फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Life imprisonment to three former policemen who murdered three youths in a fake encounter in Punjab

31 साल बाद मिला इंसाफ: तीन युवकों को उठा फर्जी मुठभेड़ में था मारा, अब तीन पूर्व पुलिसवालों को उम्रकैद

Thu, 14 Sep 2023 10:33 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Thu, 14 Sep 2023 10:33 PM IST
सार

जानकारी के मुताबिक 1992 में अमृतसर जिले के ठठिया के बस स्टैंड से स्थानीय पुलिस ने युवक हरजीत सिंह को किसी मामले में पूछताछ के लिए उठाया था। इसके 14 दिन बाद पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ दिखाकर दो अन्य युवकों लखविंदर सिंह और जसविंदर सिंह के साथ हरजीत सिंह की भी हत्या कर दी थी।

विज्ञापन
Life imprisonment to three former policemen who murdered three youths in a fake encounter in Punjab
सजा होने के बाद कोर्ट से बाहर आते दोषी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मोहाली की विशेष सीबीआई अदालत ने गुरुवार को 31 साल पुराने एक फर्जी मुठभेड़ में तीन युवकों की हत्या करने वाले तीन पूर्व पुलिस मुलाजिमों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही तीनों दोषियों को दो-दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

विज्ञापन


अदालत ने तत्कालीन पुलिस मुलाजिमों में इंस्पेक्टर धर्म सिंह, एएसआई सुरिंदर सिंह और गुरदेव सिंह को दोषी करार देते हुए यह फैसला सुनाया है और उन्हें जेल भेज दिया है। अब दोषी इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। वहीं, फैसला सुनाते हुए अदालत में जज ने कहा कि पुलिस की ओर से ऐसा करना किसी दरिंदगी से कम नहीं है। उनकी वजह से तीन बेकसूर युवकों की जान गई है। इसके साथ ही बुजुर्ग मां-बाप ने अपने बच्चों को खोया है और इसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता। इसलिए आरोपियों को कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए।

विज्ञापन

1992 में फर्जी मुठभेड़ दिखाकर की थी हत्या

जानकारी के मुताबिक 1992 में अमृतसर जिले के ठठिया के बस स्टैंड से स्थानीय पुलिस ने युवक हरजीत सिंह को किसी मामले में पूछताछ के लिए उठाया था। इसके 14 दिन बाद पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ दिखाकर दो अन्य युवकों लखविंदर सिंह और जसविंदर सिंह के साथ हरजीत सिंह की भी हत्या कर दी थी। इस मामले में इंसाफ के लिए हरजीत सिंह के पिता ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

हाईकोर्ट ने तुरंत संज्ञान लेकर पुलिस की अवैध हिरासत से हरजीत सिंह की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए एक वारंट अधिकारी को नियुक्त किया था। इसके बाद दिसंबर 1992 में जिला एवं सेशंस जज चंडीगढ़ को इस मामले में न्यायिक जांच का आदेश जारी कर दिया गया था। 1995 में आई रिपोर्ट के आधार पर 30 मई, 1997 को हाईकोर्ट ने यह हत्या का केस सीबीआई को सौंप दिया था।

कुल नौ में से पांच आरोपियों की सुनवाई के दौरान हो चुकी मौत, एक चल रहा भगोड़ा

जानकारी के मुताबिक थाना लोपोके के थाना प्रभारी एसआई धर्म सिंह ने रिपोर्ट में इस हत्या के मामले को पुलिस के साथ मुठभेड़ दिखाया था। इतना ही नहीं, मारे गए युवकों के शव भी परिवार को नहीं सौंपे थे और खुद ही अंतिम संस्कार कर दिया था। इस पर तीनों युवकों के परिवार ने शक जताया था कि पुलिस ने तीनों युवकों की फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी है। 

जांच के दौरान सीबीआई ने पंजाब पुलिस के नौ पुलिस मुलाजिमों इंस्पेक्टर धर्म सिंह, एसआई राम लुभाया, एचसी सतबीर सिंह, दलजीत सिंह उर्फ मोटू, इंस्पेक्टर हरभजन राम, एएसआई, सुरिंदर सिंह, एएसआई गुरदेव सिंह, एसआई अमरीक सिंह और एएसआई भूपिंदर सिंह के खिलाफ आरोपपत्र पेश किया था। इसमें से पांच आरोपियों में हरभजन राम, राम लुभाया, सतबीर सिंह, दलजीत सिंह उर्फ मोटू और अमरीक सिंह की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। जबकि एक आरोपी पुलिस मुलाजिम भूपिंदर सिंह को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed