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आंदोलन में जुटे किसानों के मोबाइल में आ रहीं कंप्यूटरीकृत कॉल्स, कृषि कानून के बताए जा रहे फायदे

Thu, 07 Jan 2021 02:13 AM IST
ajay kumar अंकित चौहान, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
अंकित चौहान, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Thu, 07 Jan 2021 02:13 AM IST
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Kisan Andolan: Farmers Received Computerized calls In favor of Farm Laws At Kundli Border
किसान आंदोलन। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

किसानों व सरकार के बीच जहां लगातार कृषि कानूनों व एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) के संबंध में बातचीत हो रही है। वहीं किसान नेताओं का आरोप है कि आंदोलन में फूट डालने की कोशिशें भी शुरू हो गई हैं। किसान संगठन के नेताओं को आगे आकर एकजुटता पर जोर देना पड़ रहा है।

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नेताओं का कहना है कि किसानों के पास कंप्यूटरीकृत कॉल पहुंच रही है, जिसमें कृषि कानूनों के फायदेमंद बताकर आंदोलन को गलत साबित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें किसान नेताओं को अब सरकार के साथ खड़ा बताकर बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। किसी को इस तरह की बातों पर ध्यान नहीं देना है और आंदोलन को ऐसे ही मजबूत बनाए रखना है। 
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कृषि कानून रद्द कराने की मांग को लेकर नेशनल हाईवे 44 के कुंडली बॉर्डर पर किसान सर्दी व बारिश में डटे हैं। सरकार व किसानों के बीच लगातार बातचीत हो रही है लेकिन बावजूद इसके कोई फैसला अभी तक नहीं हो सका है।
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वहीं अब जिस तरह से किसानों के मोबाइल पर कॉल आ रही हैं और किसान नेताओं को लेकर प्रचार किया जा रहा है, उससे किसान नेताओं को लगने लगा है कि सरकार अब किसानों को झुकता नहीं देखकर फूट डालकर आंदोलन को तोड़ने में लगी है। बुधवार को किसान नेताओं ने पूरा दिन यह संशय दूर किया कि कोई किसान नेता सरकार के साथ नहीं खड़ा है और सभी किसान संगठन एकजुट होकर कानून रद्द कराने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

कानूनों के खिलाफ व आंदोलन के समर्थन में अब तक करीब दो लाख ऑनलाइन हस्ताक्षर

किसान आंदोलन में आईटी सेल लगातार नया प्रयोग कर रही है, जिससे सरकार को यह दिखाया जा सके कि आंदोलन को कितने लोग समर्थन दे रहे हैं तो कानूनों के खिलाफ कितने किसान खड़े है। इसके लिए ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। जिसमें किसानों के समर्थन में अभी तक एक लाख 80 हजार 871 लोग ऑनलाइन हस्ताक्षर कर चुके है तो कानून के विरोध में अभी तक 84917 लोग ऑनलाइन हस्ताक्षर कर चुके है। इस तरह से तकनीक का पूरा इस्तेमाल किया जा रहा है। 

आंदोलन से सरकार को घबराहट है और सरकार ने खुफिया एजेंसियों व किसान विरोधी लोगों को लगा दिया है। प्रचार किया जा रहा है कि किसान नेता गलत हैं। वह सरकार के साथ खड़े हो गए हैं। ऐसी बात पर विश्वास नहीं किया जाए और सभी किसान संगठन साथ है। ऐसा कोई नेता नहीं है जो अपने बच्चों का भविष्य खराब करेगा और खुद को गद्दार कहलवाएगा। इसके साथ ही कोई युवा गाने बजाकर नाचता है तो वह बहुत गलत है। यहां किसान हक की लड़ाई में शहीद हो रहे हैं और कुछ लोग आंदोलन को खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। सरकार यह समझती है कि वह आंदोलन को तोड़ देगी तो यह उसकी गलतफहमी है। ऐसे लोगों की पहचान कर अब पुलिस के हवाले किया जाएगा।  बलबीर सिंह राजेवाल, सदस्य, संयुक्त किसान मोर्चा।

इस आंदोलन की आग पूरे देश में फैल चुकी है। आंदोलन के पक्ष में दुनियाभर में लोग खड़े हुए हैं और आंदोलन के दबाव में इंग्लैंड के प्रधानमंत्री ने आने से इनकार किया है। सरकार एक साजिश कर रही है, जिसमें लोगों के पास एक कंप्यूटराइज्ड कॉल आ रही है। जिसमें कृषि कानूनों को किसानों के लिए फायदेमंद बताया जा रहा है और आंदोलन को गलत कहा जा रहा है। इस तरह से भ्रांतियां फैलाई जा रहीं है, जबकि किसानों को सच्चाई पता है कि कृषि कानून किसान विरोधी है। इसलिए सभी को एकजुट होकर आंदोलन को मजबूत बनाना है, जिससे सरकार को कृषि कानून वापस लेने पड़े। 
राजेंद्र सिंह दीप सिंहवाला, उपाध्यक्ष कीर्ति किसान यूनियन।

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