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Hindi News ›   Chandigarh ›   Know the way of Election Publicity 37 Years Ago

पढ़ें, 37 साल पहले कैसे होता था चुनाव प्रचार?

Wed, 17 Sep 2014 01:51 PM IST
डीडी गोयल/अमर उजाला, डबवाली (सिरसा)
डीडी गोयल/अमर उजाला, डबवाली (सिरसा) Updated Wed, 17 Sep 2014 01:51 PM IST
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Know the way of Election Publicity 37 Years Ago

फेसबुक, ट्विटर, वाट्स एप ने इस बार विधानसभा चुनाव को हाईटेक बना दिया है। इससे पहले भी चुनाव होते थे। प्रचार होता था, लेकिन कैसे? क्या ढंग था? क्या मुद्दे होते थे? टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर रही युवा पीढ़ी उस जमाने को सोशल मीडिया के जरिये बता रही है।

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युवा पीढ़ी में सबसे लोकप्रिय नेता हैं देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री स्व. देवीलाल। जिनके चुनाव प्रचार के दौरान की तस्वीरें लगातार वायरल हो रही हैं।

देवीलाल ने किसी भी कार्यक्रम या सभा के लिए कोई समय दे दिया गया तो वह कार्यक्रम कभी रद नहीं हुआ। साथ ही वे कभी भी किसी जनसभा में देरी से नहीं पहुंचे।

देवीलाल के प्रचार तंत्र से जुड़े गांव अबूबशहर निवासी बलराम जाखड़ का कहना है कि वे 1977 में देवीलाल के संपर्क में आए थे। देवीलाल के प्रचार करने की अपनी ही एक शैली थी। उनके आने का संदेश कई दिन पहले पहुंच जाता था।
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उस समय संचार के संसाधन न होने के कारण बस के जरिये पार्टी कार्यकर्ता हलका प्रधान तक संदेश पहुंचाते थे। संचार के साथ-साथ यातायात संसाधन न के बराबर होने पर वे मात्र एक ही वाहन पर कई-कई गांव घूमते थे।

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सादगी की मिसाल थे देवीलाल

Know the way of Election Publicity 37 Years Ago

जाखड़ के अनुसार गांव लोहगढ़ निवासी गुरबचन की जीप आज भी याद है। दिन में गुरबचन की जीप पर स्पीकर बांध वे गांव-गांव जाकर मुनादी करते थे।

रात को दीवारों पर पार्टी के नारे लिखते थे। देवीलाल अपनी एंबेसडर कार में प्रचार करने के लिए आते थे। आगे उनकी मुनादी वाली जीप।

जाखड़ के अनुसार देवीलाल ने अपना पूरा जीवन सादगी से व्यतीत किया। प्रचार के समय उनकी सादगी साफ झलकती थी। भूख लगने पर वे लोगों के बीच ही खाना मंगवा लेते थे।

काचर की चटनी, कद्दू तथा मतीरे (तरबूज) की सब्जी उन्हें बेहद पसंद थी। देवीलाल एक दिन में करीब 20 से 25 गांवों में चुनावी रैलियां कर लेते थे। उनके सिवाय रैली को कोई संबोधित नहीं करता था।

इसका उद्देश्य यही था कि जनता का समय बर्बाद न हो। जाखड़ के अनुसार 1987 में चौ. देवीलाल ने संत लौंगोवाल समझौते के खिलाफ नारा दिया था कि कांग्रेस एक धोखा है, धक्का मारो मौका है। जिसके बाद कांग्रेस के खिलाफ विरोधी लहर उठ खड़ी हुई थी।

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