आप के जाल में घिरे कैप्टन और बादल, जमानत होगी जब्त : केजरीवाल
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दिल्ली के मुख्यमंत्री व आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह आम आदमी पार्टी के जाल में घिर चुके हैं।
इस चुनाव में जहां इन दोनों नेताओं की जमानतें जब्त होंगी, वहीं उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल व बिक्रम मजीठिया समेत अन्य शिअद नेता भी इस चुनाव में आप प्रत्याशियों से हार का मुंह देखने को मजबूर होंगे। आप प्रमुख शनिवार को लंबी विधानसभा हलके के गांव पन्नीवाला में आयोजित चुनावी जनसभा को संबोधित कर रहे थे।
केजरीवाल ने आप प्रत्याशी जरनैल सिंह के पक्ष में गांव पन्नीवाला, सिखवाला, फत्ताकेरा, चन्नू में चुनाव प्रचार किया। उन्होंने कहा कि पटियाला में हुई आप की रैली से समर्थकों में नजर आ रहे उत्साह से स्पष्ट हो रहा था कि इस बार के चुनाव में पटियाला सीट से तो कैप्टन की जमानत जब्त होना तय है ही वहीं लंबी से भी वह बहुत बुरे तरीके से चुनाव हारेंगे।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार चाहे तो उसके पास रुपये की कभी कमी नहीं आ सकती। सरकारों के पास विकास के लिए बहुत रुपये होते हैं लेकिन सरकारी अधिकारी व कर्मचारी ही रुपयों को खा जाते हैं। आप ऐसा नहीं होने देगी। आप भ्रष्टाचार के खिलाफ है और भ्रष्टाचारी अधिकारी व कर्मचारी को कतई बर्दाश्त नहीं करती।
'शिक्षा व स्कूलों के सुधार में नाकाम साबित हुई सरकार'
केजरीवाल ने बादल और कैप्टन पर मिले होने का आरोप लगाते हुए कहा कि इन दोनों के परिवारों में आपसी रिश्तेदारी है। यही वजह है कि दोनों ने मिलकर पंजाब को लूटा है लेकिन इस बार लोग बदलाव चाहते हैं।
इस बार इन दोनों की चालें नाकाम हो जाएंगी। दिल्ली की आप सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए केजरीवाल ने पंजाब में भी आप की सरकार आने पर दिल्ली जैसी सभी सहूलियतें दी जाएंगी।
उन्होंने कहा कि आप सबसे ईमानदार और लोगों को सस्ती सहूलियतें देने वाली सरकार है। प्रदेश में आप की सरकार आने पर सबसे पहले जहां नशा खत्म होगा। वहीं बिजली के बिल दिल्ली से भी कम किए जाएंगे।
केजरीवाल ने कहा कि आप सरकार ने दिल्ली में सहूलियतों से लैस ढाई सौ स्कूल खोले हैं, जिनमें स्वीमिंग पूल भी हैं जबकि शिअद-भाजपा गठबंधन सरकार ने कभी ऐसे स्कूल नहीं खोले।
गठबंधन सरकार शिक्षा व स्कूलों के सुधार में नाकाम साबित हुई है। आप से मुख्यमंत्री कौन होगा इस सवाल के जवाब में केजरीवाल ने कहा कि यह फैसला चुनाव जीतने वाले विधायक मिलकर खुद लेंगे।