मसोल: पंजाब के आखिरी गांव का दर्द, उज्ज्वला योजना में कनेक्शन तो मिला... सिलिंडर लेकर कोई नहीं आता
उज्ज्वला योजना के तहत लोगों को घरेलू गैस के कनेक्शन तो मिले लेकिन, गांव में सिलिंडर सप्लाई देने वाली गाड़ी ही नहीं पहुंचती। ऐसे में महिलाएं कच्चे चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हैं।
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सिलिंडरों को बना लिया स्टूल
गांव की कौशल्या ने बताया कि उज्ज्वला योजना से सिलिंडर मिला था। अब वह किसी काम का नहीं है। एक तो इतना महंगा सिलिंडर भरवाने की हमारी हैसियत नहीं है। दूसरा, एजेंसी नयागांव में है। यदि कोई सिलिंडर भरवाना भी चाहे तो यहां एजेंसी गाड़ी ही नहीं भेजती। नयागांव 12 किलोमीटर दूर है। वहां से सिलिंडर खुद लाना संभव नहीं। आजकल खाली सिलिंडर स्टूल के तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
दो किलोमीटर दूर से सिर पर लाते हैं पानी
बरखा देवी ने बताया कि पानी की समस्या इतनी गंभीर है कि गांव में सप्लाई नहीं होने के कारण लोग पानी के लिए तरस जाते हैं। इसलिए मजबूरी में करीब दो किलोमीटर दूर से पीने का पानी बरतनों में भरकर सिर पर लाना पड़ता है। एक हफ्ते में सिर्फ दो दिन लो प्रेशर से पानी की सप्लाई आती है। सरकार और नेताओं को हम लोगों के बारे में सोचना चाहिए।
गर्मियों में पानी के टैंकर मंगवाने में खाली हो जाती है जेब
संदीप कौर का कहना है कि गांव में पानी की किल्लत है। पानी के टैंकर मंगवाने के लिए लोगों को काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं और मजदूरी करके कमाए गए पैसे पानी के टैंकर नयागांव से मंगवाने में जेब खाली हो जाती है। वहां से पानी का एक टैंकर मंगवाने के लिए 1000-1200 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। प्रशासन को हमारी समस्या का समाधान करना चाहिए। बच्चों की पढ़ाई के लिए बचत नहीं कर सकते और कड़ी मजदूरी करके भी पानी मंगवाने में खर्चा होने के कारण हाथ खाली रहते हैं।
लोगों को योजना की जानकारी ही नहीं
बरखा देवी का कहना है कि गांव मसोल के लोगों का जीवन बड़ा कठिन है। आयुष्मान भारत सरबत सेहत बीमा योजना के बारे में तो कुछ भी नहीं पता। बहुत से लोग आर्थिक तंगी में रह रहे हैं। अगर किसी गर्भवती को प्रसव पीड़ा हो जाए तो उसे गांव के लोग चारपाई पर 4-5 किलोमीटर पैदल लेकर जाते हैं, उसके बाद कोई वाहन मिलता है। इस कारण कई महिलाओं की मौत भी हो चुकी है। लेकिन बारी-बारी से आने वाली प्रदेश सरकारों के लिए इन महिलाओं की मौतों के कोई मायने नहीं हैं।
कोई अपनी बेटी की शादी इस गांव में नहीं करना चाहता
पंच चरण कौर का कहना है कि गांव में सुख सुविधाएं ना होने के कारण हमें बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और तो और अब तो गांव के लड़कों की शादी करने में भी मुश्किलें आने लगी हैं क्योंकि इस गांव में कोई भी मां बाप अपनी लड़की की शादी नहीं करना चाहता।
इमरजेंसी में कहां जाए..कोई साधन नहीं
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रक्षा रानी का कहना है कि वह गांव की महिलाओं को प्रसव पूर्व की सेवाएं देती हैं। बच्चों को पोषण भी आंगनबाड़ी केंद्र पर दिया जाता है तथा हफ्ते में एक दिन करोरा स्वास्थ्य केंद्र से टीम आकर महिलाओं की जांच करती है। बच्चों का टीकाकरण भी करती है लेकिन आपातकाल की स्थिति में हमारे पास किसी भी प्रकार का कोई साधन नहीं है।