जगह-जगह खुले पीजी, गलियां बेहद सकरीं, सवाल, अगर हादसा हो जाए तो कैसे पहुंचेगी सहायत
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पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर से बड़ी तादात में युवा ट्राइसिटी में एजुकेशन के साथ-साथ जॉब के लिए आते हैं। घर जैसा माहौल पाने के लिए इन्हें तलाश रहती है एक पीजी की। लंबे समय से ट्राइसिटी के ये पीजी सवालों के घेरे में हैं। शनिवार को चंडीगढ़ में हुए आगजनी के हादसे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
बात मोहाली की करें तो शहरीकरण के चलते नगर निगम के तहत आ चुके गांवों में पीजी की भरमार है। खस्ताहाल तंग सड़कों और संकरी गलियों में बने इन पीजी में अगर कोई अनहोनी होती है तो फायर ब्रिगेड और राहत एवं बचाव टीम का घटनास्थल तक पहुंचना ही दूभर होगा। ऐसे में इन गांवों में बने पीजी लोगों के लिए जानलेवा साबित होंगे।
यूं तो गमाडा ने पीजी के लिए गाइडलाइन बनाई हुई है लेकिन इन गाइडलाइन का पालन न के बराबर है। वीआईपी सिटी के अधिकांश पीजी शाहीमाजरा, मदनपुर, मटौर, कुंभड़ा, सोहाना और मोहाली गांव में हैं। यह गांव शहरीकरण के चलते अब नगर निगम के तहत आते हैं। यहां पर बनी अधिकांश इमारतों में बिल्डिंग बॉयलॉज को ताक पर रख कर निर्माण किया गया है।
ऐसे में गमाडा की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों में नाराजगी है। गमाडा के अधिकारियों का कहना है कि वो रेगलुर बेस पर अनाधिकृत पीजी को नोटिस जारी कर रहे हैं लेकिन कितने नोटिस दिए गए इसके बारे में गमाडा बता पाने में असमर्थ है। शनिवार को चंडीगढ़ में हुई घटना के बाद अब गमाडा सोमवार को एक मीटिंग करने जा रहा है। इसका मुख्य मुद्दा पीजी रहेगा। हालांकि गमाडा इससे पहले भी पीजी को लेकर कार्रवाई के कई दावे कर चुका है। इसके बावजूद अभी तक गमाडा ने किसी भी अनाधिकृत पीजी को सील नहीं किया है।
गमाडा को कार्रवाई के लिए कहेंगे
मोहाली में भी पीजी को लेकर स्थिति संतोषजनक नहीं है। गमाडा इस ओर पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है। लोगों की जिंदगी दांव पर है और प्रशासन गहरी नींद में सो रहा है। शहर में कुकुरमुत्ते की तरह पनप रहे पीजी असामाजिक तत्वों का अड्डा बनते जा रहे हैं। गमाडा ही नहीं पुलिस भी पीजी और उसमें रहने वालों की वेरिफिकेशन को लेकर गंभीर नहीं है। लोगों ने रोजगार के लिए पीजी शुरू किए हैं, जिससे यहां आने वालों को भी सुविधा होती है। प्रशासन को चाहिए कि इन पीजी को रेगुलर करने में मदद करे और लोगों को जागरूक करे। - पार्षद बॉबी कंबोज
गाइड लाइन फॉलो करवाने में गमाडा फेल
जब भी कोई हादसा होता है तो शहरों में चर्चा शुरू होती है। प्रशासन लीपापोती कर फिर से चुप बैठ जाता है। पीजी लोगों की सुविधा के लिए हैं। इसके लिए गमाडा ने गाइड लाइन बनाई है, तो फिर अपनी ही गाइड लाइन को गमाडा फॉलो क्यों नहीं करवा पा रहा। अगर लोगों की जिंदगी खतरे में है, तो इसके लिए गमाडा, प्रशासन व पुलिस जिम्मेदार है। पुलिस को भी चाहिए की रेगुलर चेकिंग हो। जब किसी असामाजिक तत्व के तार पीजी से जुड़े मिलते हैं तो पुलिस हरकत में आती है और फिर शांत बैठ जाती है। - पार्षद कुलजीत बेदी
चंडीगढ़ की घटना से सबक ले गमाडा
लोग आमदनी के लिए पीजी खोलते हैं, यह उनका अधिकार है। गमाडा को चाहिए की पीजी की रजिस्ट्रेशन के लिए अभियान चलाए। इस बारे में गमाडा से कई बार कहा जा चुका है। पार्षदों ने सुझाव दिया था कि गमाडा के अधिकारी हर वार्ड में सार्वजनिक स्थानों पर कैंप लगा कर यह काम करें। अगर कोई पीजी को रोजगार के तौर पर शुरू करना चाहता है तो उसकी मदद की जानी चाहिए। गमाडा को कई शिकायतें देने के बाद भी आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। गमाडा को चंडीगढ़ की घटना से सबक लेना चाहिए। - पार्षद अरुण शर्मा
वेरिफिकेशन पर न पुलिस और न प्रशासन का ध्यान
गमाडा पूरी तरह सफेद हाथी साबित हो रहा है। पीजी को लेकर गाइड लाइन निर्धारित हैं, बिल्डिंग बायलॉज है। इसके बावजूद गमाडा इनको क्रियान्वित नहीं करवा पा रहा। कई बार मोहाली के पीजी से आपराधिक लोग पकड़े जा चुके हैं। ऐसे कई मामले हुए हैं जिनमें लूट, चोरी, स्नैचिंग व नशे के तार पीजी में रहने वालों से जुड़े। इसके बावजूद इनकी वेरिफिकेशन पर न तो पुलिस ही ध्यान दे रही है और न ही प्रशासन। गमाडा तो लगातार शिकायतें देने के बाद भी कार्रवाई नहीं करता। - पार्षद सहबी आनंद