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Bhai Dooj 2022: भैया दूज आज, पूर्व दिशा में भाई का मुंह कर करें टीका, 50 साल बाद बन रहा खास संयोग
Wed, 26 Oct 2022 01:16 AM IST
ajay kumar
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Wed, 26 Oct 2022 01:16 AM IST
सार
श्री देवालय पूजक परिषद के प्रधान और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि 26 अक्तूबर को 12 बजकर 45 मिनट पर द्वितीया समाप्त होगी इसलिए यह पर्व 26 अक्तूबर को ही मनाया जाएगा।
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Bhai Dooj 2022
- फोटो : iStock
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विस्तार
सूर्य ग्रहण के बाद पहला पर्व भैया दूज का बुधवार को है। ऐसा संयोग 50 वर्ष के बाद आ रहा है। चंडीगढ़ के सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि इस साल 26 व 27 अक्तूबर को दो दिन द्वितीया विद्यमान है। 26 अक्तूबर को अपराह्न काल एक बजे से दोपहर बाद तीन बजकर 24 मिनट तक रहेगा इसलिए 26 अक्तूबर को ही भैया दूज का त्योहार मनाया जाएगा। भाई का मुंह पूर्व की ओर करके ही बहन टीका करें। यह शुभ रहेगा।
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शुभ मुहूर्त
श्री देवालय पूजक परिषद के प्रधान और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि 26 अक्तूबर को 12 बजकर 45 मिनट पर द्वितीया समाप्त होगी इसलिए यह पर्व 26 अक्तूबर को ही मनाया जाएगा। पंजाब में सूर्योदय काल से ही इस पर्व को मनाने की परंपरा है इसलिए 10 बजकर 21 मिनट से लेकर 12 बजकर एक मिनट तक शुभ की चौघड़िया है। इसमें भाई को टीका कर भोजन कराना शुभ रहेगा।
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सूर्य ग्रहण: बंद रहे मंदिरों के कपाट
सूर्य ग्रहण के चलते लगे सूतक से मंदिर के कपाट बंद रहे। सोमवार रात मंदिर बंद होने के बाद मंगलवार सुबह मंदिर के कपाट नहीं खुले। इसके कारण कार्तिक महात्म्य की कथा भी नहीं हो सकी। ऐसा पहली बार हुआ है। सेक्टर 30 के शिव शक्ति मंदिर के प्रधान यादविंदर मेहता ने बताया कि सूर्य ग्रहण के कारण मंदिर के कपाट बंद रहे।
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सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर में पुजारियों की ओर से लोक कल्याण के लिए आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ किया गया। सेक्टर-29 स्थित साईं मंदिर में भी दोपहर बाद दो बजे से कपाट बंद कर दिए। शाम साढ़े छह बजे बाबा का मंगल स्नान हुआ। इसके बाद धूप आरती हुई। शहर के मंदिरों के कपाट शाम साढ़े छह बजे खुले। उसके बाद भगवान की आरती हुई। वहीं सेक्टर-36 स्थित इस्कॉन मंदिर में भक्त दर्शन करते रहे।