{"_id":"5dede1a48ebc3e1b8b4ded56","slug":"jbt-tgt-recruitment-paper-leak-case-enquiry","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पेपर लीक मामलाः 42 बर्खास्त, अब 830 जेबीटी और टीजीटी टीचर्स पर लटकी कार्रवाई की तलवार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पेपर लीक मामलाः 42 बर्खास्त, अब 830 जेबीटी और टीजीटी टीचर्स पर लटकी कार्रवाई की तलवार
Mon, 09 Dec 2019 11:24 AM IST
खुशबू गोयल
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 09 Dec 2019 11:24 AM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जेबीटी-टीजीटी भर्ती पेपर लीक मामले में शिक्षा विभाग ने 42 शिक्षकों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया। वहीं, अन्य कार्यरत 830 जेबीटी-टीजीटी टीचर्स पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। शिक्षा विभाग का कहना है कि कानूनी राय के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। दरअसल, पेपर लीक मामले के मुख्य आरोपी की जांच के दौरान वर्ष 2016 में हार्टअटैक से मौत हो गई थी। वहीं, एक अन्य आरोपी (एजेंट) की भी पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी। दोनों की मौत हो जाने से इस मामले की कई परतें खुलनी बाकी रह गईं थीं।
अब तक यह पता नहीं चल पाया है कि पेपर लीक का फायदा कितने उम्मीदवारों ने उठाया है। इस मामले में 49 शिक्षकों पर एफआईआर दर्ज की गई थी, जिनमें से एक की मौत हो गई और 6 ने ज्वाइन ही नहीं किया था। शिक्षा विभाग ने जेबीटी-टीजीटी भर्ती पेपर लीक मामले में शनिवार को 42 टीचर्स को नौकरी से बर्खास्त कर दिया। इन सभी टीचर्स के ऊपर 2015 जेबीटी-टीजीटी पेपर लीक मामले में एफआईआर दर्ज है। पुलिस ने पेपर लीक मामले में 49 टीचर्स पर एफआईआर दर्ज की थी, जिनमें से सिर्फ 42 ने ही नौकरी ज्वॉइन की थी।
शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को नौकरी से निकालने का फैसला पिछले हफ्ते पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के पेपर लीक मामले में दिए गए आदेशों को ध्यान में रखते हुए लिया है। नौकरी से निकाले गए टीचर्स में 34 जेबीटी और 8 टीजीटी हैं, जो कि शहर के विभिन्न स्कूलों में कार्यरत थे। वहीं अन्य 830 शिक्षकों में 443 जेबीटी और 430 टीजीटी-टीचर्स हैं, जिन पर अभी फैसला होना बाकी है। 2015 जेबीटी-टीजीटी भर्ती पेपर लीक मामले में केस चलने के कारण इनका प्रोबेशन पीरियड खत्म नहीं किया गया है।
विज्ञापन
इन टीचर्स ने 2015 में शहर के विभिन्न स्कूलों में ज्वॉइन किया था। नियुक्ति पत्र के अनुसार, उम्मीदवार दो साल के प्रोबेशन पीरियड पर थे। अब शिक्षा विभाग के आदेशों के बाद ही 830 जेबीटी-टीजीटी टीचर्स का प्रोबेशन पीरियड खत्म होगा।
विज्ञापन
अब तक यह पता नहीं चल पाया है कि पेपर लीक का फायदा कितने उम्मीदवारों ने उठाया है। इस मामले में 49 शिक्षकों पर एफआईआर दर्ज की गई थी, जिनमें से एक की मौत हो गई और 6 ने ज्वाइन ही नहीं किया था। शिक्षा विभाग ने जेबीटी-टीजीटी भर्ती पेपर लीक मामले में शनिवार को 42 टीचर्स को नौकरी से बर्खास्त कर दिया। इन सभी टीचर्स के ऊपर 2015 जेबीटी-टीजीटी पेपर लीक मामले में एफआईआर दर्ज है। पुलिस ने पेपर लीक मामले में 49 टीचर्स पर एफआईआर दर्ज की थी, जिनमें से सिर्फ 42 ने ही नौकरी ज्वॉइन की थी।
विज्ञापन
शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को नौकरी से निकालने का फैसला पिछले हफ्ते पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के पेपर लीक मामले में दिए गए आदेशों को ध्यान में रखते हुए लिया है। नौकरी से निकाले गए टीचर्स में 34 जेबीटी और 8 टीजीटी हैं, जो कि शहर के विभिन्न स्कूलों में कार्यरत थे। वहीं अन्य 830 शिक्षकों में 443 जेबीटी और 430 टीजीटी-टीचर्स हैं, जिन पर अभी फैसला होना बाकी है। 2015 जेबीटी-टीजीटी भर्ती पेपर लीक मामले में केस चलने के कारण इनका प्रोबेशन पीरियड खत्म नहीं किया गया है।
विज्ञापन
इन टीचर्स ने 2015 में शहर के विभिन्न स्कूलों में ज्वॉइन किया था। नियुक्ति पत्र के अनुसार, उम्मीदवार दो साल के प्रोबेशन पीरियड पर थे। अब शिक्षा विभाग के आदेशों के बाद ही 830 जेबीटी-टीजीटी टीचर्स का प्रोबेशन पीरियड खत्म होगा।
कानूनी सलाह के बाद लेंगे कार्यरत टीचर्स पर फैसला
डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन रुबिंदरजीत सिंह बराड़ ने बताया कि हम कोर्ट के निर्णय का अध्ययन करेंगे। इसके बाद कानूनी सलाहकार की राय और वरिष्ठ अधिकारियों की सलाह के बाद ही कार्यरत 830 जेबीटी-टीजीटी टीचर्स पर फैसला करेंगे।
मुख्य आरोपी की 2016 में हो गई थी हार्टअटैक से मौत
एसआईटी चंडीगढ़ की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2015 में दिल्ली की प्रिंटिंग प्रेस से पेपर लीक हुआ था। पेपर प्रिंटिंग प्रेस के ही कर्मचारी रनबीर सिंह रावत की ओर से लीक किया गया था। रावत ने पेपर के दो सेट लीक किएथे। पेपर एक उम्मीदवार को 7 से 10 लाख में बेचा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक पेपर लीक में पूरा गिरोह बना हुआ था। इसमें प्रिंटिंग प्रेस का कर्मचारी, एजेंट, उम्मीदवार और उम्मीदवारों ने आगे उम्मीदवारों की पूरी चेन बनाकर मामले को अंजाम दिया गया। इसमें मुख्य आरोपी रनबीर सिंह रावत की 2016 में हार्टअटैक से जबकि आरोपी एजेंट कमलेश कुमार उर्फ वकील साहिब की तेलंगाना पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी। इसके कारण पेपर लीक में लाभार्थी उम्मीदवारों की जांच अधूरी रह गई और इसमें शामिल अन्य लोगों को बारे में भी जानकारी नहीं मिल पाई।
पीयू को सौंपा था प्रश्न-पत्र की प्रिंटिंग का काम
जानकारी के अनुसार, प्रश्न-पत्र की सेटिंग, प्रिंटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन का काम पत्र के माध्यम से 4 दिसंबर 2014 को पंजाब यूनिवर्सिटी को सौंपा गया था। शिक्षा विभाग ने 3 नवंबर 2014 को 489 जेबीटी और 10 नवंबर 2014 को टीजीटी के लिए भर्ती का विज्ञापन निकाला था। इसके बाद जनवरी और फरवरी 2015 में जेबीटी व टीजीटी का पेपर हुआ। 1 मार्च 2015 को पेपर का रिजल्ट घोषित किया गया। अगस्त 2015 में अधिकारियों की ओर से उम्मीदवारों का चयन किया गया। इसके बाद पेपर लीक मामले में मई 2018 को शिक्षा विभाग ने सभी भर्ती किए उम्मीदवारों को निकालने का आदेश दिया था। मामला कैट ( चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल) में पहुंचा। कैट ने सभी शिक्षकों की नौकरी के पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
मुख्य आरोपी की 2016 में हो गई थी हार्टअटैक से मौत
एसआईटी चंडीगढ़ की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2015 में दिल्ली की प्रिंटिंग प्रेस से पेपर लीक हुआ था। पेपर प्रिंटिंग प्रेस के ही कर्मचारी रनबीर सिंह रावत की ओर से लीक किया गया था। रावत ने पेपर के दो सेट लीक किएथे। पेपर एक उम्मीदवार को 7 से 10 लाख में बेचा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक पेपर लीक में पूरा गिरोह बना हुआ था। इसमें प्रिंटिंग प्रेस का कर्मचारी, एजेंट, उम्मीदवार और उम्मीदवारों ने आगे उम्मीदवारों की पूरी चेन बनाकर मामले को अंजाम दिया गया। इसमें मुख्य आरोपी रनबीर सिंह रावत की 2016 में हार्टअटैक से जबकि आरोपी एजेंट कमलेश कुमार उर्फ वकील साहिब की तेलंगाना पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी। इसके कारण पेपर लीक में लाभार्थी उम्मीदवारों की जांच अधूरी रह गई और इसमें शामिल अन्य लोगों को बारे में भी जानकारी नहीं मिल पाई।
पीयू को सौंपा था प्रश्न-पत्र की प्रिंटिंग का काम
जानकारी के अनुसार, प्रश्न-पत्र की सेटिंग, प्रिंटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन का काम पत्र के माध्यम से 4 दिसंबर 2014 को पंजाब यूनिवर्सिटी को सौंपा गया था। शिक्षा विभाग ने 3 नवंबर 2014 को 489 जेबीटी और 10 नवंबर 2014 को टीजीटी के लिए भर्ती का विज्ञापन निकाला था। इसके बाद जनवरी और फरवरी 2015 में जेबीटी व टीजीटी का पेपर हुआ। 1 मार्च 2015 को पेपर का रिजल्ट घोषित किया गया। अगस्त 2015 में अधिकारियों की ओर से उम्मीदवारों का चयन किया गया। इसके बाद पेपर लीक मामले में मई 2018 को शिक्षा विभाग ने सभी भर्ती किए उम्मीदवारों को निकालने का आदेश दिया था। मामला कैट ( चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल) में पहुंचा। कैट ने सभी शिक्षकों की नौकरी के पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।