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चंडीगढ़: सरकार को 700 करोड़ के राजस्व का नुकसान पहुंचाने वाले ज्वाइंट डायरेक्टर फैक्टरी गिरफ्तार

Sat, 01 Apr 2023 10:55 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sat, 01 Apr 2023 10:55 PM IST
सार

फिलिप्स कंपनी को गैर कानूनी तरीके से डी रजिस्टर किया था। उसपर धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार का आरोप है। अब तक इस मामले में नौ आरोपी काबू किए जा चुके हैं। 

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Joint director factory arrested for loss of revenue of 700 crores to the government
सांकेतिक फोटो - फोटो : Social Media

विस्तार

विवादों में चल रही फिलिप्स कंपनी मोहाली को गैर कानूनी तरीके से डी-रजिस्टर करने की वजह से राज्य सरकार को हुए 700 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। वहीं, सरकार को विभिन्न कानूनी केसों का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले में विजिलेंस ब्यूरो पंजाब ने अब ज्वाइंट डायरेक्टर फैक्टरी नरिंदर सिंह को नामजद कर सेक्टर-68 मोहाली स्थित उनकी रिहायश से गिरफ्तार किया है।

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इस मामले में विजिलेंस ने पहले ही भ्रष्टाचार निरोधी एक्ट की धारा 13 (1) (ए), 13 (2) व आईपीसी की धारा 409, 420, 465, 467, 468, 471, 201, 120- बी केस दर्ज किया था। अभी तक इस मामले में नौ आरोपी अधिकारी-कर्मचारी पकड़े जा चुके हैं।

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जांच में सामने आया है कि उ क्त अधिकारी को 28 दिसंबर 2018 को ज्वाइंट डॉयरेक्टर व फिलिप्स कंपनी की तरफ से श्रम कमिश्नर पंजाब से एक पत्र डाक के माध्यम से भेजा गया। लेकिन नरिंदर सिंह ने यह एप्लीकेशन श्रम कमिश्नर पंजाब को भेजे बिना खुद ही कार्रवाई शुरू कर दी।

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आरोपी अधिकारी ने अपने पत्र नंबर (19) 10 जनवरी 2019 के माध्यम से बिना कोई पड़ताल किए और फिलिप्स कंपनी के किसी भी वर्कर के बयान लिए बिना श्रम कमिश्नर की मंजूरी से बिना कंपनी को डी रजिस्टर कर दिया। इसके अलावा फैक्टरी डी-रजिस्टर करने संबंधी विभिन्न इंडस्ट्रीज, डायरेक्टर फैक्टरीज आदि के दफ्तरों की जानकारी हेतु डी-रजिस्टर करने के लिए 25 जनवरी 2019 को पत्र भेजा।

 

लेकिन इस बारे में कोई पत्र अभी प्राप्त नहीं हुआ। 27 फरवरी 2019 में श्रम इंस्पेक्टर की तरफ से चीफ ज्यूडिशियल मेजिस्ट्रेट की अदालत में पंजाब की तरफ से औद्योगिक विवाद कानून 1947 की धारा 25 का चालान संयुक्त आइच व अमित मित्तल मेसर्ज फिलिप्स इंडिया लिमिटेड फेज-नौ के खिलाफ दायर किया है।

अधिकारी की गलती से कंपनी पहुंच गई सुप्रीम कोर्ट
यदि नरिंदर सिंह इस फैक्टरी को डी रजिस्ट्रर नहीं करता तो यह फैक्टरी बंद नहीं हो सकती थी। साथ ही औद्योगिक विवाद कानून की धारा -25 के अधीन चालान देना ही नहीं बनता था। ऐसा चालान करने से पहले नरिंदर सिंह को बकायदा पड़ताल करनी चाहिए थी। जो कि उसने इस काम में नहीं की है। इस वजह से कंपनी वालों को फायदा हुआ। उन्होंने इसी चीज का फायदा उठाकर पंजाब सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष आज्ञा याचिका दायर करके 25 अगस्त 2019 को धारा -25 के तहत पेश किए चालान के खिलाफ स्टे हासिल की। वहीं, जांच में यह भी सामने आया है कि उक्त अधिकारी यदि इस कंपनी को उी रजिस्ट्रर न करता हतो सरकार को 700 करोड़ का राजस्व प्राप्त होना था।

पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा भी पकड़े गए थे
एक रियल एस्टेट कंपनी को फिलिप्स कंपनी का इंडस्ट्रियल प्लॉट ट्रांसफर करने और उसमें टाउनशिप बनाने और तय संख्या से बढ़ाकर प्लॉटों को बेचने का पांच जनवरी 2013 को दर्ज किया था। इसमें पूर्व उद्योग मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा व पंजाब स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरशन (पीएसआईडीसी) की पूर्व एमडी व आईएएस अधिकारी नीलिमा समेत के 14 पर केस दर्ज किया था।



याद रहे कि पंजाब सरकार ने साल 1987 में आनंद लैंप्स लिमिटेड कंपनी को सेल डीड के माध्यम से 25 एकड़ जमीन अलॉट की थी, जो बाद में सिगनीफाई इनोवेशन नामक फर्म में तब्दील हो गई। सिगनीफाई कंपनी ने पीएसआईडीसी से एनओसी लेकर इस प्लॉट को गुलमोहर टाउनशिप को बेच दिया था। तत्कालीन उद्योग मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा ने गुलमोहर टाउनशिप के उक्त प्लॉट को कई हिस्सों में बांटने के पत्र को एमडी पीएसआईडीसी को भेज दिया था और पीएसआईडीसी के अधिकारियों ने फाइलों को देखे बिना टाउनशिप की मंजूरी दे दी।

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