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पूर्व CM बेअंत सिंह हत्याकांड में जगतार सिंह तारा को उम्रकैद, मरने तक जेल में रहेगा
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 17 Mar 2018 03:46 PM IST
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जगतार सिंह तारा
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पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में फैसला आ गया है। मामले में मुख्य आरोपी आतंकी जगतार सिंह तारा की सारी जिंदगी अब जेल में कटेगी। तारा को आखिरी सांस तक उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। साथ ही 35000 रुपये जुर्माना लगाया गया है। खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) और बब्बर खालसा ग्रुप के सदस्य जगतार सिंह तारा को शुक्रवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जेएस सिद्धू की अदालत ने दोषी करार दिया था। इन्हीं जज की विशेष अदालत ने दोषी तारा को शनिवार को सजा सुनाई।
जनवरी 2015 में तारा को थाईलैंड में गिरफ्तार होने के बाद पंजाब पुलिस भारत लेकर आई थी। इसके बाद चंडीगढ़ पुलिस ने उसका प्रोडक्शन वारंट लिया था। यहां से बुड़ैल जेल भेज दिया गया। इसके बाद उसके खिलाफ बेअंत सिंह की हत्या और बुड़ैल जेल ब्रेक मामले में ट्रायल शुरू हुआ था। बुड़ैल जेल की विशेष अदालत में चल रहे ट्रायल के तहत गत 9 मार्च को केस की अंतिम बहस पूरी हुई थी। इसके बाद शुक्रवार को तारा को दोषी करार दिया गया।
इससे पहले 25 जनवरी 2018 को जगतार सिंह तारा ने छह पेज का कबूलनामा अदालत में सौंपा था। इसमें तारा ने बेअंत सिंह की हत्या करवाने की बात कबूल की थी। साथ ही कहा था कि ऐसा करने पर उसे कोई अफसोस नहीं है। वहीं, पिछली सुनवाई पर कोर्ट में तारा ने कहा था कि वह 25 जनवरी 2018 को दिए बयानों पर कायम है। पिछली सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील ने तारा से सीआरपीसी की धारा 313 के तहत 162 सवाल पूछे थे।
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वहीं, जज ने तारा को खुद के बचाव में गवाही पेश करने को कहा था लेकिन तारा ने सीबीआई वकील के प्रश्नों का जवाब देते हुए बचाव में गवाही देने से इंकार कर दिया था। उसने कहा कि जो बयान उसने लिखित में दिए हैं, वही अंतिम समझे जाएं।
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जनवरी 2015 में तारा को थाईलैंड में गिरफ्तार होने के बाद पंजाब पुलिस भारत लेकर आई थी। इसके बाद चंडीगढ़ पुलिस ने उसका प्रोडक्शन वारंट लिया था। यहां से बुड़ैल जेल भेज दिया गया। इसके बाद उसके खिलाफ बेअंत सिंह की हत्या और बुड़ैल जेल ब्रेक मामले में ट्रायल शुरू हुआ था। बुड़ैल जेल की विशेष अदालत में चल रहे ट्रायल के तहत गत 9 मार्च को केस की अंतिम बहस पूरी हुई थी। इसके बाद शुक्रवार को तारा को दोषी करार दिया गया।
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इससे पहले 25 जनवरी 2018 को जगतार सिंह तारा ने छह पेज का कबूलनामा अदालत में सौंपा था। इसमें तारा ने बेअंत सिंह की हत्या करवाने की बात कबूल की थी। साथ ही कहा था कि ऐसा करने पर उसे कोई अफसोस नहीं है। वहीं, पिछली सुनवाई पर कोर्ट में तारा ने कहा था कि वह 25 जनवरी 2018 को दिए बयानों पर कायम है। पिछली सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील ने तारा से सीआरपीसी की धारा 313 के तहत 162 सवाल पूछे थे।
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वहीं, जज ने तारा को खुद के बचाव में गवाही पेश करने को कहा था लेकिन तारा ने सीबीआई वकील के प्रश्नों का जवाब देते हुए बचाव में गवाही देने से इंकार कर दिया था। उसने कहा कि जो बयान उसने लिखित में दिए हैं, वही अंतिम समझे जाएं।
छह पेज का कबूलनामा दिया था, कहा- हत्या का अफसोस नहीं
जगतार सिंह तारा
25 जनवरी 2018 को जगतार सिंह तारा ने छह पेज का कबूलनामा विशेष अदालत में सौंपा था। इसमें तारा ने बेअंत सिंह की हत्या करवाने की बात कबूल की थी। साथ ही कहा था कि ऐसा करने का उसे कोई अफसोस नहीं है। तारा ने हत्याकांड के पीछे के औचित्य पर तर्क भी दिए थे। इस कबूलनामे में तारा ने कहा था कि उस समय परिस्थितियां असहिष्णु थीं जब बड़े पैमाने पर निर्दोष युवा मारे गए थे।
सत्ता में आने के बाद बेअंत सिंह ने अपराधियों को दंडित नहीं किया था। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन के बाद बेअंत सिंह ने इन अधिकारियों को पदोन्नति देकर राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए उनके नाम का उल्लेख कर पुरस्कृत किया था, इसलिए उसने बेअंत सिंह की हत्या कर दी। उसे इस हत्या के लिए कोई पछतावा नहीं। उसे विद्रोही या देशद्रोही कहे जाने का डर नहीं है, क्योंकि उसका मकसद सही था।
दिलावर की बॉडी से बम की तार जोड़ी थी
तारा ने सीआरपीसी की धारा 313 के तहत दर्ज कराए बयान में कहा था कि 31 अगस्त 1995 को वह राजोआणा के साथ सीएम आवास यह पता करने गया था कि वह वहां है या नहीं। इसके बाद वह मोहाली गए और दिलावर सिंह को लेकर वापस सीएम आवास पहुंचे। यहां आकर तारा ने दिलावर की बॉडी पर लगे बम की तार को कनेक्ट किया। इसके बाद उन्होंने मिलकर अरदास की।
तारा के अनुसार, दिलावर पंजाब सचिवालय गया और राजोआणा स्कूटर से उसके पीछे गया था। उसने कार हरियाणा सचिवालय के पास स्कूटर पार्क की और वह उस जगह को तुरंत छोड़कर वहां से चला गया। इसके बाद राजोआणा उससे चंद मिनट के लिए मिला और दोनों वहां से फरार हो गए। तारा ने चंडीगढ़ से दिल्ली के लिए रात 9 बजे बस पकड़ी थी। वहां पहुंचने पर ही उसे पता चला कि बेअंत सिंह की मौत हो चुकी है।
धारा 268 के कारण जेल में चल रही सुनवाई
ऐसा व्यक्ति जिससे सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचने, उपद्रव होने या अन्य किसी तरह के खतरे की संभावना हो उस पर धारा 268 लगाई जाती है। यहीं धारा जगतार सिंह तारा के खिलाफ केस में अतिरिक्त जोड़ी गई थी। इस धारा के लगने से ही पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड के पूरे ट्रायल की सुनवाई बुड़ैल जेल विशेष कोर्ट में की गई। इसी कारण बुड़ैल जेल से तारा को बाहर नहीं लाया जा सका।
सत्ता में आने के बाद बेअंत सिंह ने अपराधियों को दंडित नहीं किया था। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन के बाद बेअंत सिंह ने इन अधिकारियों को पदोन्नति देकर राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए उनके नाम का उल्लेख कर पुरस्कृत किया था, इसलिए उसने बेअंत सिंह की हत्या कर दी। उसे इस हत्या के लिए कोई पछतावा नहीं। उसे विद्रोही या देशद्रोही कहे जाने का डर नहीं है, क्योंकि उसका मकसद सही था।
दिलावर की बॉडी से बम की तार जोड़ी थी
तारा ने सीआरपीसी की धारा 313 के तहत दर्ज कराए बयान में कहा था कि 31 अगस्त 1995 को वह राजोआणा के साथ सीएम आवास यह पता करने गया था कि वह वहां है या नहीं। इसके बाद वह मोहाली गए और दिलावर सिंह को लेकर वापस सीएम आवास पहुंचे। यहां आकर तारा ने दिलावर की बॉडी पर लगे बम की तार को कनेक्ट किया। इसके बाद उन्होंने मिलकर अरदास की।
तारा के अनुसार, दिलावर पंजाब सचिवालय गया और राजोआणा स्कूटर से उसके पीछे गया था। उसने कार हरियाणा सचिवालय के पास स्कूटर पार्क की और वह उस जगह को तुरंत छोड़कर वहां से चला गया। इसके बाद राजोआणा उससे चंद मिनट के लिए मिला और दोनों वहां से फरार हो गए। तारा ने चंडीगढ़ से दिल्ली के लिए रात 9 बजे बस पकड़ी थी। वहां पहुंचने पर ही उसे पता चला कि बेअंत सिंह की मौत हो चुकी है।
धारा 268 के कारण जेल में चल रही सुनवाई
ऐसा व्यक्ति जिससे सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचने, उपद्रव होने या अन्य किसी तरह के खतरे की संभावना हो उस पर धारा 268 लगाई जाती है। यहीं धारा जगतार सिंह तारा के खिलाफ केस में अतिरिक्त जोड़ी गई थी। इस धारा के लगने से ही पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड के पूरे ट्रायल की सुनवाई बुड़ैल जेल विशेष कोर्ट में की गई। इसी कारण बुड़ैल जेल से तारा को बाहर नहीं लाया जा सका।
आठ को हो चुकी है सजा, एक बरी
जगतार सिंह तारा
बेअंत सिंह की हत्या के मामले में कुल दस में से छह दोषियों को 27 जुलाई 2007 को तत्कालीन अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रवि कुमार सोंधी ने दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी। इन्हें हत्या, हत्या के प्रयास, आत्महत्या के लिए उकसाना, आपराधिक साजिश रचने और एक्सप्लोजिव एक्ट की धारा 4, 5 व 6 के तहत दोषी पाया गया था। सजा पाने वालों में जगतार सिंह हवारा, शमशेर सिंह, लखविंदर सिंह, नसीब सिंह, बलवंत सिंह और गुरमीत सिंह शामिल थे।
वहीं, नसीब सिंह को एक्सप्लोजिव एक्ट की धारा-5 में दोषी पाया गया था जबकि सातवें आरोपी नवजोत सिंह को अदालत ने बरी कर दिया था। इनके अलावा ट्रायल के दौरान वर्ष 2004 में बुड़ैल जेल ब्रेक कर फरार हुए आठवें आरोपी परमजीत सिंह भ्यौरा को बाद में इसी मामले में सजा हुई थी। हवारा और भ्यौरा को अदालत ने आजीवन उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि अन्य को 14-14 साल की सजा सुनाई थी।
इनके अलावा बलवंत सिंह राजोआणा को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में इस फैसले पर केंद्र सरकार ने रोक लगा दी थी। तारा के जनवरी 2015 में पकड़े जाने के बाद वह एकमात्र दोषी था, जिसके खिलाफ ट्रायल बचा हुआ था।
1995 में बम ब्लास्ट कर की गई थी सीएम बेअंत सिंह की हत्या
31 अगस्त 1995 को पंजाब सिविल सचिवालय की बिल्डिंग के पास हुए बम ब्लास्ट में पंजाब के तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की मौत हो गई थी। इस ब्लास्ट में 17 अन्य लोगों की भी मौत हुई थी। केएलएफ के दिलावर सिंह जयसिंहवाला ने यह आत्मघाती हमला किया था।
वहीं, नसीब सिंह को एक्सप्लोजिव एक्ट की धारा-5 में दोषी पाया गया था जबकि सातवें आरोपी नवजोत सिंह को अदालत ने बरी कर दिया था। इनके अलावा ट्रायल के दौरान वर्ष 2004 में बुड़ैल जेल ब्रेक कर फरार हुए आठवें आरोपी परमजीत सिंह भ्यौरा को बाद में इसी मामले में सजा हुई थी। हवारा और भ्यौरा को अदालत ने आजीवन उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि अन्य को 14-14 साल की सजा सुनाई थी।
इनके अलावा बलवंत सिंह राजोआणा को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में इस फैसले पर केंद्र सरकार ने रोक लगा दी थी। तारा के जनवरी 2015 में पकड़े जाने के बाद वह एकमात्र दोषी था, जिसके खिलाफ ट्रायल बचा हुआ था।
1995 में बम ब्लास्ट कर की गई थी सीएम बेअंत सिंह की हत्या
31 अगस्त 1995 को पंजाब सिविल सचिवालय की बिल्डिंग के पास हुए बम ब्लास्ट में पंजाब के तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की मौत हो गई थी। इस ब्लास्ट में 17 अन्य लोगों की भी मौत हुई थी। केएलएफ के दिलावर सिंह जयसिंहवाला ने यह आत्मघाती हमला किया था।