पंजाब की सीटें दिलाएंगे यूपी-बिहार के वोट
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पंजाब में लोकसभा की 13 सीटों के लिए 30 अप्रैल को होने जा रहे मतदान के लिए सोमवार शाम प्रचार बंद हो गया। अब आखिरी दो दिनों में सभी राजनीतिक पार्टियां अपना हिसाब किताब लगाकर अपने वोट बैंक को सुनिश्चित करने की रणनीति बनाने में व्यस्त हो जाएंगी। यही वक्त होगा जब सभी पार्टियों की नजर पंजाब में बड़ी संख्या में पक्के तौर पर बस चुके लाखों प्रवासी मजदूरों पर रहेगी। पंजाब में लगभग 10 से 12 लाख के बीच उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से आए मजदूर स्थायी तौर पर रह रहे हैं।
समझा जाता है कि इनमें से लगभग छह लाख प्रवासी केवल लुधियाना जिले में ही हैं। 2001 की जनगणना के अनुसार लुधियाना शहर मे 4.10 लाख और देहात में 1.5 लाख प्रवासी कामगार रहते हैं, जिनमें से 25.6 प्रतिशत उत्तर प्रदेश, 15.6 प्रतिशत बिहार और लगभग 6 प्रतिशत हरियाणा और हिमाचल से हैं।
अमृतसर में दो लाख प्रवासी
अमृतसर में एक अनुमान के अनुसार लगभग दो लाख प्रवासी बसे हैं। इनमें से एक लाख लोग पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश से हैं। यह समझा जाता है कि इनमें से 60 से 70 प्रतिशत प्रवासी वोटर हैं।
बाकी प्रवासी मज़दूर दूसरे जिलों या फिर देहात में बसे हैं। इनमें से लगभग 50 प्रतिशत प्रवासी लोग पंजाब में वोट का हक़ रखते हैं। वैसे पंजाब में कुल जनसंख्या का दो प्रतिशत मुस्लिम और 1.2 प्रतिशत ईसाई हैं। जबकि हिंदू जनसंख्या 34 प्रतिशत और सिख समुदाय 63.60 प्रतिशत है।
प्रवासी मजदूरों के वोट अहम
समझा जा रहा है कि शिरोमणि अकाली दल और भाजपा यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रवासी मजदूर बड़ी संख्या में उन्हीं को वोट डालेंगे। पंजाब में सत्ताधारी दल के खिलाफ असंतोष के चलते अकाली दल और भाजपा आकलन कर रहे हैं कि प्रवासी मजदूरों के वोट उनके लिए संकटमोचक का काम करेंगे।
भाजपा प्रवासी मज़दूरों तक नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने की अपील के साथ पहुंच रही है। चुनावी प्रचार के दौरान उत्तर प्रदेश और बिहार से दिग्गज नेता पंजाब आए, जिनमें राम बिलास पासवान शामिल हैं। मुख्य शहरों में प्रवासी लोगों के संगठन बने हुए हैं, जिनको लुभाने के लिए बड़े स्तर पर कोशिशें की जा रही हैं।
मोदी के नाम पर प्रवासी वोट
समझा जा रहा है कि दूसरे राज्यों के प्रवासी मजदूर लुधियाना और अमृतसर सीटों पर नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। खासकर अमृतसर जहां भाजपा के दिग्गज नेता अरुण जेटली अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के वोटर अहम भूमिका रखते हैं। यह मानकर चला जा रहा है कि अमृतसर में मोदी के नाम पर प्रवासी वोट मिल जाएंगे। जेटली का मुकाबला पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से है और कांग्रेस भी प्रवासी मजदूरों को लुभाने में लगी है।
प्रवासी वोटरों के अलावा मुस्लिम और ईसाई वोटर भी संगरूर और गुरदासपुर की सीटों को प्रभावित करेंगे। मुस्लिम समुदाय संगरूर जिले के मालेरकोटला और गुरदासपुर के कादियां कस्बों में बसा है और ईसाई मुख्य रूप से गुरदासपुर के धारीवाल ब्लॉक में बसे हैं।
इनके दम पर जीते थे मनीष तिवारी
लुधियाना से 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के मनीष तिवारी ने प्रवासी वोटरों के दम पर ही जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार वे न तो चुनाव लड़ रहे हैं और न ही चुनाव प्रचार में सक्रिय हैं।
गुरदासपुर में मुकाबला पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा और भाजपा के उम्मीदवार फिल्म स्टार विनोद खन्ना में है। शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि प्रवासी मजदूरों के नेता अकाली दल में शामिल हैं और उन्हें उचित पद भी दिए गए हैं। प्रवासी मजदूर पंजाब की अर्थव्यवस्था और उन्नति में हमेशा योगदान देते आए हैं। उधर, लुधियाना में प्रवासी मजदूर जो ज्यादातर फैक्टरियों में काम करते हैं, शिअद और कांग्रेस के पक्ष में बंटे हुए हैं।