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5 पुलिसकर्मियों ने कैट में दायर की याचिका, यूटी प्रशासन का विरोध

Tue, 30 Aug 2016 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Updated Tue, 30 Aug 2016 12:43 AM IST
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Khudda Lahura rape case Five policemen arrived CAT filed a petition for re-joining
Central Administrative Tribunal - फोटो : Amar ujala
खुड्डा लाहौरा में नाबालिग से रेप मामले में जिला अदालत से बरी हुए यूटी पुलिस के पांच पूर्व पुलिसकर्मियों ने विभाग में फिर से ज्वाइनिंग के लिए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) में याचिका दायर की है। पांचों बर्खास्त कांस्टेबलों ने 11 नवंबर 2014 को जिला अदालत से बरी होने वाले फैसले को आधार बनाते हुए फोर्स में फिर से ज्वाइनिंग देने की अपील की है। वहीं मामले में यूटी प्रशासन ने पांचों कांस्टेबलों को रिइंस्टेट करने का कड़ा विरोध किया है। केस की अगली सुनवाई सितंबर में होगी। 
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यूटी के नोडल अफसर अरविंद मोदगिल ने याचिका का विरोध करते हुए ट्रिब्यूनल में कहा कि अदालत में पीड़िता ने केस में सपोर्ट नहीं किया था। इस पर अदालत ने पांचों पुलिसकर्मियों को सबूतों के अभाव और शक का लाभ देते हुए बरी किया। ऐसे में इन्हें सर्विस से बर्खास्त करने का फैसला सही था। 
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पुलिस की ही जांच पर उठाए सवाल 

Khudda Lahura rape case Five policemen arrived CAT filed a petition for re-joining
चंडीगढ़ पुलिस - फोटो : file photo
याचिका में पांचों कांस्टेबलों ने यूटी प्रशासन और पुलिस विभाग को पार्टी बनाया है। साथ ही कहा है कि वह पुलिस की दागी जांच समेत राजनीतिक संस्थाओं द्वारा श्रेय लेने की होड़ का शिकार हुए हैं। उनके अनुसार जिला अदालत से बरी होने के बाद वह डीआईजी और एसएसपी के समक्ष पेश हुए थे और रिज्वाइनिंग की अपील की थी। इस पर उन्हें कहा गया था कि एक बार सर्विस से बर्खास्त होने के बाद कोई अपील नहीं है। 


ये है मामला 
10 दिसंबर 2013 को सेक्टर-11 थाना पुलिस ने अपने ही पांच कांस्टेबलों जगतार सिंह, अक्षय, सुनील कुमार, हिम्मत सिंह और अनिल कुमार के खिलाफ दुराचार समेत पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज किया था। सिटी के एक गवर्नमेंट स्कूल में दसवीं की छात्रा (पीड़िता) के साथ कई महीनों से दुराचार का आरोप उक्त कांस्टेबलों पर लगा था। उस समय पुलिस को दी शिकायत में पीड़िता ने कहा था कि उसके साथ बंदूक के बल पर दुराचार किया जाता था।

साथ ही उसे गर्भनिरोधक दवा खाने को मजबूर किया जाता था। केस दर्ज होने के बाद पांचों कांस्टेबलों को सर्विस से बर्खास्त कर दिया गया था। वहीं अदालत में ट्रायल के दौरान पीड़िता ने अक्षय से रिश्तों की बात कबूली थी। हालांकि उसने चारों कांस्टेबलों को पहचानने से इंकार कर दिया था।
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