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जीएमसीएच 32: यहां जुगाड़ से हो रहा इलाज, स्ट्रेचर को बना दिया बेड और पिलर बना ड्रिप स्टैंड
Wed, 25 Dec 2019 11:01 AM IST
खुशबू गोयल
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 25 Dec 2019 11:01 AM IST
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स्ट्रेचर बना बेड, पिलर बना ड्रिप स्टैंड
- फोटो : अमर उजाला
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जीएमसीएच-32 (मेडिकल कॉलेज) चंडीगढ़ में जुगाड़ के भरोसे मरीजों का इलाज किया जा रहा है। सुविधाएं कम हैं और मरीजों का संख्या ज्यादा है। इमरजेंसी मेडिसिन और सर्जरी वार्ड के पूरी तरह से भरे होने के कारण मरीजों को गलियारे में स्ट्रेचर पर लेटाकर जुगाड़ से उनका इलाज किया जा रहा है।
स्थिति यह है कि गलियारे में स्ट्रेचर पर भर्ती मरीजों की लंबी कतार लगी हुई है। यहां मरीजों को ड्रिप लगाने के लिए स्टैंड तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गलियारे में पिलर पर ड्रिप हैंगर लगाकर और यहां से गुजरने वाली वायर पर बोतल लटकाकर मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
इमरजेंसी की गैलरी में स्ट्रेचर पर लेटे बलटाना निवासी मरीज मंजीत का कहना है कि गिरने से उनके पैर में फ्रैक्चर आ गया, जिसके इलाज के लिए वह यहां आए लेकिन यहां उन्हें बेड तक नहीं मिला। स्ट्रेचर पर लेटते समय डर लगता है कि कहीं गिर गया तो दूसरा पैर भी न टूट जाए।
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वहीं, अपने मरीज को डिस्चार्ज कराकर घर लौट रहे पंजाब के संदीप पाल ने बताया कि चार दिनों तक उनके मरीज को यहां स्ट्रेचर पर रखा गया। एनएस चढ़ाने के लिए स्टैंड नहीं मिला तो पिलर पर लगे हैंगर से बोतल लटकाकर इलाज कराया। संदीप का कहना है कि यहां के डॉक्टर और स्टाफ तो मानक से दोगुना काम कर रहे हैं लेकिन व्यवस्था में खामी है।
स्ट्रेचर पर भर्ती लगभग 90 प्रतिशत मरीज अस्पताल की बजाय अपने घर से कंबल मंगाकर ठंड से बचाव कर रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि भर्ती करते समय फीस जमा करने में कोई देरी हो जाए तो कोई सुनवाई नहीं होती, लेकिन इस ठंड में बेड तो छोड़िए मरीजों को कंबल तक नहीं दिया जा रहा है।
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स्थिति यह है कि गलियारे में स्ट्रेचर पर भर्ती मरीजों की लंबी कतार लगी हुई है। यहां मरीजों को ड्रिप लगाने के लिए स्टैंड तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गलियारे में पिलर पर ड्रिप हैंगर लगाकर और यहां से गुजरने वाली वायर पर बोतल लटकाकर मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
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इमरजेंसी की गैलरी में स्ट्रेचर पर लेटे बलटाना निवासी मरीज मंजीत का कहना है कि गिरने से उनके पैर में फ्रैक्चर आ गया, जिसके इलाज के लिए वह यहां आए लेकिन यहां उन्हें बेड तक नहीं मिला। स्ट्रेचर पर लेटते समय डर लगता है कि कहीं गिर गया तो दूसरा पैर भी न टूट जाए।
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वहीं, अपने मरीज को डिस्चार्ज कराकर घर लौट रहे पंजाब के संदीप पाल ने बताया कि चार दिनों तक उनके मरीज को यहां स्ट्रेचर पर रखा गया। एनएस चढ़ाने के लिए स्टैंड नहीं मिला तो पिलर पर लगे हैंगर से बोतल लटकाकर इलाज कराया। संदीप का कहना है कि यहां के डॉक्टर और स्टाफ तो मानक से दोगुना काम कर रहे हैं लेकिन व्यवस्था में खामी है।
स्ट्रेचर पर भर्ती लगभग 90 प्रतिशत मरीज अस्पताल की बजाय अपने घर से कंबल मंगाकर ठंड से बचाव कर रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि भर्ती करते समय फीस जमा करने में कोई देरी हो जाए तो कोई सुनवाई नहीं होती, लेकिन इस ठंड में बेड तो छोड़िए मरीजों को कंबल तक नहीं दिया जा रहा है।
हमारा प्रयास सबको मिले इलाज
इस संबंध में मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. रवि गुप्ता का कहना है कि जीएमसीएच में चंडीगढ़ के अलावा आसपास के दूसरों शहरों से आने वाले रेफर मरीजों का लोड बहुत ज्यादा है। बेड की कमी के बावजूद सभी मरीजों को इलाज देने का प्रयास रहता है।
स्ट्रेचर पर भर्ती मरीजों को वार्ड में बेड खाली होते ही शिफ्ट कर दिया जाता है लेकिन यहां इमरजेंसी में महज 36 बेड हैं, जबकि भर्ती मरीजों की संख्या 200 से ज्यादा होती है इसलिए सभी सुविधाएं मुहैया कराना संभव नहीं।
जहां तक कंबल न मिलने की बात है तो ऐसे मरीज या उनके परिजन को अस्पताल प्रशासन से तत्काल इसकी शिकायत करनी चाहिए। क्योंकि सूचना मिलने पर जरूरतमंद परिजनों को भी अस्पताल प्रशासन कंबल उपलब्ध कराता है।
स्ट्रेचर पर भर्ती मरीजों को वार्ड में बेड खाली होते ही शिफ्ट कर दिया जाता है लेकिन यहां इमरजेंसी में महज 36 बेड हैं, जबकि भर्ती मरीजों की संख्या 200 से ज्यादा होती है इसलिए सभी सुविधाएं मुहैया कराना संभव नहीं।
जहां तक कंबल न मिलने की बात है तो ऐसे मरीज या उनके परिजन को अस्पताल प्रशासन से तत्काल इसकी शिकायत करनी चाहिए। क्योंकि सूचना मिलने पर जरूरतमंद परिजनों को भी अस्पताल प्रशासन कंबल उपलब्ध कराता है।