Haryana: DSP सुरेंद्र सिंह की हत्या की न्यायिक जांच रिपोर्ट विधानसभा में पेश, पुलिसवालों के पास नहीं थे हथियार
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राजस्थान और हरियाणा में खनन प्रक्रिया में असमानता है। इससे नूंह में अवैध खनन की गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। नूंह की सीमा राजस्थान से लगती है। इससे भी असमानता पैदा होती है।
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नूंह में अवैध खनन रोकने गए तावडू के डीएसपी सुरेंद्र सिंह की हत्या की न्यायिक जांच की रिपोर्ट मंगलवार को विधानसभा में पेश की गई। हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज एलएन मित्तल की अध्यक्षता में गठित आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक डीएसपी सुरेंद्र सिंह की हत्या के लिए कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं बनाई गई है। आयोग ने बताया है कि घटना के वक्त किसी भी पुलिस अधिकारी पास कोई हथियार नहीं था। इसीलिए घटना के बाद भी पुलिसकर्मी डंपर व बाइक सवारों को नहीं पकड़ सके।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक 19 जुलाई 2022 को पत्थरों से भरे डंपर को देख डीएसपी ने पुलिस पार्टी के साथ उनका पीछा किया। पुलिस को देख डंपर चालक ने आगे से पत्थर उतारना शुरू कर दिया। इससे पुलिस को अपनी गाड़ी रोकनी पड़ी और डंपर के सामने दौड़कर उसे रोकने का प्रयास किया। इस पर डंपर में बैठे लोगों ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे किनारे हो जाएं, अन्यथा वे गोली मार देंगे।
डंपर के आगे चल रही मोटरसाइकिल पर सवार दो आरोपियों ने डंपर चालक मित्तर को पुलिस अधिकारियों पर गाड़ी चढ़ाने के लिए उकसाया। इस पर डंपर चालक ने वाहन की गति तेज की और पुलिस अधिकारी सुरेंद्र सिंह को कुचल दिया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राजस्थान और हरियाणा में खनन प्रक्रिया में असमानता है। इससे नूंह में अवैध खनन की गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। नूंह की सीमा राजस्थान से लगती है। इससे भी असमानता पैदा होती है।
ऐसी घटना को रोकने के लिए आयोग के सुझाव
- अवैध खनन गतिविधियों से संबंधित छापे या जांच के लिए पर्याप्त पुलिस बल भेजा जाए।
- खनन सामग्री के लिए डंपरों में जीपीएस अवश्य लगाया जाए।
- महीने में कम से कम दो बार क्रशरों का सर्वे हो।
- गैर सरकारी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं व पंच-सरपंचों को जागरूकता अभियान में शामिल करें और उन्हें अवैध खनन के आरोपियों की सूचना देने के लिए प्रेरित करें। अपराधियों के बारे में जानकारी देने पर उन्हें पुरस्कार भी दें।
- संभव हो तो निगरानी के लिए ड्रोन भी तैनात किए जा सकते हैं।
- स्थानीय निवासियों के बीच मुखबिरों का नेटवर्क बनाया जा सकता है।
- क्षेत्र में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध है, इससे अवैध खनन होता है। वैध खनन के लिए कुछ क्षेत्र को लीज पर दे सकते हैं। इसके लिए नेशनल ग्रीन
- ट्रिब्यूनल की अनुमति मांगी जा सकती है।
- सीसीटीवी वाले नाके लगाएं। साथ ही खनन विभाग और पुलिस को पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराया जाए।
- अवैध खनन की वास्तविक जानकारी प्राप्त करने के लिए सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग का उपयोग किया जा सकता है।