ज्वैलरी खरीदने के नए नियम जानेंगे तो चौंक जाएंगे
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एक लाख से ज्यादा की ज्वेलरी खरीदने के लिए पैन कार्ड शो करने की पॉलिसी का ज्वेलरों ने विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि नए नियम से ज्वेलरों का धंधा चौपट हो जाएगा, जबकि आम लोगों के लिए भी यह पॉलिसी जी का जंजाल बन जाएगी। इसलिए केंद्र सरकार को नया नियम वापस लेना चाहिए।
चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में ऑल इंडिया जेम्स और ज्वेलरी ट्रेड फेडरेशन (जीजेएफ) के क्षेत्रीय निदेशक अनिल तलवार ने कहा कि नए नियम से काले धन पर लगाम तो नहीं लगेगा, बल्कि स्मगलिंग बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि देश में सिर्फ 14 करोड़ पैन कार्ड हैं और आज भी 89 फीसदी लोगों के पास पैन कार्ड नहीं है।
कोई व्यक्ति एक हार भी खरीदता है तो उसकी कीमत एक लाख से ज्यादा होती है। अभी पांच लाख से ज्यादा की ज्वेलरी खरीदने पर पैन कार्ड लिया जा रहा है, जो सही है। इसलिए नई पॉलिसी को वापस लेना चाहिए।
ग्रामीण खरीदारों से नाइंसाफी होगी
जीजेएफ के चेयरमैन हरेश सोनी ने कहा कि पैन कार्ड की अनिवार्यता से आभूषण की खरीदारी करने वाले हजारों ग्राहक हतोत्साहित होंगे, क्योंकि उनके पास यह कार्ड नहीं है। इनमें ज्यादातर ग्रामीण भारत में कृषि व निजी व्यवसाय करने वाले लोग शामिल हैं।
ज्वेलरों ने दो लाख से पांच लाख रुपये की ज्वेलरी की खरीद पर टीसीएस को लागू कर रखा है। अब एक लाख रुपये से अधिक की नगद बिक्री पर पैन कार्ड के नए नियम को जोड़ने के नए प्रस्ताव से 70 प्रतिशत ग्रामीण खरीदारों के साथ नाइंसाफी होगी।
...फिर बिल से करने लगेंगे तौबा
ज्वेलरों ने कहा कि पैन कार्ड के नियम से गोल्ड मार्केट में बिल नहीं काटने की परंपरा की शुरुआत हो जाएगी। इससे सरकार और बड़े ज्वेलरी घरानों को भी नुकसान हो सकता है। इससे गड़बड़ी ज्यादा बढ़ेगी।
देशभर में आयात हुआ सोना
वर्ष 2012-13 972 टन
वर्ष 2013-14 511.41 टन
वर्ष 2014-15 760.78 टन
300 टन सोने की स्मगलिंग:
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, 2013-14 में देश में 200 से 300 टन सोने की स्मगलिंग की गई। ऐसा नियमित रूप से हो रहा है। नए नियम से यह ग्राफ और बढ़ सकता है।