जस्टिस चौहान बने पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी चेयरमैन, बदनौर ने लगाई मुहर
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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस महावीर सिंह चौहान पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी (पीसीए) के चेयरमैन बन गए हैं। तीन रिटायर्ड जस्टिस के पैनल में से प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने एमएस चौहान के नाम पर मुहर लगाई है, जबकि राजस्थान के पूर्व डीजीपी एमएस गिल पीसीए के सदस्य होंगे।
इस बार अथॉरिटी का एक ही सदस्य होगा। मंगलवार को आधिकारिक आदेश दोनों को भेज दिए जाएंगे। अगले सप्ताह तक पीसीए की कमान एमएस चौहान संभाल लेंगे। अगस्त 2015 से पीसीए चेयरमैन का पद खाली था।
इस कारण लंबित मामलों की संख्या बढ़ती जा रही थी। एक महीने में लगभग 10 शिकायतें पीसीए के पास आती रहीं हैं। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दिसंबर में ही तीन रिटायर्ड जजों का पैनल चेयरमैन के लिए भेज दिया था। इस पैनल में रिटायर्ड जस्टिस महावीर सिंह चौहान, एएम जिंदल और कर्मचंद पुरी का नाम शामिल था।
प्रदीप मेहरा की नियुक्ति हुई थी खारिज
प्रदीप मेहरा की नियुक्ति हुई थी खारिज
प्रशासन ने 8 नवंबर 2013 को पूर्व एडवाइजर प्रदीप मेहरा को चेयरमैन नियुक्त किया गया था, जबकि सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशानुसार स्टेट लेवल पीसीए को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का रिटायर्ड जज ही हेड कर सकता है।
एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने इस बात का हवाला देते हुए प्रदीप मेहरा की नियुक्ति को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद कोर्ट ने अगस्त 2015 में नियुक्ति को खारिज कर दिया था। इसके बाद ही प्रशासन ने हाईकोर्ट से पैनल मांगा था।
पुलिस संबंधी मामले देखती है पीसीए
अगस्त 2010 में पीसीए का गठन किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य पुलिस पर लगे आरोपों और लोगों से किए गए दुर्व्यवहार की जांच करना है। पुलिस के खिलाफ कोई भी शिकायत पीसीए से की जा सकती है।
जांच के बाद आरोप सही पाए जाने पर पीसीए कार्रवाई की सिफारिश अथॉरिटी को करती है। पिछले डेढ़ साल से पुलिस के खिलाफ की गई किसी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी।