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Punjab News: 36000 कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने की राह में अफसरशाही रोड़ा, खफा वित्त मंत्री ने दो दिन में मांगी रिपोर्ट

Wed, 20 Jul 2022 01:35 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 20 Jul 2022 01:35 AM IST
सार

पंजाब सरकार के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सरकारी विभागों में कांट्रैक्ट, डेलीवेजेज और ठेके पर काम कर रहे कच्चे मुलाजिमों की संख्या 36000 है लेकिन अनेक विभागों द्वारा ऐसे मुलाजिमों का पूरा आंकड़ा अब तक तैयार नहीं किया गया है। इस कारण कच्चे मुलाजिमों की सही संख्या पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। 

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List of contract employees did not reach cabinet sub committee of Punjab
वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब के सरकारी विभागों में काम कर रहे 36000 कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने की कोशिशें सिरे नहीं चढ़ रहीं। इस संबंध में गठित कैबिनेट सब-कमेटी जहां इस मामले को जल्द से जल्द हल करने के लिए इन दिनों कानूनी राय ले रही है, वहीं मंगलवार को हुई तीसरी बैठक में कई विभागों के अधिकारियों ने अपने अधीन कच्चे मुलाजिमों की जो सूची सब-कमेटी को सौंपी, वह आधी-अधूरी ही थी।

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वित्त मंत्री हरपाल चीमा के नेतृत्व में गठित इस सब-कमेटी ने इन अधिकारियों को फरमान सुना दिया है कि अगले दो दिन में पूरी सूची पेश करें या कार्रवाई के लिए तैयार रहें। कैबिनेट सब-कमेटी की अगली बैठक अब 21 जुलाई को होगी। इससे पहले सब-कमेटी ने अपनी दूसरी बैठक में उन कानूनी अड़चनों पर विचार किया था, जिसके चलते कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने के फैसले को अदालतों में चुनौती मिल सकती है।
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सब-कमेटी ने इस संबंध में अब तक सुप्रीम कोर्ट सहित विभिन्न अदालतों में पहुंचे केसों और उन पर आए फैसलों के अध्ययन के लिए लीगल टीम गठित करने का फैसला लिया था। यह टीम पुराने केसों का अध्ययन कर रही है। फिलहाल इस मामले में सब-कमेटी के सामने यही कानूनी राय आई है कि सभी कच्चे मुलाजिमों को पक्का नहीं किया जा सकता। इसका एक बड़ा कारण कांट्रैक्ट आधार पर भर्ती मुलाजिमों और पक्के मुलाजिमों की सीनियोरिटी और वेतनमान का भी है, जो विवाद पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा, कई मुलाजिमों की भर्ती ही इन्हीं शर्तों पर की गई है कि तय समय तक सेवा में रखने के बाद उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी। 

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सब-कमेटी के लिए यह बड़ी समस्या है कि अगर ऐसे मुलाजिमों को पक्का करने के आदेश जारी किए गए तो यह आदेश अदालती चक्करों में उलझ जाएंगे। उल्लेखनीय है कि पंजाब के सरकारी विभागों में कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने का फैसला पिछली कांग्रेस सरकार के समय भी लिया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की अगुवाई में सरकार ने इस संबंध में एक प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में पारित करके राज्यपाल के पास भेजा था लेकिन राज्यपाल से मंजूरी नहीं मिल सकी। इसके बाद पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने ऐसा ही एलान किया है और इस संबंध में कैबिनेट सब-कमेटी का गठन कर काम भी शुरू कर दिया है लेकिन मामला फिलहाल कानूनी दांवपेंच को लेकर उलझा हुआ है।

मुलाजिमों को चरणबद्ध तरीके से पक्का करने का सुझाव
सब-कमेटी, जिसमें सदस्य के रूप में कैबिनेट मंत्री हरजोत बैंस और गुरमीत सिंह मीत हेयर शामिल हैं, की पहली बैठक में यह सुझाव आया था कि कच्चे मुलाजिमों को चरणबद्ध तरीके से पक्का किया जाए। इसके तहत पहले उन मुलाजिमों के लिए आदेश जारी किए जाएं, जिन्हें सरकार ने नियमानुसार भर्ती विज्ञापन और तय मानदंड के अधीन नौकरी पर रखा था। 

सब-कमेटी का मानना है कि ऐसे मुलाजिमों को सीधे पक्का करने में कोई कानूनी अड़चन नहीं आएगी और मुलाजिमों के पिछले कार्यकाल को देखते हुए आयु सीमा में छूट का नियम भी लागू किया जा सकेगा लेकिन सब-कमेटी को इसमें भी एक समस्या यह दिखाई दी है कि कच्चे कार्यकाल को जोड़ा गया तो मौजूदा पक्के मुलाजिमों के साथ सीनियोरिटी क्लैश होगी औैर पदोन्नति जैसे नए विवाद खड़े हो जाएंगे। इसके अलावा पहले तीन साल प्रोबेशन पीरियड में बेसिक वेतन देने का नियम भी लागू नहीं हो सकेगा।

विभागों में चहेतों को फिट करने की आशंका
राज्य सरकार के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सरकारी विभागों में कांट्रैक्ट, डेलीवेजेज और ठेके पर काम कर रहे कच्चे मुलाजिमों की संख्या 36000 है लेकिन अनेक विभागों द्वारा ऐसे मुलाजिमों का पूरा आंकड़ा अब तक तैयार नहीं किया गया है। इस कारण कच्चे मुलाजिमों की सही संख्या पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। 

दूसरी ओर, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को लेकर सब-कमेटी को संदेह है कि कुछ विभागों में अधिकारियों ने अपने चहेतों को बिना रिकॉर्ड के ही कच्चे मुलाजिमों के तौर पर फिट किया हुआ है। इसी के मद्देनजर सब-कमेटी ने मंगलवार को ऐसे अधिकारियों को ज्यादा मोहलत नहीं दी और केवल दो दिन में पूरी सूची पेश करने को कह दिया है। इन अधिकारियों द्वारा पेश की जाने वाली सूचियों को अब सरकारी आंकड़ों से मिलान किया जाएगा, ताकि गड़बड़ी की आशंका को भी दूर किया जा सके।

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