{"_id":"5d4bc5d58ebc3e6cc30e9cae","slug":"kapurthala-house-remains-property-of-punjab-delhi-high-court-rejected-petition","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब सरकार की संपत्ति रहेगा दिल्ली का कपूरथला हाऊस, महल को बेचने की मांग हुई खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब सरकार की संपत्ति रहेगा दिल्ली का कपूरथला हाऊस, महल को बेचने की मांग हुई खारिज
Thu, 08 Aug 2019 12:19 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 08 Aug 2019 12:19 PM IST
विज्ञापन
कपूरथला हाउस
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित पंजाब के मुख्यमंत्री का रिहायश कपूरथला हाउस अब राज्य सरकार के अधीन ही रहेगा। क्योंकि भारत सरकार द्वारा कपूरथला के स्वर्गीय महाराजा की इस आलीशान जायदाद को बेचने के अधिकार को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। मंगलवार को पंजाब के एडवोकेट जनरल को प्राप्त 31 जुलाई, 2019 को आए फैसले में कहा गया है कि मानसिंह रोड पर नंबर-3 की जायदाद को बेचा नहीं जा सकता, क्योंकि महाराजा ने इस प्रॉपर्टी को बेचने का अधिकार गंवा दिया है।
अदालत में इस केस संबंधी पंजाब सरकार द्वारा वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पैरवी की। इस केस में मुख्य पक्ष भारत सरकार थी, जिसने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसने पंजाब को इस संपत्ति का सही हकदार समझते हुए इसका कब्जा पंजाब को दे दिया है। इस मामले में एडवोकेट जनरल अतुल नन्दा ने बताया कि पैप्सू (पटियाला एंड ईस्ट पंजाब स्टेट यूनियन) में शामिल होने से पहले और इसके बाद पैप्सू के भारत सरकार में शामिल होने से पहले कपूरथला एक रियासत थी। इस प्रॉपर्टी की रिक्वीजिशन दिल्ली प्रीमाइसिस (रिक्वीजिशन एंड एक्वीजिशन) एक्ट-1947 की धारा 3 के अंतर्गत 17 जून, 1950 को पास हुए एक आदेश के तहत की गई थी।
4 दिसंबर, 1950 को भारत सरकार द्वारा स्वर्गीय राधेश्याम मखनीलाल सेकसरिया से इस प्रॉपर्टी का कब्जा लिया गया, जिन्होंने इसे कपूरथला रियासत के पूर्व शासक स्वर्गीय महाराजा परमजीत सिंह से 10 जनवरी, 1950 को 1.5 लाख रुपये की रजिस्टर्ड सेल डीड द्वारा खरीदा था। विवाद तब पैदा हुआ, जब सेकसरिया ने 1960 में जिला अदालत दिल्ली में अपनी जायदाद के हक के लिए मुकदमा दर्ज किया, जो 1967 में दिल्ली हाईकोर्ट में भेज दिया गया। मुकदमे के दौरान सेकसरिया का देहांत हो गया और उसके चार बच्चों को उसके कानूनी प्रतिनिधि के तौर पर उनकी योग्यता के अनुसार वादी पक्ष के तौर पर नामजद किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
अदालत में इस केस संबंधी पंजाब सरकार द्वारा वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पैरवी की। इस केस में मुख्य पक्ष भारत सरकार थी, जिसने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसने पंजाब को इस संपत्ति का सही हकदार समझते हुए इसका कब्जा पंजाब को दे दिया है। इस मामले में एडवोकेट जनरल अतुल नन्दा ने बताया कि पैप्सू (पटियाला एंड ईस्ट पंजाब स्टेट यूनियन) में शामिल होने से पहले और इसके बाद पैप्सू के भारत सरकार में शामिल होने से पहले कपूरथला एक रियासत थी। इस प्रॉपर्टी की रिक्वीजिशन दिल्ली प्रीमाइसिस (रिक्वीजिशन एंड एक्वीजिशन) एक्ट-1947 की धारा 3 के अंतर्गत 17 जून, 1950 को पास हुए एक आदेश के तहत की गई थी।
विज्ञापन
4 दिसंबर, 1950 को भारत सरकार द्वारा स्वर्गीय राधेश्याम मखनीलाल सेकसरिया से इस प्रॉपर्टी का कब्जा लिया गया, जिन्होंने इसे कपूरथला रियासत के पूर्व शासक स्वर्गीय महाराजा परमजीत सिंह से 10 जनवरी, 1950 को 1.5 लाख रुपये की रजिस्टर्ड सेल डीड द्वारा खरीदा था। विवाद तब पैदा हुआ, जब सेकसरिया ने 1960 में जिला अदालत दिल्ली में अपनी जायदाद के हक के लिए मुकदमा दर्ज किया, जो 1967 में दिल्ली हाईकोर्ट में भेज दिया गया। मुकदमे के दौरान सेकसरिया का देहांत हो गया और उसके चार बच्चों को उसके कानूनी प्रतिनिधि के तौर पर उनकी योग्यता के अनुसार वादी पक्ष के तौर पर नामजद किया गया।
विज्ञापन