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Chandigarh News: पिछले साल 50 से ज्यादा घरों में आई थीं दरारें, नहीं मिला मुआवजा

Fri, 14 Jun 2024 03:48 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 14 Jun 2024 03:48 AM IST
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Last year, cracks appeared in more than 50 houses, but no compensation was received
संवाद न्यूज एजेंसीसोनीपत। यमुना में पिछले वर्ष जुलाई में आई बाढ़ को मनौली टोंकी के ग्रामीण भुला नहीं पाए हैं। गांव मनौली टोंकी में 50 से ज्यादा घरों में आई दरार बाढ़ से हुई तबाही के निशान आज भी बयां कर रही है। तब हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो गई थी। बाढ़ की वजह से ठोकरें तक गायब हो गई थीं। लोगों ने घरों की मरम्मत के लिए आवेदन किए, लेकिन 11 माह बीत जाने के बावजूद मुआवजा तक नहीं मिल पाया है। गांव मनौली टोंकी व जाजल टोंकी यमुना क्षेत्र में बसे हुए हैं। इन गांवों में लोगों का व्यवसाय कृषि है। अब लोगों को डर सताने लगा है कि मानसून का सीजन नजदीक है, लेकिन अभी तक बाढ़ प्रबंधन कार्य शुरू नहीं हो पाए।
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यमुना क्षेत्र में बांध के अंदर जाजल टोंकी व मनौली टोंकी में 300 परिवार रहते हैं। यमुना किनारे बसा मनौली टोंकी गांव ऐसा है जो यमुना में बाढ़ आने पर खाली करा दिया जाता है। लोग अपने आशियाने छोड़कर बच्चों, पशुओं व अन्य जरूरी सामान को लेकर गांव से बाहर खेतों में बने कोठरे या बांध पर रात गुजारते हैं। वहीं पर खाने-पीने से लेकर दैनिक दिनचर्या चलती है। दो हिस्सों में बंटे मनौली टौकी गांव की अपनी पंचायत भी है। गांव का एक हिस्सा यमुना बांध पर है तो दूसरा हिस्सा बांध के अंदर की तरफ है। बांध के अंदर बसे गांव में 150 से अधिक मकान हैं। मानसून आने पर यमुना नदी में जलस्तर बढ़ने के साथ ही इन परिवारों की चिंता भी बढ़ जाती है।
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मानसून नजदीक आने पर ही प्रशासन को यमुना की याद आती है। मनौली टोंकी के ग्रामीणों का कहना था कि पिछले साल जुलाई में यमुना में आई बाढ़ की वजह से फसल नष्ट हो गई थी साथ ही घरों में रखा 100 परिवारों का अनाज खराब हो गया था। इसके बाद लोगों की सुविधा के लिए सरकार व प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली। लोगों को कर्ज लेकर अपनी परिवार का पालन पोषण करना पड़ रहा है।
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जाजल टोंकी के लोगों का कहना है कि उनका गांव यमुना क्षेत्र में करीब दो किलोमीटर अंदर एक टापू पर बसा हुआ है। बाढ़ के दौरान गांव के चारों तरफ पानी भर जाता है। ऐसे में लोगों को बाढ़ के बीच डर सताता रहता है। प्रशासन की ओर से पशुचारे के लिए व उनकी खाद्य सामग्री की जरूरत पूरा करने में मदद करने को नाव लगा दी जाती है, जिससे वह नाव में बैठकर आसपास के गांव में जाकर उन जरूरतों को पूरा करते हैं।

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यहां रहते हुए चार दशक हो गए। जब भी यमुना में पानी आता है तो सब कुछ तबाह नजर आता है। प्रशासन की ओर से उनके ठहरने के लिए टेंट तो खानापूर्ति के लिए लगा दिया जाता है। पशु धूप में खड़े रहते हैं। घरों में अंदर आई दरार को लेकर सरकार से कोई मदद नहीं मिल पाई। - सोमी निवासी मनौली टोंकी


पीड़ित लोगों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए न सरकार की ओर से मदद की जाती है और न ही प्रशासन की ओर से। जुलाई में आई बाढ़ के दौरान घर में रखा अनाज भी खराब हो गया था। हमें दुकान से अनाज खरीद कर प्रयोग करना पड़ा। जब भी बाढ़ का खतरा बढ़ता है तो उनकी मुश्किलें बढ़ती हैं।

- राहुल, पंच, मनौली टोंकी


हर साल यमुना में पानी आते ही यहां रहने वाले लोगों को गांव छोड़ना पड़ता है। हमारी मांग है कि सरकार ग्रामीणों को यमुना क्षेत्र से बाहर आवास उपलब्ध कराए।

रणबीर, निवासी गांव मनौली टोंकी


वर्ष 1978 में आई बाढ़ के दौरान घरों में पानी घुस गया था। इसके बाद यमुना में जलस्तर कई बार बढ़ा, लेकिन उनके घरों तक पानी नहीं पहुंचा है। यहां से गांव जाजल की तरफ जाने वाला ढाई किमी लंबा रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाता है। उनकी मदद के लिए प्रशासन की ओर से नाव लगा दी जाती है।


- रामबीर निवासी जाजल टोंकी


वर्जन

सोनीपत जिले में 42 किलोमीटर के दायरे में यमुना बहती है। यमुना किनारे करीब 40 हजार एकड़ में खेती होती है। जलस्तर उफान पर आता है तो फसलें नष्ट हो जाती हैं। यमुना के अंदर खराब होने वाली फसलों के लिए मुआवजा नहीं दिया जाता।

हरिओम अत्री, जिला राजस्व अधिकारी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, सोनीपत
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