2004 में GRP में भर्ती हुए सिपाहियों के लिए बुरी खबर
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हरियाणा में चौटाला सरकार के समय वर्ष 2004 में जीआरपी में भर्ती हुए 350 सिपाहियों की नौकरी पर संकट आ गया है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि चयनित सिपाहियों को 15 दिन का नोटिस जारी कर पूछा जाए कि उन्हें नौकरी से क्यों न निकाला जाए।
इस मामले में सरकार को 18 अगस्त को हाईकोर्ट में जवाब देना होगा। हरियाणा सरकार ने जून 2003 में जीआरपी में 350 सिपाहियों की भर्ती के लिए आवेदन मांग थे। वर्ष 2004 में चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र दिए गए थे, लेकिन एक उम्मीदवार शैलेंद्र को वेंटिग लिस्ट में दिखाकर नौकरी नहीं दी गई।
उसने भर्ती को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी और भर्ती में गड़बड़ी का आरोप लगा दिया। हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दे दिए। सीबीआई जाच के दौरान भर्ती में गड़बडी सामने आई थी। बावजूद इसके यह 350 सिपाही नौकरी कर रहे हैं।
मामले की हुई थी सीबीआई जांच
हाईकोर्ट ने 10 जनवरी 2008 को दिए फैसले मे कहा था कि सीबीआई की रिपोर्ट पर सरकार कानून के मुताबिक कार्रवाई करे। इसके साथ ही इस दौरान यदि चयनित उम्मीदवारों को नौकरी में रखना चाहे तो शैलेंद्र जैसे अन्य सभी याचियों को अधिकार है कि वे नौकरी पाने के लिए अपना दावा रखें।
सीबीआई ने जांच में तत्कालीन एसपी रवि आजाद और दो अन्य डीएसपी को दोषी ठहराया था। जांच के दौरान उन्होंने अपने बयान में कहा था कि उन्होंने उस सूची के मुताबिक भर्ती की, जो उन्हें तत्कालीन डीजीपी एमएस मलिक ने मुहैया कराई थी और असल सूची का रिकॉर्ड नष्ट करवा दिया था। इसके बाद तत्कालीन एसपी रवि आजाद की ज्यूडिशियल कस्टडी में मौत हो गई थी, जबकि अन्य दोनों आरोपी अभी जेल में ही है।
मुख्य सचिव से मांगा गया था जवाब
सीबीआई जांच में गड़बड़ी सामने आने के बावजूद कोई कार्रवाई न होने पर हाईकोर्ट ने आदेश की अवहेलना मानते हुए स्वत: संज्ञान लेकर हरियाणा के मुख्य सचिव से जवाब मांगा था।
हाईकोर्ट ने असंतोष जताते हुए सरकार पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था। अब हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस अजय तिवारी की डिवीजन बेंच ने कहा है कि भर्ती में गडबड़ी हुई है और मौजूदा उम्मीदवार नौकरी में नहीं बने रह सकते, लेकिन सरकार उन्हें नौकरी से हटाने से पहले पक्ष रखने के लिए मौका दे और इसके लिए 15 दिन का नोटिस जारी करे।