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गजब! अब बिना जीन के पैदा होगी फसल

Sun, 10 Nov 2013 10:13 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़।
अमर उजाला, चंडीगढ़। Updated Sun, 10 Nov 2013 10:13 AM IST
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jean edition will increase elements of crops
जीन एडिटिंग तकनीक से बाहरी जीन डाले बिना ही फसल के पोषक तत्व बढ़ाए जा सकते हैं। मोहाली के नेशनल एग्री-फूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट ने जीन एडटिंग नाम की नई तकनीक ईजाद की है।
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इससे बाहरी जीन डाले बिना ही किसी भी फसल का उत्पादन और इसके पोषक तत्व घटाए-बढ़ाए जा सकते हैं। यह भारत की पहली तकनीक है। अब तक दूसरी फसल का जीन डालकर ऐसा किया जाता था। इसके कई नकारात्मक पहलू भी थे। इंडियन अकेडमी ऑफ साइंस की वार्षिक मीटिंग में इंस्टीट्यूट के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. राकेश तुली ने अपना रिसर्च पेपर पढ़ा।
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प्रोफेसर राकेश तुली ने बताया कि इस रिसर्च को पूरा करने में करीब एक साल का समय लगा। यदि इस तकनीक का सही इस्तेमाल किया जाए तो बच्चों में कुपोषण, अनाज की कम पैदावार जैसी समस्याओं से छुटकारा मिल सकेगा।
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यह होती है जीन एडिटिंग

हर फसल के अपने पोषक गुण होते हैं। पहले इन्हें संतुलित करने के लिए दूसरी फसल से जीन लेकर उसमें डाला जाता था। बीटी कॉटन और बीटी बैंगन इसके उदाहरण हैं।

इन फसलों पर कई तरह के विवाद भी सामने आए। जीन एडिटिंग के तहत उसी फसल के जीन से उसे ठीक किया जा सकेगा। इस तकनीक को किसी भी पौधे पर अपनाया जा सकता है। इस तकनीक से किसी भी फसल का उत्पादन भी बढ़ाया जा सकता है।

बार-बार नहीं बदलनी पड़ेगी फ्लू की वैक्सीन
वायरस के स्वरूप बदलने के कारण फ्लू की वैक्सीन बार-बार बदलनी पड़ती है। बंगलूरू के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वैज्ञानिक ऐसी वैक्सीन तैयार कर रहे हैं जो कम से कम दस साल तक असरकारी होगी।

प्रयोग का पहला चरण सफल हो गया है। इंस्टीट्यूट के बायो फिजिक्स के प्रोफेसर राघवन वर्धराजन ने बताया कि नई इजाद की गई वैक्सीन का चूहे पर प्रयोग किया गया था, जो पूरी तरह से सफल रहा। अब इसका दूसरा चरण भी जल्द ही किया जाएगा। इस काम में 20 से ज्यादा लोग जुटे हैं।


नई टेक्नोलॉजी से किसानों को अवगत कराएं
सीएसआईआर-आईएमटीईसीएच में आयोजित फूड एंड न्यूट्रिनल सिक्योरिटी के सिंपोजियम में कई वैज्ञानिकों ने अपनी बात रखी। खासकर खेती और फसल से जुड़े वैज्ञानिकों ने बताया कि नई-नई टेक्नोलॉजी विकसित तो हो रही हैं। इसका किसानों को कोई फायदा नहीं पहुंच रहा है। कुछ ही राज्यों में किसानों को अवेयर किया जा रहा है। सभी राज्यों के किसानों को ट्रेनिंग देनी चाहिए। मीट की शुरुआत सीएसआईआर-आईएमटीईसीएच के डायरेक्टर गिरीश साहनी के स्पेशल लेक्चर से हुई।
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