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लड़कियों की नाइट लाइफ को सुरक्षित बना रही हैं लेडी बाउंसर, घर पहुंचाने तक की जिम्मेदारी इन पर
Mon, 29 Jul 2019 11:45 AM IST
खुशबू गोयल
संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 29 Jul 2019 11:45 AM IST
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महिला बाउंसर
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ की नाइट लाइफ ट्राइसिटी ही नहीं देश भर में मशहूर है। चंडीगढ़ के साथ पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के युवा हर रोज यहां के क्लबों और होटल्स में पार्टी करने पहुंचते हैं। इनमें युवकों के साथ युवतियों की संख्या भी अच्छी खासी होती है। ऐसे में क्लब और होटल्स में देर रात तक इन युवतियों की सुरक्षा एक बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है, जिसे सिटी की महिला बाउंसर बखूबी निभा रही हैं।
पब और क्लबों के बाहर यह महिला बाउंसर पुरुष बाउंसर के साथ पूरी मुस्तैदी के साथ खड़ी रहती हैं। देर रात लड़कियों से छेड़छाड़ के मामले न हों या कोई उनसे अभद्रता न करे, इससे निपटने के लिए महिला बाउंसर पूरी तरह मुस्तैद रहती हैं। झगड़े निपटाने के साथ, ये लेडी बाउंसर देर रात लड़कियों को सुरक्षित घर पहुंचाने की जिम्मेदारी भी निभाती हैं। आइए, मिलते हैं कुछ ऐसी ही महिला बाउंसरों से, जो क्लब-पब में अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं।
मजबूती को बनाई पहचान तो धैर्य भी कमाल का
कई बार झगड़ों में लोग महिला बाउंसर से भी काफी गलत शब्दों का प्रयोग करते हैं। ऐसे में महिला बाउंसर अपनी शक्ति के साथ ही धैर्य का भी परिचय देतीं हैं। अपने आत्मसम्मान को बनाए रखते हुए नियमानुसार ही लोगों को क्लब से बाहर का रास्ता दिखातीं हैं। कुछ महिला बाउंसर का कहना है कि लोग उनके पेशे को काफी गलत नजर से भी देखते हैं, लेकिन अपने काम के प्रति उन्हें कभी कोई शिकवा नहीं रहा। हालांकि अपनी पेमेंट को लेकर उन्हें अक्सर निराश ही होना पड़ता है। उनका कहना है कि जिस हिसाब से वह मेहनत करतीं हैं उसके अनुसार उन्हें पेमेंट नहीं मिलता।
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पब और क्लबों के बाहर यह महिला बाउंसर पुरुष बाउंसर के साथ पूरी मुस्तैदी के साथ खड़ी रहती हैं। देर रात लड़कियों से छेड़छाड़ के मामले न हों या कोई उनसे अभद्रता न करे, इससे निपटने के लिए महिला बाउंसर पूरी तरह मुस्तैद रहती हैं। झगड़े निपटाने के साथ, ये लेडी बाउंसर देर रात लड़कियों को सुरक्षित घर पहुंचाने की जिम्मेदारी भी निभाती हैं। आइए, मिलते हैं कुछ ऐसी ही महिला बाउंसरों से, जो क्लब-पब में अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं।
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मजबूती को बनाई पहचान तो धैर्य भी कमाल का
कई बार झगड़ों में लोग महिला बाउंसर से भी काफी गलत शब्दों का प्रयोग करते हैं। ऐसे में महिला बाउंसर अपनी शक्ति के साथ ही धैर्य का भी परिचय देतीं हैं। अपने आत्मसम्मान को बनाए रखते हुए नियमानुसार ही लोगों को क्लब से बाहर का रास्ता दिखातीं हैं। कुछ महिला बाउंसर का कहना है कि लोग उनके पेशे को काफी गलत नजर से भी देखते हैं, लेकिन अपने काम के प्रति उन्हें कभी कोई शिकवा नहीं रहा। हालांकि अपनी पेमेंट को लेकर उन्हें अक्सर निराश ही होना पड़ता है। उनका कहना है कि जिस हिसाब से वह मेहनत करतीं हैं उसके अनुसार उन्हें पेमेंट नहीं मिलता।
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रूपाली: सेक्टर-56 में रहती हैं और पिछले दस सालों से लेडी बाउंसर का काम कर रही हैं। उनके परिवार में कोई और कमाने वाला कोई नहीं है। एक बेटा है जो पांचवीं कक्षा में पढ़ता है। रूपाली इंडस्ट्रियल एरिया के बार में बाउंसर के रूप में काम करती है। बाउंसर का काम करने से पहले वह चंडीगढ़ के विभिन्न भंगड़ा ग्रुप में बतौर डांसर का काम करती थीं। इसके बाद उन्होंने बाउंसर का काम शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि एक दिन जब वह अपने भाइयों के साथ एक पब में गईं थीं तो वहां पर लड़ाई हो गई। उस समय वह भी अपने भाइयों की मदद करते हुए लड़ाई करने वालों से भिड़ गईं। मेरी बहादुरी को देखते हुए वहां के बाउंसर ग्रुप के मालिक ने मेरी प्रशंसा की और मुझे लेडी बाउंसर के तौर पर काम करने के कहा। उनकी बात मानते हुए आज लेडी बाउंसर का काम रही हूं।
अलका: चंडीगढ़ के बहलाना की रहने वाली हैं। पिछले 9 सालों से लेडी बाउंसर का काम करती आ रही हैं। इस दौरान कई शहर के कई नामी क्लब और पब में नौकरी कर चुकी हैं। जिस क्लब में भी काम मिलता है, उसमें नाइट में काम करती हैं। अलका ने बताया कि मेरे परिवार में मेरे अलावा दो बेटे हैं जो 10वीं और 8वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार का पूरा बोझ मेरे ऊपर ही है। इससे पहले मैं एलांते माल और कई अन्य जगहों पर सिक्योरिटी मेंबर के तौर पर काम कर चुकी हूं। अब नाइट क्लब में लेडी बाउंसर का काम रही हूं। अलका ने बताया कि बाउंसर का काम कठिन रहता है। इसमें कई दिक्कतें भी आती हैं। देर तक घर जाना होता है।
अलका: चंडीगढ़ के बहलाना की रहने वाली हैं। पिछले 9 सालों से लेडी बाउंसर का काम करती आ रही हैं। इस दौरान कई शहर के कई नामी क्लब और पब में नौकरी कर चुकी हैं। जिस क्लब में भी काम मिलता है, उसमें नाइट में काम करती हैं। अलका ने बताया कि मेरे परिवार में मेरे अलावा दो बेटे हैं जो 10वीं और 8वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार का पूरा बोझ मेरे ऊपर ही है। इससे पहले मैं एलांते माल और कई अन्य जगहों पर सिक्योरिटी मेंबर के तौर पर काम कर चुकी हूं। अब नाइट क्लब में लेडी बाउंसर का काम रही हूं। अलका ने बताया कि बाउंसर का काम कठिन रहता है। इसमें कई दिक्कतें भी आती हैं। देर तक घर जाना होता है।
रेखा: बलटाना (जीरकपुर) में रहती हैं। पिछले तीन साल से लेडी बाउंसर का काम कर रही हैं। सिंगल मदर हैं और उनका 8 साल का एक बेटा है जो पांचवीं कक्षा में पढ़ रहा है। शुरू में सिक्योरिटी में थीं लेकिन इससे परिवार का पालन पोषण नहीं हो पाता था। इसके बाद उनकी एक सहेली ने लेडी बाउंसर बनने की सलाह दी। रेखा ने बताया कि शुरू में जब मैंने यह नौकरी शुरू की तो काफी अजीब लगता था। क्लबों के बाहर अलग-अलग तरह के लोग आते थे। कई बार बहस भी हो जाती थी। मन में आता था कि इस नौकरी को छोड़ दूं लेकिन साथी बाउंसरों ने हौसला बढ़ाया और इसके बाद अब मजबूती से काम करने में जुट गई।
शमा: सारंगपुर में रहती हैं। वर्ष 2009 से लेडी बाउंसर का काम से जुड़ी हुई हैं। पहले प्राइवेट जॉब करती थीं, कुछ समय बाद जब नौकरी छूट गई तो किसी की सलाह पर लेडी बाउंसर का काम करने लगीं। अक्सर रात के समय लड़ाई झगड़े होते रहते हैं। इन सब से निपटना एक बाउंसर के लिए काफी चुनौतीपूर्ण है। खासकर महिला बाउंसर के लिए। कई बार को किसी को समझाते समय वह लोग, हमसे ही उलझ जाते हैं। हमें ऐसे माहौल से निपटने के लिए ट्रेनिंग दी जाती है। शमा यह भी कहती हैं कि इस नौकरी में पैसे कम मिलते हैं। हम लोगों की सुरक्षा करते हैं लेकिन नौकरी में हमारी में हमारी सुरक्षा नही हैं।
शमा: सारंगपुर में रहती हैं। वर्ष 2009 से लेडी बाउंसर का काम से जुड़ी हुई हैं। पहले प्राइवेट जॉब करती थीं, कुछ समय बाद जब नौकरी छूट गई तो किसी की सलाह पर लेडी बाउंसर का काम करने लगीं। अक्सर रात के समय लड़ाई झगड़े होते रहते हैं। इन सब से निपटना एक बाउंसर के लिए काफी चुनौतीपूर्ण है। खासकर महिला बाउंसर के लिए। कई बार को किसी को समझाते समय वह लोग, हमसे ही उलझ जाते हैं। हमें ऐसे माहौल से निपटने के लिए ट्रेनिंग दी जाती है। शमा यह भी कहती हैं कि इस नौकरी में पैसे कम मिलते हैं। हम लोगों की सुरक्षा करते हैं लेकिन नौकरी में हमारी में हमारी सुरक्षा नही हैं।