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Punjab News: किन्नू की पैदावार में 25 फीसदी हो सकती गिरावट, नहरी पानी की कमी व तापमान में वृद्धि बनी वजह
Mon, 12 Dec 2022 01:16 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 12 Dec 2022 01:16 AM IST
सार
बागवानी विभाग के नोडल अधिकारी (सिट्रस) बलविंदर सिंह ने बताया कि इस साल किन्नू की पैदावार में करीब 25 फीसदी की गिरावट आने वाली है। 12 लाख मीट्रिक टन के औसत पैदावार के मुकाबले किन्नू की उपज नौ लाख मीट्रिक टन होने की संभावना है।
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किन्नू की फसल
- फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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विस्तार
देश में किन्नू के बड़े उत्पादकों में शुमार पंजाब में इस बार इस फल के उत्पादन में 25 फीसदी गिरावट आ सकती है। हालांकि बागवानों को इसके बेहतर दाम मिल रहे हैं। साल के शुरुआती सीजन में नहरी पानी की कमी और फूल आने के चरण में अचानक तापमान में वृद्धि को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।
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गौरतलब है कि देश में किन्नू का पंजाब सबसे अधिक पैदावार होती है। यहां करीब 59,000 हेक्टेयर भूमि पर किन्नू का लगभग 12 लाख मीट्रिक टन वार्षिक पैदावार होती है। किन्नू की तुड़ाई दिसंबर में शुरू होती है और फरवरी के अंत तक चलती है। राज्य में अबोहर में 35,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में किन्नू की सर्वाधिक पैदावार की जाती है जबकि होशियारपुर, मुक्तसर, बठिंडा और कुछ अन्य जिलों में भी किन्नू उगाया जाता है।
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बागवानी विभाग के नोडल अधिकारी (सिट्रस) बलविंदर सिंह ने बताया कि इस साल किन्नू की पैदावार में करीब 25 फीसदी की गिरावट आने वाली है। 12 लाख मीट्रिक टन के औसत पैदावार के मुकाबले किन्नू की उपज नौ लाख मीट्रिक टन होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि अबोहर में इस बार किन्नू की पैदावार पिछले साल के मुकाबले 50 प्रतिशत ही रह गया है। किन्नू पैदा करने वाले किसान जगदीप सिंह, संदीप कौर और सरदारा सिंह का कहना है कि अबोहर के एक बड़े क्षेत्र को फरवरी और मई के बीच सिंचाई के लिए नहर के पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल सकी।
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वहीं, फूल आने की अवस्था में तापमान में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो गई। इससे फूल गिर गए। इसके चलते कई किसानों को अपने पौधे उखाड़ने पड़े। अबोहर के गिद्दरांवाली गांव में 100 एकड़ में किन्नू उगाने वाले प्रदीप ने बताया कि फूल आने के दौरान उच्च तापमान उपज में गिरावट की मुख्य वजह है। वहीं, अजीत शरण ने बताया कि अबोहर में फसल में लगभग 50-60 फीसदी की गिरावट आने वाली है। तापमान 10 डिग्री तक बढ़ गया, इससे फसल के फूल पर असर पड़ा। हालांकि किसानों को फसल की गुणवत्ता के आधार पर 25 से 29 रुपये प्रति किलोग्राम का अधिक मुनाफा मिल रहा है, जबकि पिछले सीजन में यह मुनाफा 18-20 रुपये प्रति किलोग्राम था।