श्री करतारपुर साहिब में भेंट के लिए ले जाने वाली रसद पर लगाई रोक, पढ़ें पूरा मामला
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पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों को जाने वाली संगत लंगर के लिए अपनी तरफ से जो रसद ले जाती थी, उस पर इमिग्रेशन व कस्टम अधिकारियों ने रोक लगा दी है। वहीं रोक लगाने का कारण पूछने पर सीमा शुल्क विभाग के अधिकारियों ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
जानकारी के अनुसार नए वर्ष के पहले दिन संगत डेरा बाबा नानक के मुख्य टर्मिनल से गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए पहुंची। उनके पास लंगर के लिए दाल, चाय पत्ती, चीनी, सब्जियों के साथ-साथ कुछ अन्य खाद्य पदार्थ भी थे। भारतीय चेक पोस्ट पर सीमा शुल्क विभाग व इमिग्रेशन अधिकारियों ने लंगर की इस रसद को पाकिस्तान ले जाने की आज्ञा नहीं दी। श्रद्धालुओं से रसद टर्मिनल में ही रखवा ली गई। श्रद्धालुओं से कहा गया कि वह वापसी में यह रसद ले जा सकते हैं।
एक श्रद्धालु ने बताया कि जब दर्शन कर लौटे तो अधिकारियों ने वह सामान भी जब्त कर लिया जो गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के नजदीक से उन्होंने खरीदा था। डेरा बाबा नानक के टर्मिनल में उन्हें केवल पिन्नी प्रसाद ही भारत लाने की अनुमति दी गई है। श्रद्धालुओं का कहना था कि पाकिस्तान के टर्मिनल में ऐसी कोई रोक नहीं है।
वह न तो लंगर का सामान लाने से रोकते हैं और न ही पाकिस्तान से खरीदे सामान को भारत ले जाने से। श्रद्धालुओं का कहना था कि सरकार बेशक पाकिस्तान से खरीदा सामान देश में लाने पर रोक लगा दे लेकिन लंगर की रसद गुरुद्वारा साहिब में ले जाने पर रोक न लगाए। रसद गुरु के लंगर के लिए है।
रसद पर पाबंदी दुर्भाग्यपूर्ण: एसजीपीसी
एसजीपीसी अध्यक्ष भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने कहा कि संगत अपनी श्रद्धा के अनुसार गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के लंगर के लिए रसद लेकर जाती है। यह श्रद्धा है। इसके अलावा लंगर के लिए इस रसद की जरूरत भी है। इस पर पाबंदी लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस बारे में एसजीपीसी भारत सरकार से बातचीत करेगी।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार ने वहां की संगत पर गुरुपर्व के अवसर पर गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शन के लिए रोक लगाई है। ऐसा नहीं होना चाहिए। गुरुद्वारे के दरवाजे सभी के लिए खुले रहने चाहिए। एसजीपीसी गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के प्रबंधों को सुचारु रूप से चलाने के लिए हर संभव मदद देने के लिए भी तैयार है।