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कौशल्या बांध निर्माण में घपला, 25 अफसरों पर कार्रवाई के आदेश, 15 रिटायर
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 21 Sep 2017 01:26 PM IST
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कौशल्या बांध निर्माण
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घग्गर नदी पर बने कौशल्या बांध के निर्माण में धांधली को लेकर सिंचाई विभाग के 25 अफसरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं। दोषी ठहराए गए इन अधिकारियों में से 15 रिटायर हो चुके हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के शासनकाल में बने इस बांध के निर्माण में घपले का आरोप लगाते हुए शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष विजय बंसल ने जांच की मांग की थी। इस पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मामले की जांच विजिलेंस ब्यूरो को सौंप दी थी।
26 जून, 2017 को राज्य के मुख्य सचिव को सौंपी अपनी जांच रिपोर्ट में विजिलेंस ब्यूरो ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों का घपला होने और दो बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए बांध के नक्शे में बिना किसी तकनीकी अनुमति के बदलाव करने जैसी गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया था। विजिलेंस ने जांच में पाया कि बांध को अब तक पर्यावरण मंत्रालय से क्लीयरेंस नहीं मिली है, यानी पर्यावरण मंत्रालय इसके निर्माण को सीधे तौर पर अवैध भी ठहरा सकता है।
सिंचाई विभाग के इन अफसरों पर कार्रवाई के आदेश
एमके गुप्ता (प्रमुख अभियंता- रिटायर्ड), केके दीवान (प्रमुख अभियंता- रिटायर्ड), हरमेल सिंह (प्रमुख अभियंता- रिटायर्ड), एके कालड़ा (मुख्य अभियंता- रिटायर्ड), एसएल अग्रवाल (मुख्य अभियंता- रिटायर्ड), आरके कश्यप (मुख्य अभियंता- रिटायर्ड), अनिल कुमार गुप्ता (मुख्य अभियंता- रिटायर्ड), अनूप सिंघल (मुख्य अभियंता- रिटायर्ड), एसएल अग्रवाल (अधीक्षण अभियंता- रिटायर्ड), एचके गुप्ता (अधीक्षण अभियंता- रिटायर्ड), जेएन गर्ग (अधीक्षण अभियंता- रिटायर्ड), संजीव गर्ग (अधीक्षण अभियंता- रिटायर्ड), जगमोहन सिंह (अधीक्षण अभियंता- रिटायर्ड), वीएस सैनी (कार्यकारी अभियंता- रिटायर्ड), जगमोहन सिंह (कार्यकारी अभियंता- रिटायर्ड), प्रवीण चोपड़ा (कार्यकारी अभियंता), विनोद कुमार (कार्यकारी अभियंता), सुरेश सैनी (उपमंडल अभियंता), विनोद कुमार (उपमंडल अभियंता), सीपी चुघ (कनिष्ठ अभियंता), सुदेश गुप्ता (कनिष्ठ अभियंता), सुदेश कुमार (कनिष्ठ अभियंता), मनीष कुमार (कनिष्ठ अभियंता), दर्शन कुमार (कनिष्ठ अभियंता) और ईश कुमार (कनिष्ठ अभियंता)।
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26 जून, 2017 को राज्य के मुख्य सचिव को सौंपी अपनी जांच रिपोर्ट में विजिलेंस ब्यूरो ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों का घपला होने और दो बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए बांध के नक्शे में बिना किसी तकनीकी अनुमति के बदलाव करने जैसी गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया था। विजिलेंस ने जांच में पाया कि बांध को अब तक पर्यावरण मंत्रालय से क्लीयरेंस नहीं मिली है, यानी पर्यावरण मंत्रालय इसके निर्माण को सीधे तौर पर अवैध भी ठहरा सकता है।
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सिंचाई विभाग के इन अफसरों पर कार्रवाई के आदेश
एमके गुप्ता (प्रमुख अभियंता- रिटायर्ड), केके दीवान (प्रमुख अभियंता- रिटायर्ड), हरमेल सिंह (प्रमुख अभियंता- रिटायर्ड), एके कालड़ा (मुख्य अभियंता- रिटायर्ड), एसएल अग्रवाल (मुख्य अभियंता- रिटायर्ड), आरके कश्यप (मुख्य अभियंता- रिटायर्ड), अनिल कुमार गुप्ता (मुख्य अभियंता- रिटायर्ड), अनूप सिंघल (मुख्य अभियंता- रिटायर्ड), एसएल अग्रवाल (अधीक्षण अभियंता- रिटायर्ड), एचके गुप्ता (अधीक्षण अभियंता- रिटायर्ड), जेएन गर्ग (अधीक्षण अभियंता- रिटायर्ड), संजीव गर्ग (अधीक्षण अभियंता- रिटायर्ड), जगमोहन सिंह (अधीक्षण अभियंता- रिटायर्ड), वीएस सैनी (कार्यकारी अभियंता- रिटायर्ड), जगमोहन सिंह (कार्यकारी अभियंता- रिटायर्ड), प्रवीण चोपड़ा (कार्यकारी अभियंता), विनोद कुमार (कार्यकारी अभियंता), सुरेश सैनी (उपमंडल अभियंता), विनोद कुमार (उपमंडल अभियंता), सीपी चुघ (कनिष्ठ अभियंता), सुदेश गुप्ता (कनिष्ठ अभियंता), सुदेश कुमार (कनिष्ठ अभियंता), मनीष कुमार (कनिष्ठ अभियंता), दर्शन कुमार (कनिष्ठ अभियंता) और ईश कुमार (कनिष्ठ अभियंता)।
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शिकायतकर्ता ने ये लगाए थे आरोप
कौशल्या बांध निर्माण
कौशल्या बांध के निर्माण में धांधलियों की दी गई शिकायत में विजय बंसल का कहना था कि 2005 में राज्य सरकार ने इसके निर्माण के लिए 51 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। 2008 में जब निर्माण शुरु हुआ तो हरियाणा नगर योजनाकार विभाग ने बांध के नजदीक दो बिल्डरों- डीएलएफ और आइरियो को कालोनी बनाने के लिए लाइसेंस जारी कर दिए।
इन बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बिना किसी तकनीकी सलाह के बांध की दीवार को 12 से बढ़ाकर 30 फुट करने के आदेश दिए। इससे बांध की लागत भी बढ़ गई। बाद में बांध निर्माण कंपनी और सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने कौशल्या नदी से करोड़ों की रेत और पत्थर बेचकर सरकार को भी नुकसान पहुंचाया।
विजिलेंस ने यह लिखा रिपोर्ट में
विजिलेंस ब्यूरो ने जांच शुरू करते ही सबसे पहले इसी बात पर आपत्ति जताई कि बांध निर्माण के लिए पर्यावरण विभाग से फारेस्ट कंजर्वेशन एक्ट के तहत अनुमति ली जानी जरूरी थी, जो आज तक नहीं ली गई। इसके अलावा बांध के निर्माण के लिए जो 11.70 हेक्टेयर वन भूमि ली गई, उसके बदले में सिंचाई विभाग ने किसी अन्य स्थान पर वन विभाग को भूमि भी नहीं लौटाई।
बांध की दीवार को चौड़ा करके बांध पर फोरलेन रास्ता बनाने के लिए हुडा, सिंचाई विभाग और किसी अन्य विभाग ने कोई फिजिकल निरीक्षण नहीं किया। तत्कालीन मुख्यमंत्री की घोषणा से पहले बांध पर रास्ता चौड़ा करने के बारे में आम जनता को इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई और बांध की दीवार को चौड़ा करने का फैसला भी चुपचाप ले लिया गया।
इन बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बिना किसी तकनीकी सलाह के बांध की दीवार को 12 से बढ़ाकर 30 फुट करने के आदेश दिए। इससे बांध की लागत भी बढ़ गई। बाद में बांध निर्माण कंपनी और सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने कौशल्या नदी से करोड़ों की रेत और पत्थर बेचकर सरकार को भी नुकसान पहुंचाया।
विजिलेंस ने यह लिखा रिपोर्ट में
विजिलेंस ब्यूरो ने जांच शुरू करते ही सबसे पहले इसी बात पर आपत्ति जताई कि बांध निर्माण के लिए पर्यावरण विभाग से फारेस्ट कंजर्वेशन एक्ट के तहत अनुमति ली जानी जरूरी थी, जो आज तक नहीं ली गई। इसके अलावा बांध के निर्माण के लिए जो 11.70 हेक्टेयर वन भूमि ली गई, उसके बदले में सिंचाई विभाग ने किसी अन्य स्थान पर वन विभाग को भूमि भी नहीं लौटाई।
बांध की दीवार को चौड़ा करके बांध पर फोरलेन रास्ता बनाने के लिए हुडा, सिंचाई विभाग और किसी अन्य विभाग ने कोई फिजिकल निरीक्षण नहीं किया। तत्कालीन मुख्यमंत्री की घोषणा से पहले बांध पर रास्ता चौड़ा करने के बारे में आम जनता को इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई और बांध की दीवार को चौड़ा करने का फैसला भी चुपचाप ले लिया गया।
बिल्डरों को यूं पहुंचाया लाभ
Haryana CM Manohar lal Khattar
विजिलेंस ब्यूरो ने पाया कि सेक्टर-2,3,4,5 पिंजौर कालका अर्बन कॉम्प्लेक्स की जमीन अधिग्रहण करते समय हूडा ने दोनों बिल्डरों के हिस्से की भूमि को अधिग्रहण से अलग रखकर दिया। इससे बिल्डरों को अपने निर्माण में कोई रुकावट नहीं आई, जबकि सेक्टरों के निर्माण का काम अटक गया जो अब तक नहीं हो सका है।
हुडा द्वारा जो 672 एकड़ जमीन अधिग्रहण की जानी थी, उसमें से 372 एकड़ जमीन तत्कालीन सरकार के आदेश पर बिल्डरों को रिलीज कर दी गई। नेशनल हाईवे-73 से रास्ते का प्रावधान होने के बावजूद कौशल्या बांध के ऊपर का रास्ता 12 मीटर से 30 मीटर चौड़ा करके बिल्डरों को लाभ पहुंचाने का काम किया गया ताकि कंपनियों द्वारा बनाए जा रहे हाऊसिंग कॉम्प्लेक्स को पंचकूला-कालका हाईवे से सीधा रास्ता उपलब्ध हो सके।
हुडा द्वारा जो 672 एकड़ जमीन अधिग्रहण की जानी थी, उसमें से 372 एकड़ जमीन तत्कालीन सरकार के आदेश पर बिल्डरों को रिलीज कर दी गई। नेशनल हाईवे-73 से रास्ते का प्रावधान होने के बावजूद कौशल्या बांध के ऊपर का रास्ता 12 मीटर से 30 मीटर चौड़ा करके बिल्डरों को लाभ पहुंचाने का काम किया गया ताकि कंपनियों द्वारा बनाए जा रहे हाऊसिंग कॉम्प्लेक्स को पंचकूला-कालका हाईवे से सीधा रास्ता उपलब्ध हो सके।