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किसान आंदोलन : नहीं मिल रहे किसान संगठनों के दिल, साथ दिखने की मजबूरी, अंदरखाने क्रेडिट वार
Fri, 18 Dec 2020 01:10 PM IST
निवेदिता वर्मा
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 18 Dec 2020 01:10 PM IST
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कृषि कानूनों के विरोध में धरने पर डटे किसान।
- फोटो : अमर उजाला
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नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन में किसान संगठनों के बीच क्रेडिट वार भी छिड़ी हुई है। आंदोलन की अगुवाई कर रहे अनेक किसान नेताओं के न तो दिल मिल रहे हैं और न ही विचार, वे मजबूरी में ही साथ-साथ हैं।
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पंजाब के किसान संगठन जहां इस आंदोलन को अपना ही मानकर चल रहे हैं, वहीं हरियाणा के किसान संगठनों के नेताओं में भी मतभेद हैं। बहादुरगढ़ में टिकरी बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के साथ बुधवार को हुए बर्ताव ने अंदरखाने चल रहे विरोधाभास की हकीकत सामने ला दी है।
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चढूनी लंबे अरसे से किसानों के लिए प्रदेश में संघर्ष करते आ रहे हैं। जीटी रोड बेल्ट के साथ ही अन्य जिलों में भी किसानों के बीच उनकी अच्छी पैठ है, लेकिन हरियाणा के ही कुछ किसान नेता उनको फूटी आंख नहीं सुहाते। टिकरी बॉर्डर पर चढूनी के साथ जो हुआ उसके पीछे प्रदेश के भी कुछ किसान नेता शामिल हैं, जिन्होंने पंजाब के किसान नेताओं को बरगलाया।
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पंजाब व हरियाणा के कुछ किसान नेताओं के बीच खटास तब से ज्यादा बढ़ी है, जब पंजाब के प्रमुख किसान नेताओं में शामिल जोगिंदर सिंह उगराहां को बातचीत के लिए गठित कमेटी में शामिल नहीं किया गया।
श्रेय कोई भी ले, हमारा मकसद आंदोलन की सफलता : बैंस
भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के प्रवक्ता राकेश बैंस का कहना है कि उन्हें आंदोलन की सफलता का श्रेय नहीं चाहिए। उनका मकसद किसानों के हकों के लिए जारी संघर्ष को सिरे चढ़ाना है। उनकी लड़ाई खुद के लिए और पूरे किसान समुदाय के लिए है। किसानों को जागरूक व लामबंद करने के लिए दिन-रात जनजागरण अभियान चला रहे हैं।
साजिशकर्ताओं पर रख रहे नजर, सरकार से भी सतर्क
भाकियू हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि आंदोलन को तोड़ने या हाईजेक करने वालों पर पैनी निगाह रखे हुए हैं। साजिशकर्ताओं की हरकतों पर विशेष ध्यान रखा जा रहा। सरकार से भी किसान संगठन सतर्क हैं। सरकार किसानों की मांगों को मानने के बजाय किसानों को एक-दूसरे के विरुद्ध खड़ा करना चाहती है। ऐसा वह कतई नहीं होने देंगे।