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प्रसाशन की सुस्ती ने गवाएं पद्म अवार्ड

Tue, 12 Nov 2013 10:06 AM IST
मयंक मिश्रा
मयंक मिश्रा Updated Tue, 12 Nov 2013 10:06 AM IST
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Late application for padam awards by UT administration
यूटी प्रशासन की लेटलतीफी के कारण वर्ष 2013 में पद्म अवार्ड के लिए प्रशासन की ओर से प्रस्तावित दो नामों पर पद्म अवार्ड कमेटी विचार नहीं कर सकी।
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प्रशासन ने पद्म अवार्ड के लिए दो नाम तय करने में दो महीने से ज्यादा समय लगा दिया। पुरस्कार तय करने वाली कमेटी के पास जब ये नाम भेजे गए तब तक नाम भेजने की समय सीमा ही निकल चुकी थी।

इन नामों पर विचार ही नहीं किया गया। इस बार भी प्रशासन ने पांच नाम तय कर अंतिम तिथि निकलने के बाद ही भेजे हैं।

दिल्ली निवासी सुभाष चंद्र अग्रवाल की ओर से केंद्रीय गृह मंत्रालय से आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में यह खुलासा हुआ है।

वर्ष 2013 के लिए कुल 1300 नाम पद्म अवार्ड कमेटी के पास पहुंचे थे। लेकिन, इस सूची में चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से प्रस्तावित दोनों ही नाम शामिल नहीं थे।

प्रो. केसर और डॉ. बेहरा थे लिस्ट में
पिछले साल यूटी प्रशासन ने पद्म अवार्ड के लिए जो दो नाम तय किए थे उनमें पीजीआई के पलमनरी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डा. दिगंबर बेहरा और पीयू के केमिस्ट्री विभाग के रिटायर्ड प्रोफेसर व सिंथेटिक आर्गेनिक केमिस्ट्री के जाने-माने वैज्ञानिक प्रो. सतिंदर वीर केसर के नाम थे।
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पीयू के कुलपति प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर ने प्रो. सतिंदर वीर केसर का नाम प्रस्तावित किया था, जबकि डॉ. बेहरा ने अपना आवेदन खुद ही भेजा था। प्रशासन के पास पद्म अवार्ड के लिए चार लोगों के नाम पहुंचे थे।
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प्रशासक के सलाहकार केके शर्मा की अध्यक्षता में कई बैठकों के बाद चार में से दो नाम पिछले साल दिसंबर महीने में फाइनल हुए थे, जबकि नाम भेजने की अंतिम तिथि 1 अक्तूबर 2012 थी।

बंसल के प्रस्ताव से मिला एक पुरस्कार
सांसद और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री पवन कुमार बंसल की ओर से पांच नाम पद्म पुरस्कारों के लिए प्रस्तावित किए गए थे। इनमें से उद्योगपति और समाजसेवी डॉ.आरके साबू का नाम समाज सेवा वर्ग के लिए, मेजर जनरल (डॉ.) जय प्रकाश बंसल का नाम मेडिसिन वर्ग के लिए और हॉकी खिलाड़ी हरबिंदर सिंह का नाम उन्होंने संसदीय कार्यमंत्री रहते हुए प्रस्तावित किए, जबकि रेलमंत्री बनने के बाद जसपाल भट्टी और पीयू के पूर्व कुलपति प्रो. केएन पाठक का नाम साहित्य एवं शिक्षा वर्ग के लिए प्रस्तावित किया था। इनमें से जसपाल भट्टी को मरणोपरांत पद्म भूषण पुरस्कार दिया गया। डॉ. साबू को सात साल पहले पद्म श्री मिल चुका है।

इस साल प्रस्तावित हैं ये पांच नाम
चंडीगढ़ प्रशासन ने इस साल पद्म पुरस्कार के लिए पांच नाम भेज हैं। इनमें से प्रो. एचएस हंस और हरपाल सिंह का नाम पीयू के कुलपति प्रो. एके ग्रोवर ने प्रस्तावित किए हैं।


सत्तर फीसदी शारीरिक विकलांगता के बाद भी हरपाल सिंह कला एवं संस्कृति के लिए समर्पित हैं। हालांकि इस बार भी प्रशासन ने नाम भेजने में देरी कर दी है।   
1. प्रोफेसर एचएस हंस, एमिरेटस, फिजिक्स विभाग, पीयू
2. हरपाल सिंह सागू, 24 घंटे में बहुमंजिला बिल्डिंग तैयार करने का रिकार्ड बनाने वाले
3. डॉक्टर जगदीश जग्गी,  होमियोपैथिक
4. राजिंदर बग्गा, रामलीला में राम का किरदार निभाने वाले
5. हरिंदर पाल, कला एवं संस्कृति वर्ग में
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