जींद उपचुनावः बांगर की धरती पर 52 साल में पहली बार खिला 'कमल', रणदीप सुरजेवाला की करारी हार
लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माने जा रहे जींद उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी डॉ. कृष्ण मिड्ढा 12935 वोटों से विजयी हुए हैं। उन्हें कुल 50566 वोट मिले। इस तरह बांगर की धरती पर पिछले 52 सालों में पहली बार कमल खिला है। जबकि ताऊ देवीलाल की सियासत की विरासत की जंग लड़ रहे जजपा के दिग्विजय चौटाला 37631 वोट प्राप्त करके दूसरे स्थान पर रहे।
वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता 22740 वोट हासिल करके तीसरे स्थान पर रहे। जबकि लोसुपा के विनोद अशरी को 13582 वोट मिले और इनेलो प्रत्याशी उमेद सिंह रेढ़ू को 3454 वोट मिले हैं। माना जा रहा है कि इस चुनाव के परिणाम का असर आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव पर भी दिखाई देगा। कुल 130828 वोटों की गिनती की गई।
मतगणना के लिए किए गए ऐसे इंतजाम
बांगर की धरती पर लड़ी गई सियासी जंग जितनी दिलचस्प रही उतना ही उसका परिणाम भी रहा है। पहले तीन राउंड तक जजपा प्रत्याशी दिग्विजय चौटाला आगे चल रहे थे। तीन राउंड तक ग्रामीण क्षेत्रों का मत गिना गया था। जैसे ही शहरी क्षेत्र की गिनती शुरू हुई भाजपा चौथे राउंड से पांच हजार वोटों से आगे हो गई।
पांचवें और छठे राउंड में भी भाजपा आगे रही, लेकिन सातवें और आठवें राउंड में जजपा फिर आगे हो गई, परंतु नौवें, दसवें और 11वें राउंड में भाजपा प्रत्याशी कृष्ण मिड्ढा ने फिर बढ़त बना ली। जबकि 12वें और 13वें राउंड में जेजेपी फिर आगे रही।
इस तरह कुल 13 राउंड की गिनती में 7 राउंड में जजपा और 6 राउंड में भाजपा आगे रही। शहरी क्षेत्रों में जहां भाजपा को बढ़त मिली, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में जजपा आगे रही। बता दें कि जींद उपचुनाव के लिए सभी दलों ने अपनी तरफ से मजबूत प्रत्याशी मैदान में उतारा था। भाजपा ने जींद से विधायक रहे डॉ. हरिचंद मिड्ढा के बेटे डॉ. कृष्ण मिड्ढा को मैदान में उतारा था।
उपचुनाव डॉ. हरिचंद मिड्ढा के निधन के कारण हुआ। इस सीट पर डॉ. हरिचंद मिड्ढा दो बार विधायक चुने गए थे। वहीं, कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता व कैथल से विधायक रणदीप सुरजेवाला को मैदान में उतारा। माना जा रहा था कि वह भाजपा को कड़ी टक्कर देंगे, लेकिन वह तीसरे स्थान पर चले गए। वहीं, इनेलो ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा भरने वाले उमेद सिंह रेढ़ू को अपना प्रत्याशी घोषित किया।
इनेलो से अलग होकर पार्टी बनाने वाले अभय चौटाला के भाई अजय चौटाला ने अपने छोटे बेटे दिग्विजय चौटाला को मैदान में उतारा। एक तरह से जींद उपचुनाव में ताऊ देवीलाल परिवार सियासत में विरासत की जंग भी लड़ रहा था, जिसमें फिलहाल अजय चौटाला आगे निकलते दिख रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनेलो फिलहाल पांचवें स्थान पर है, जबकि राजकुमार सैनी की नई पार्टी चौथे स्थान पर चल रही है।