसी प्रो. एसके तोमर, प्रो. जगत भूषण, प्रो. जयंती दत्ता, प्रो. सुशील कंसल, प्रो. सुखबीर कौर, डॉ. प्रियतोष शर्मा, डॉ. निधि गौतम आदि का नाम भी सूची में शामिल हुआ है। असिस्टेंट व एसोसिएट प्रोफेसरों की संख्या भी इस बार काफी रही है। पुटा के अध्यक्ष व कर्मचारी एसोसिएशन के अध्यक्ष भी इस सूची में शामिल हैं।
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डॉ. सुभाष शर्मा खुद पीछे हटे या हटाया गया
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे संजय टंडन, पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल, भाजपा नेता डॉ. सुभाष शर्मा को मनोनीत सूची में जगह नहीं मिली। डॉ. सुभाष सीनेट में भाजपा खेमे से आते हैं जो कांग्रेस के सदस्यों के साथ स्वस्थ बहस करते रहे हैं, लेकिन इस बार उनका नाम सूची में नहीं आया। जानकारों का कहना है कि भाजपा के ही एक दूसरे गुट ने उन्हें बाहर करवाया है। वहीं दूसरे लोगों का कहना है कि डॉ. सुभाष शर्मा को सरकार नई जिम्मेदारी जल्द देने जा रही है। ऐसे में उनका नाम नहीं आया। अब सवाल यह खड़ा हो गया है कि भाजपा का प्रतिनिधित्व सीनेट में कौन करेगा, क्योंकि कांग्रेस के दिग्गजों की उंगलियों पर पूरा पीयू का संविधान है। साथ ही उनके सवाल भी भारी होते हैं, जिन्हें उठाना आसान नहीं। इसके लिए भाजपा खेमे को एक मजबूत व्यक्ति को आगे बढ़ाना होगा।
कांग्रेस के सदस्यों ने रणनीति बनाना शुरू किया
जैसे ही मनोनीत सदस्यों की सूची सामने आई तो कांग्रेस खेमे के लोगों ने समीक्षा शुरू कर दी। अब जोर स्नातक वर्ग चुनाव पर है। कांग्रेसी चाहते हैं कि सभी 15 सीटों पर उनके सदस्य चुनकर आएं और उसी के मुताबिक वे तैयारी कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि 10 से 11 सीटें भी किसी एक पक्ष के पास आ गई तो समझें कि सीनेट में उनका दबदबा होगा। इस बार मनोनीत सदस्यों की सूची स्नातक चुनाव से पहले जारी हुई है। इससे स्नातक चुनाव पर असर पड़ सकता है।
सीनेट के मनोनीत सूची की खास बातें
सर्वाधिक शिक्षक पीयू व उससे संबद्ध कॉलेजों के चुने गए।
दोबारा मनोनीत होने वाले सदस्यों की संख्या छह से सात ही रही।
एसोसिएट व असिस्टेंट प्रोफेसर भी इस बार सर्वाधिक चुने गए।
सूची में पारदर्शिता रही। कांग्रेस व भाजपा दोनों ही खेमों के दिग्गजों को बाहर किया गया।
इस बार सीनेट चुनाव हारने वाले भाजपाइयों को जगह नहीं मिली।
तीन साल सीनेट का कार्यकाल रहेगा। हालांकि पिछले साल से ही सीनेट कागजों में अस्तित्व में रही। भले ही चुनाव नहीं हों। उस काल का जोड़कर चार साल पूरे होते हैं।
सूची पर कुछ ने उठाए सवाल तो कुछ ने किया स्वागत
चांसलर कार्यालय की ओर से मनोनीत सदस्यों की सूची का शिक्षकों ने स्वागत किया। यूआईईटी के प्रो. मनु शर्मा ने कहा कि शिक्षकों को सर्वाधिक जगह मिली। यह अच्छी खबर है। डॉ. जेएस सहरावत ने कहा कि सूची में पूरी पारदर्शिता बरती गई। डॉ. अरुण सिंह ठाकुर आदि ने भी हर्ष जताया। कुछ शिक्षकों ने सूची पर सवाल भी खड़े किए, लेकिन वे सामने नहीं आए।